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Kota News: कोटा मेडिकल कॉलेज में प्रसूताओं की मौत पर तेज हुई सियासत, बयानबाजी से लेकर जांच तक समझिए पूरा मामला

Sat, 09 May 2026 09:18 PM IST
Priya Verma न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोटा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोटा Published by: Priya Verma Updated Sat, 09 May 2026 09:18 PM IST
सार

कोटा मेडिकल कॉलेज में प्रसूताओं की मौत का मामला अब सियासी रंग ले चुका है। विपक्ष सरकार को घेर रहा है, जबकि सरकार जांच और कार्रवाई का दावा कर रही है। इस बीच अस्पताल की व्यवस्थाओं और संक्रमण को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।

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Kota: Politics Intensifies Over Maternal Deaths at Kota Medical College, From Blame Game to Probe Explained
प्रसूताओं की मौत पर तेज हुई बयानबाजी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सिजेरियन ऑपरेशन के बाद दो प्रसूताओं की मौत और चार की हालत गंभीर होने का मामला अब पूरी तरह राजनीतिक रंग ले चुका है। कांग्रेस सरकार और अस्पताल प्रशासन पर हमलावर है, जबकि राज्य सरकार बचाव के साथ कार्रवाई का दावा कर रही है। इस बीच अस्पताल की व्यवस्थाओं, संक्रमण और चिकित्सा लापरवाही को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
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गहलोत ने बताया अक्षम्य लापरवाही
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस पूरे मामले को सिस्टम की बड़ी विफलता बताते हुए सरकार पर सीधा हमला बोला। गहलोत ने कहा कि प्रसूताएं रातभर तड़पती रहीं, लेकिन किसी ने उनकी सुध नहीं ली। उन्होंने आरोप लगाया कि दो महिलाओं की मौत हो गई और अन्य की किडनी फेल होने की स्थिति बन गई, फिर भी सरकार की ओर से संवेदनशीलता नहीं दिखाई गई। उन्होंने मुख्यमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
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पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत - फोटो : अमर उजाला
प्रसादी लाल मीणा ने लगाए गंभीर आरोप
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देश पर पूर्व चिकित्सा मंत्री प्रसादी लाल मीणा समेत चार सदस्यीय टीम कोटा पहुंची। टीम ने अस्पताल में भर्ती महिलाओं की स्थिति देखी और डॉक्टरों से बातचीत की। इसके बाद प्रसादी लाल मीणा ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। 

उन्होंने कहा कि ऑपरेशन थिएटर, लेबर रूम और पोस्ट ऑपरेटिव देखभाल में साफ लापरवाही दिख रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब वार्ड और ओटी संक्रमणग्रस्त थे तो वहां ऑपरेशन क्यों किए गए? उन्होंने मेडिकल कॉलेज के एचओडी, अधीक्षक और प्रिंसिपल तक पर कार्रवाई की मांग की।

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पूर्व चिकित्सा मंत्री प्रसादी लाल मीणा - फोटो : अमर उजाला
स्वास्थ्य मंत्री ने किया सरकार का बचाव
मामले के तूल पकड़ने के बाद चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने हाईलेवल जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और दवाइयों, फ्लूड व ऑपरेशन में इस्तेमाल उपकरणों के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं। जयपुर से विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम को भी कोटा भेजा गया। मंत्री ने दावा किया कि हमने मरीजों को एयरलिफ्ट कर जयपुर भेजने की तैयारी की थी लेकिन प्रसूताओं के परिजनों ने इसके लिए इंकार कर दिया।
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चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर - फोटो : अमर उजाला
आखिर अस्पताल में हुआ क्या था?
दरअसल 4 मई को कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 6 महिलाओं का सिजेरियन ऑपरेशन किया गया था। ऑपरेशन के करीब चार घंटे बाद महिलाओं का ब्लड प्रेशर गिरने लगा और यूरिन आउटपुट बंद हो गया। सभी महिलाओं को पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड में रखा गया था। 



बाद में सामने आया कि वार्ड में सीलन, फंगस और संक्रमण जैसी गंभीर समस्याएं थीं। बताया गया कि लंबे समय से सेनिटाइजेशन भी ठीक से नहीं हुआ था। विशेषज्ञों के अनुसार यही संक्रमण महिलाओं की हालत बिगड़ने की बड़ी वजह बना।

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सीलन वाले वार्ड बने संक्रमण का कारण - फोटो : अमर उजाला
दो प्रसूताओं की मौत
इस पूरे मामले में अब तक 28 वर्षीय पायल और 20 वर्षीय ज्योति की मौत हो चुकी है। दोनों की मौत ऑपरेशन के 48 घंटे के भीतर हुई, वहीं चार अन्य महिलाओं की हालत गंभीर बताई गई, जिनमें से कुछ को डायलिसिस पर लेना पड़ा। बाद में किरण नाम की एक अन्य महिला की तबीयत बिगड़ने का मामला भी सामने आया।

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दो प्रसूताओं ने दम तोड़ा - फोटो : अमर उजाला
परिजनों के आरोपों ने बढ़ाई मुश्किलें
मृतक महिलाओं के परिजनों का आरोप है कि जब मरीजों की तबीयत बिगड़ रही थी तब डॉक्टरों और स्टाफ ने गंभीरता नहीं दिखाई। ज्योति के पति रवि ने आरोप लगाया कि कई बार शिकायत करने के बावजूद किसी ने ध्यान नहीं दिया। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि अस्पताल प्रशासन मामले को दबाने की कोशिश करता रहा।
 

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परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप - फोटो : अमर उजाला
सरकार ने की कार्रवाई 
लगातार बढ़ते दबाव के बीच सरकार ने चार चिकित्साकर्मियों पर कार्रवाई की है। इनमें गायनेकोलॉजी विभाग की डॉ. श्रद्धा की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं, जबकि एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. नवनीत शर्मा, सिस्टर इंचार्ज गुरजीत कौर और निमेश वर्मा पर भी एक्शन लिया गया है।
 

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सरकार ने की निलंबन की कार्रवाई - फोटो : अमर उजाला
सवाल सिर्फ इलाज का नहीं, सिस्टम पर भरोसे का
कोटा मेडिकल कॉलेज का मामला अब सिर्फ चिकित्सा लापरवाही तक सीमित नहीं रहा। प्रसूताओं की मौत के बाद सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था, संक्रमण नियंत्रण, जवाबदेही और मरीजों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। वहीं अब इस पूरे घटनाक्रम पर सियासत भी तेज हो चुकी है, जहां विपक्ष सरकार को घेरने में जुटा है और सरकार जांच व कार्रवाई का भरोसा दे रही है।
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