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Bundi News: बूंदी के CHC-PHC पर होगी किडनी-लिवर सहित अन्य जांच, स्पीकर बिरला के प्रयास से CSR में मिली मशीनें
Fri, 24 Mar 2023 10:42 PM IST
उदित दीक्षित
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: उदित दीक्षित
Updated Fri, 24 Mar 2023 10:42 PM IST
सार
लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला के गांवों तक स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के संकल्प को बड़ा बल मिला है। बूंदी में पीएचसी और सीएचसी स्तर पर जांच सुविधाओं में सुधार के लिए स्पीकर बिरला के प्रयासों से केंद्रीय भण्डारण निगम ने कई प्रकार की जांच मशीनों के लिए लगभग 1.10 करोड़ की राशि जारी की है।
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1.10 करोड़ रुपये जारी किए गए।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
इसके बाद बूंदी में कई सीएचसी और पीएचसी पर किडनी और लिवर जांच सहित कई प्रकार की विशेष जांचें हो सकेंगी। कोरोना के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी उजागर होने के बाद से ही स्पीकर बिरला छोटे-छोट गांवों तक स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए प्रयास कर रहे हैं। उनके हर परिवार स्वस्थ-हर गांव स्वस्थ अभियान के तहत संसदीय क्षेत्र कोटा-बूंदी में 4 एंबुलेंस गांव-गांव जाकर लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं दे रही हैं।
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बूंदी के पीएचसी और सीएचसी के लिए 109.75 लाख रुपए जारी
इसके अलावा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति को सुधारने पर भी स्पीकर बिरला का पूरा जोर है। इसके लिए वे पूर्व में भी कोटा और बूंदी में सीएसआर मद से विभिन्न प्रकार के जांच उपकरणों और एंबुलेंस के लिए राशि जारी करवा चुके हैं। स्पीकर बिरला के प्रयासों से अब केंद्रीय भण्डारण निगम ने सीएसआर मद से बूंदी के पीएचसी और सीएचसी के लिए 109.75 लाख रूपए जारी किए हैं। इस राशि में से सीबीसी जांच की पांच मशीनें खरीदने के लिए खर्च किए जाएंगे। यह मशीनें आने से ग्रामीण स्तर पर हिमोग्लोबिन के साथ प्लेटलेट्स, आरबीसी, डब्ल्यूबीसी सहित रक्त की अन्य जांच सुविधा मिल सकेगी।
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51 लाख रुपए की 3 एक्सरे मशीनें भी खरीदी जाएंगी
इसके अलावा 51 लाख रूपए की राशि से 3 एक्सरे मशीनें भी खरीदी जाएंगी। सात ईसीजी मशीनें खरीदने पर 8.75 लाख रुपए की राशि व्यय की जाएगी। यूरीन टेस्ट के लिए 10 लाख रुपए की लागत से 5 मशीनें खरीदीं जाएंगी।
किडनी और लीवर संबंधी जांचें भी होंगी संभव
केंद्रीय भण्डारण निगम ने सीएसआर मद से जो राशि जारी की है उससे 8 सेमी ऑटो एनालाइजर मशीनें भी खरीदी जाएंगी। यह मशीनें लीवर और किडनी रोग से जुड़ी यूरिया, क्रिएटनिन, लिपिड प्रोफाइल सहित अन्य प्रकार की महत्वपूर्ण जांचों में काम आती है। ग्रामीण स्तर पर इस तरह की मशीनें नहीं होने के कारण अक्सर मरीजों को बीमारी की पहचान ही नहीं हा पाती थी। यह जांचें करवाने के लिए उन्हें बड़े केंद्र पर जाना पड़ता था, जिसमें उन्हें परेशानी और आर्थिक हानि दोनों उठानी पड़ती थी।