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Kekri News: विद्युत निगमों के निजीकरण के खिलाफ बिजलीकर्मियों ने किया काम का बहिष्कार, कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

Fri, 29 Nov 2024 09:53 PM IST
प्रिया वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, केकड़ी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, केकड़ी Published by: प्रिया वर्मा Updated Fri, 29 Nov 2024 09:53 PM IST
सार

विद्युत निगमों के निजीकरण के खिलाफ केकड़ी में बिजली कर्मियों ने काम का बहिष्कार किया और रैली निकालकर प्रदर्शन किया। इसके बाद जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया।

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Kekri News: Electricity workers boycotted work against privatization, submitted memorandum to the collector
राजस्थान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

विद्युत उत्पादन, प्रसारण और वितरण निगमों में हो रहे निजीकरण के खिलाफ राजस्थान विद्युत संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले केकड़ी जिले में बिजली कर्मचारियों ने शुक्रवार को कार्य का बहिष्कार किया तथा शहर में रैली निकालकर प्रदर्शन किया और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नाम जिला कलेक्टर श्वेता चौहान को ज्ञापन सौंपा।

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संघर्ष समिति की ओर से ज्ञापन में राज्य सरकार से निजीकरण की प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगाने की मांग की गई और चेतावनी दी गई कि मांगें पूरी न होने पर आंदोलन तेज किया जाएगा। ज्ञापन में कहा गया कि राज्य सरकार द्वारा जनहित के लिए संचालित किए जाने वाले बिजली विभाग को भी अब लाभ-हानि के आधार पर निजीकरण की ओर धकेला जा रहा है। ज्ञापन में कहा गया कि इस निजीकरण से न केवल राज्य की सामरिक और तकनीकी सुरक्षा को खतरा है, बल्कि युवाओं के स्थाई रोजगार के अवसर भी समाप्त हो रहे हैं।
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ज्ञापन के मुख्य बिंदु

  • HAM मॉडल का विरोध : 33/11 केवी ग्रिड और फीडर सेग्रिगेशन के नाम पर निजीकरण राज्य और देश की सुरक्षा के लिए खतरा है।
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  • स्थाई कर्मचारियों की नियुक्ति हो : ग्रिड और सब-स्टेशनों के संचालन में स्थाई कर्मचारियों की कमी से दुर्घटनाओं में वृद्धि हो रही है।

 

  • स्मार्ट मीटर योजना पर सवाल : स्मार्ट मीटर की प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग करते हुए कहा गया कि अन्य राज्यों ने इसे खारिज किया है।

 

  • तापीय बिजलीघरों के निजीकरण का विरोध : उत्पादन गृहों को केंद्रीय निगमों को सौंपने की प्रक्रिया को बंद करने की मांग की गई।

 

  • पुरानी पेंशन योजना लागू करने की मांग : कर्मचारियों को OPS का लाभ देने की प्रक्रिया को पूरा नहीं करने पर तीव्र असंतोष व्यक्त किया गया।


संघर्ष समिति ने ज्ञापन में कहा कि वर्तमान निजीकरण नीतियों से राज्य के विद्युत क्षेत्र को कमजोर किया जा रहा है। यह कदम राज्य की जनता, उद्योग और कर्मचारियों के हितों के खिलाफ है। यदि सरकार ने जल्द ही इस संबंध में कोई ठोस कदम नहीं उठाया तो आंदोलन और व्यापक होगा।

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