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Kekri News: बघेरा गांव में पुरातत्व विभाग ने शुरू किया सर्वेक्षण, जानें क्या है केकड़ी के शिलालेखों का इतिहास

Sat, 28 Sep 2024 08:23 PM IST
अर्पित याज्ञनिक न्यूज डेस्क, अमर उजाला, केकड़ी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, केकड़ी Published by: अर्पित याज्ञनिक Updated Sat, 28 Sep 2024 08:23 PM IST
सार

पुरातत्व विशेषज्ञों ने शिलालेखों की छाप विधि से जानकारी एकत्र की। इन शिलालेखों के अध्ययन से क्षेत्र की प्रशासनिक संरचना और जीर्णोद्धार से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां मिलेंगी।

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Kekri News: Archaeological department started survey in Baghera village of Kekri
शिलालेखों की छाप लेते पुरातत्व सर्वेक्षण दल के सदस्य। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारतीय पुरातत्व विभाग, लखनऊ ने केकड़ी जिले में ऐतिहासिक महत्व के गांव बघेरा में प्राचीन शिलालेखों का अध्ययन और सर्वेक्षण का कार्य शुरू किया। बघेरा में पुरातन इतिहास से जुड़े कई शिलालेख मौजूद हैं, जिनसे क्षेत्र के वैभवशाली अतीत की झलक मिलती है। इनके अध्ययन से प्राप्त जानकारी इतिहास के नए पहलुओं को उजागर करने में सहायक सिद्ध हो सकती है। शुक्रवार को पुरातत्व सर्वेक्षण के उपनिदेशक डॉ. आलोक रंजन तिवारी और उनके सहयोगी कमलेश कुमार ने इन शिलालेखों की छाप ली। इस दौरान क्षेत्र के शिक्षाविद बृजकिशोर शर्मा और इतिहासकार पुष्पा शर्मा भी उपस्थित रहे।

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बघेरा ग्राम का ऐतिहासिक महत्व
बघेरा ग्राम, जिसका प्राचीन नाम व्याघ्रपादपुर था, अपने समृद्ध इतिहास और पुरातात्विक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। इतिहासकार पुष्पा शर्मा ने अपने शोध ग्रंथ में इस क्षेत्र में स्थित पुरातन महत्व की अनेक सामग्रियों का उल्लेख किया है। वह इस क्षेत्र की ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण और संवर्धन के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। बघेरा का विश्व प्रसिद्ध वराह मंदिर और ऐतिहासिक तोरणद्वार आज भी पुरातत्व विभाग के संरक्षण में हैं।
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शिलालेखों की छाप विधि
पुरातत्व सर्वेक्षण दल ने शिलालेखों की छाप लेने के लिए विशेष विधि का उपयोग किया। पहले शिलालेखों को साफ कर उन पर स्याही पोती गई, फिर कागज की सहायता से अक्षरों की छाप ली गई। इस प्रक्रिया से प्राप्त शिलालेखों की इबारत से क्षेत्र की तत्कालीन प्रशासनिक संरचना और जीर्णोद्धार से जुड़ी महत्त्वपूर्ण जानकारियां मिलती हैं। इन अभिलेखों का विवरण विभाग के वार्षिक प्रतिवेदन में प्रकाशित किया जाएगा, जिससे क्षेत्र के इतिहास को समझने में मदद मिलेगी। शिक्षाविद बृजकिशोर शर्मा के अनुसार इन शिलालेखों का अध्ययन केकड़ी जिले के इतिहास को समझने के लिए महत्वपूर्ण सिद्ध होगा। इससे न केवल अतीत के संदर्भों का पता चलेगा बल्कि नई ऐतिहासिक धारणाओं का भी विकास होगा।

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