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Rajasthan: आदेश का पालन नहीं, कोर्ट ने एसपी पर कार्रवाई करने के दिए निर्देश, डीजीपी से छीने सभी केस
Thu, 01 Sep 2022 08:37 PM IST
उदित दीक्षित
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, कोटा
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, कोटा
Published by: उदित दीक्षित
Updated Thu, 01 Sep 2022 08:37 PM IST
सार
पोस्को कोर्ट के आदेश का पालन नहीं होने पर अदालत ने 4 अगस्त को एसपी से दस्तावेज सहित ऐसा नहीं करने की जानकारी मांगी थी। पुलिस की ओर से भेजे ग्ए पत्र में केस डायरी मुकुल शर्मा के पास रहने देने का कारण संतोषजनक नहीं पाया गया। अदालत ने इसे एसपी की गम्भीर लापरवाही माना है।
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अदालत।
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
राजस्थान के कोटा जिले की पोस्को कोर्ट ने नाबालिग को बहला फुसलाकर भगाने के मामले में आदेश का पालन नहीं करने पर नाराजगी जताई है। विशेष न्यायाधीश आरिफ मोहम्मद ने कोटा सिटी एसपी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई के लिए डीजीपी को निर्देश दिए हैं।
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इसके अलावा मामले की जांच डीएसपी मुकुल शर्मा की बजाए किसी दूसरे जिले में तैनात ईमानदार पुलिस अधिकारी से कराने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा कोर्ट ने मुकुल शर्मा पर सख्त एक्शन लेते हुए तीन महीने तक किसी भी केस की जांच करने पर रोक भी लगा दी है। इस दौरान उन्हें पुलिस अकादमी या अन्य किसी सक्षम अकादमी से प्रशिक्षण दिलाने के निर्देश दिए गए हैं।
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न्यायाधीश आरिफ मोहम्मद ने अपने आदेश में लिखा कि न्यायालय के आदेश में कमियां निकालने का अधिकार सिटी एसपी को नहीं है। यदि न्यायालय का उक्त आदेश विधि अनुरूप नहीं है तो सक्षम अदालत द्वारा उक्त आदेश को अपास्त कर दिया जाएगा। आदेश का पालन नहीं कर उसमें कमियां निकालना अवमानना की श्रेणी में तो आता ही है, साथ ही यह अवचार (मिस कंडक्ट) की श्रेणी में भी आता है।
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फरियादी के वकील लोकेश सैनी ने बताया कि 18 जुलाई को कोर्ट ने सिटी एसपी को निर्देश दिया था कि मामले की जांच डीएसपी मुकुल शर्मा की बजाय किसी अन्य सक्षम अधिकारी से करवाई जाए। तीन अगस्त को पुलिस की ओर से कोर्ट में पेश तथ्यात्मक रिपोर्ट से सामने आया कि मामले की जांच अभी तक डीएसपी शर्मा ही कर रहे हैं।
कोर्ट के आदेश का पालन नहीं होने पर अदालत ने 4 अगस्त को एसपी से दस्तावेज सहित ऐसा नहीं करने की जानकारी मांगी। पुलिस की ओर से भेजे ग्ए पत्र में केस डायरी मुकुल शर्मा के पास रहने देने का कारण संतोषजनक नहीं पाया गया। अदालत ने इसे एसपी की गम्भीर लापरवाही माना है। साथ ही डीजीपी को पत्र भेजकर निर्देशों कर पालन कराने के साथ ही 10 दिन में कार्रवाई का ब्योरा देने के निर्देश दिए गए हैं।