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Rajasthan News: दीपावली पर पितरों का तर्पण और नवजातों का स्वागत, खुशी में बांटा जाता है एक-दूसरे को गुड़

Thu, 31 Oct 2024 04:57 PM IST
अर्पित याज्ञनिक न्यूज डेस्क, अमर उजाला, केकड़ी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, केकड़ी Published by: अर्पित याज्ञनिक Updated Thu, 31 Oct 2024 04:57 PM IST
सार

विधि विधानपूर्वक पितरों को धूप तर्पण कर श्रद्धांजलि देने की क्रिया यों तो श्राद्ध पक्ष में की जाती है, मगर पूर्वजों को याद कर उन्हें श्रद्धांजलि देने का यह कार्य गुर्जर समाज के लोग दीपावली के दिन करते हैं। इस परंपरा का निर्वहन इस समुदाय के लोग बरसों से कर रहे हैं।

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Kekri News: On the day of Diwali, people of Gurjar society performed Tarpan of their ancestors
पूर्वजों के तर्पण की तैयारी करते गुर्जर समाज के लोग। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दीपावली का पर्व उत्साह और उमंग से मनाने के साथ साथ क्षेत्र में गुर्जर समाज के लोगों ने एक अनूठी परंपरा भी आदर भाव से विधिवत निभाई। गुरुवार को उन्होंने छांट भरकर यानी की जल भरकर अपने पितरों को धूप लगाई। इस परंपरा के तहत दीपावली के दिन लक्ष्मी पूजन के बाद गुर्जर समाज के लोग अपने गांव के तालाब पर एकत्रित होते हैं और अपने पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए छांट भरकर उनका तर्पण करते हैं, जबकि यह परंपरा अन्य समाज के लोग श्राद्ध पक्ष में पूर्ण करते हैं।

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ग्राम मोलकिया के सरपंच शैतान गुर्जर ने बताया कि गुर्जर समाज की यह परंपरा अनूठी और सदियों पुरानी है, जिसमें दीपावली से एक दिन पहले ही इस अनुष्ठान की पूरी तैयारी कर ली जाती है। गुर्जर समाज के लोग इस दिन पितरों को खीर-चूरमे का भोग अर्पित करते हैं। यह भोग लगाने के बाद ही वे भोजन ग्रहण करते हैं। इस पर्व पर समाज के लोग अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ ही नए जन्मे बच्चों का स्वागत भी करते है। छांट भरने के बाद नवजात के आगमन की खुशी में एक-दूसरे को गुड़ बांटा जाता है।
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दीपावली के दिन सुबह से छांट भरने तक समाज के लोग व्रत रखते हैं। सुबह सभी परिवार तालाब के किनारे इकट्ठा होते हैं, थालियों में फुलके, खीर और अन्य पारंपरिक भोजन साथ लाते हैं। पारंपरिक वेशभूषा में सजे समाज के लोग भोग अर्पित कर पितरों का स्मरण करते हैं। इस दौरान आंधी-झाड़ा की बेल लेकर लंबी कतार में तर्पण किया जाता है, और भोजन को जलचर जीवों के लिए जल में अर्पित किया जाता है। समाज के मदन गुर्जर ने बताया कि जिस तालाब से छांट भरते हैं, वहां से पवित्र जल घर लाकर छिड़का जाता है। इस अनुष्ठान में नवजात बच्चों को भी शामिल किया जाता है, जहां उनका एक हाथ बैल पर रखवाया जाता है ताकि वे समृद्धि और परंपरागत संस्कारों का आशीर्वाद प्राप्त कर सकें।
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