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Bundi News: कलेक्ट्रेट में बुजुर्ग ने प्रशासन को दी आत्मदाह की चेतावनी, शुरू किया धरना
Wed, 14 Aug 2024 06:11 PM IST
कोटा ब्यूरो
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, बूंदी
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, बूंदी
Published by: कोटा ब्यूरो
Updated Wed, 14 Aug 2024 06:11 PM IST
सार
राजस्थान के बूंदी जिले में एक बुजुर्ग व्यक्ति ने कलेक्ट्रेट में पहुंचकर प्रशासन के सामने आत्मदाह की चेतावनी दी है। साथ ही धरना प्रदर्शन पर भी बैठ गया।
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पीड़ित व्यक्ति
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बूंदी जिले में एक बुजुर्ग का मकान कब्जाए जाने का मामला सामने आया है। बुजुर्ग प्रशासन के चक्कर काट-काट कर थक गया। आखिरकार उसे न्याय नहीं मिला तो बुजुर्ग कलेक्टर चेंबर के बाहर धरने पर बैठ गया और आत्मदाह की चेतावनी देने लगा। बुजुर्ग द्वारा चेतावनी देने के बाद हरकत में आए पुलिस प्रशासन ने बुजुर्ग की सुध ली। लेकिन बुजुर्ग जिला कलेक्टर से मिलने के लिए अड़ा रहा।
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बुजुर्ग का आरोप है कि पुलिस से लेकर प्रशासन तक घर के लिए चक्कर काट रहा हूं, लेकिन प्रशासन मेरी सुनने को तैयार नहीं है। अब केवल करने का ही एक रास्ता बचा है तो क्यों न प्रशासन के सामने सुसाइड कर लूं और प्रशासन की आंखें खुल जाए। पिछले चार साल से मुझे मेरे घर से बेदखल किया हुआ है। इधर, मामला बढ़ा तो मौके पर पहुंचे पुलिस प्रशासन ने बुजुर्ग से समझाइश की। आखिरकार पुलिस ने बुजुर्ग को डिटेन कर लिया और थाने लेकर गई। पुलिस का कहना है कि इस मामले में संबंधित थाने के अधिकारियों को जानकारी दे दी गई है। बुजुर्ग को न्याय दिलवाया जाएगा दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी। वहीं, बुजुर्ग इस पूरे विवाद में जिला कलेक्टर से मिल नहीं पाया, उससे पहले ही पुलिस प्रशासन ने बुजुर्ग को डिटेन कर लिया।
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बुजुर्ग जोधराज सिंह ने बताया कि मेरा भाई लक्ष्मण सिंह और मैं एक पुश्तैनी मकान में दबलाना क्षेत्र में रहते हैं, जिसमें अपने-अपने हिस्से के मकान में संयुक्त रूप से रहते चले आ रहे थे। लक्ष्मण सिंह के मन में मकान के संबंध में नियत खराब हो गई और मेरे हिस्से के मकान पर कब्जा करने की नियत से चार साल पूर्व मारपीट कर घर से बाहर निकाल दिया है। मैंने जाति समाज के पंच पटेलों के पास में इसकी शिकायत की तो समाज के व्यक्तियों ने आरोपी को काफी समझाया, लेकिन उनके सामने आरोपी घर देने की बात कहता रहा। लेकिन मुझे घर के अंदर तक घुसने नहीं दिया।
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इस घटना की रिपोर्ट दबलाना थाना को दी गई। लेकिन आरोपी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई है। मैं घर के बाहर रह रहा हूं। दूसरों की चबूतरी कभी देव स्थान पर ही अपना गुजर बसर कर रहा हूं। जब सब जगह से न्याय की उम्मीद छोड़ दी तो मैं जिला कलेक्टर को अपनी पीड़ा बताने पहुंचा। यहां पर भी जिला कलेक्टर ने मुझे एसपी से मिलने की सलाह दी। एसपी से मिलने के बावजूद भी आज दिन तक कुछ नहीं हुआ तो वापस में जिला कलेक्टर के दफ्तर पर आया हूं। अब सीधा आत्मदाह चेतावनी दे रहा हूं। क्योंकि बूंदी जिले के सभी पुलिस प्रशासन के अधिकारियों से में मिलकर थक चुका हूं। मैं रिटायरमेंट होने के बाद से ही पैरालिसिस की बीमारी से जूझ रहा हूं। प्रशासन मुझ जैसे बुजुर्ग को इधर-उधर दौड़ा रहा है। बुजुर्ग ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए यह तक कह दिया की स्वतंत्रता दिवस का पर्व है और न्याय नहीं मिला तो मेरी जान चली जाए, जिससे आंखे खुल जाए।
मामला बढ़ा तो पुलिस ने बुजुर्ग को किया डिटेन, अब न्याय की उम्मीद
वहीं, मामला बढ़ा तो मौके पर पुलिस प्रशासन के आला अधिकारी पहुंच गए थे। इस पर बुजुर्ग को समझाया। बुजुर्ग लगातार दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहा था। मामला दबलाना थाना का होने के चलते पुलिस अधिकारियों ने कोतवाली थाना पुलिस को मामले की सूचना दी। इस पर पुलिस मामले के बाद तुरंत बूंदी के लिए रवाना हो गई और बुजुर्ग को न्याय दिलाने का आश्वासन दिया।
कोतवाली थाना पुलिस के सहायक उपरीक्षक राम सिंह ने बताया कि बुजुर्ग का कलेक्ट में धरने की जानकारी मिली थी। इस सूचना पर मौके पर पहुंचे। बुजुर्ग से समझाइश की गई है। बुजुर्ग को थाने पर ले जाए जा रहा है, जहां इसे खाना और इसकी सेहत का ध्यान रखा जाएगा और इसे न्याय दिलाया जाएगा, जिन लोगों ने इसका घर छीना है, उन पर कठोर कार्रवाई होगी। हालांकि, पुलिस अधिकारी ने कलेक्ट्रेट में आत्मदाह की चेतावनी की धमकी देने के सवाल पर कहा कि पुलिस को इस मामले की कोई जानकारी नहीं है।
अपने ही बने दुश्मन, चार साल पहले कर दिया था बेघर
बुजुर्ग जोधराज सिंह कोटा सहकारिता बैंक में कर्मचारी था। 75 वर्षीय बुजुर्ग ने बताया कि उसने अपनी कमाई से पिता की जमीन पर घर बनाया और अपने भाई उसके बेटे को रहने के लिए घर दिया। उसकी पत्नी की 20 साल पहले ही मौत हो चुकी है, उसके कोई संतान भी नहीं है। कोटा सहकारिता बैंक से रिटायर होने के कुछ साल बाद अचानक से पैरालिसिस अटैक आ गया था, उसके बाद से ही उसके भाई परिवार के लोग कुछ दिनों तक देखरेख करने लगे बाद में ऐसे ही छोड़ दिया। फिर उनकी नियत संपत्ति पर जाने लगी।
पिता की मौत के बाद वह सामूहिक बंटवारा कर चले गए थे। इसके बाद से ही मैं अपनी बंटवारे की संपत्ति में रह रहा था। मेरी बुजुर्गी का फायदा उठाकर भाई और उसके बेटा बेटी पत्नी ने मुझे घर से बेदखल कर दिया और सड़क पर ला दिया। मैंने सपने में भी नहीं सोचा था कि मेरा भाई मेरे साथ इस तरीके की घटना का अंजाम देगा और मेरे द्वारा बनाए गए घर पर के लिए मुझे ही मोहताज होना पड़ेगा।