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पैरों से अपनी तकदीर संवारने में लगा है मुकंद
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Thu, 23 Mar 2017 04:06 PM IST
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पैरों की सहायता से लिखकर पेपर देता मुकंद
- फोटो : amar ujala
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आज हाथ होते हुए भी असफल होने पर लोग जिस तकदीर का रोना रोते हैं उसी तकदीर को अपने पैरों से संवारने में लगा है यह छात्र। बचपन में हादसे का शिकार होने के बावजूद मुकंद ने हिम्मत नहीं हारी है।
मामला जोधपुर के पावटा निवासी नोबेल इंटरनेशनल स्कूल के छात्र मुकंद बाहेती से जुड़ा है जिसके दोनों हाथ होते हुए भी वह इनसे कुछ नहीं कर पाता है। इसके बावजूद उसने अपने हौंसले की बदौलत पैर से ही लिखना सीखा और आज हर काम वह अपने पैरों से ही करता है। यहां तक कि मुकंद ने अपनी दसवीं और हाल ही हुई बारहवीं की परीक्षा भी पैरों से लिखकर ही दी। अब उसे अच्छे नंबरों से अपनी रैंक बनाने का पूरा विश्वास है। मुकंद का सपना आईआईटी करना है जिसकी तैयारी उसने अभी से शुरू कर दी है।
स्कूल में भी मुकंद अपने साथियों और टीचर्स में काफी लोकप्रिय है। इसका कारण उसकी पढ़ाई के प्रति लगन और खुश रहने का जज्बा है। उसके स्कूल प्रिंसिपल प्रमोद सिंह का कहना है कि विपरीत परिस्थितियों में कैसे विजेता बन कर निकला जाता है यह मुकंद से सीखा जा सकता है। मुकुंद के पिता देवेन्द्र प्रसाद एक व्यापारी हैं। उन्होंने बताया कि मुकुंद जब बहुत छोटा था तो नीचे गिर गया। इसके बाद से ही उसके हाथ—पैरों में हचलत बंद हो गई थी। काफी इलाज के बाद सिंगापुर के चिकित्सकों ने उसके पैरों को कुछ हद तक ठीक कर दिया, लेकिन हाथ सही नहीं हो सके।
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ऐसे में मुकंद ने अपने पैरों से ही हाथों का काम लेना शुरू कर दिया। अब उसकी लगन देखकर उन्हें बहुत खुशी महसूस होती है। वे बताते हैं कि मुकंद अपने सभी काम पैरों से ही करता है। दसवीं में उसके विज्ञान विषय में 98 और गणित में 96 अंक आए थे।
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मामला जोधपुर के पावटा निवासी नोबेल इंटरनेशनल स्कूल के छात्र मुकंद बाहेती से जुड़ा है जिसके दोनों हाथ होते हुए भी वह इनसे कुछ नहीं कर पाता है। इसके बावजूद उसने अपने हौंसले की बदौलत पैर से ही लिखना सीखा और आज हर काम वह अपने पैरों से ही करता है। यहां तक कि मुकंद ने अपनी दसवीं और हाल ही हुई बारहवीं की परीक्षा भी पैरों से लिखकर ही दी। अब उसे अच्छे नंबरों से अपनी रैंक बनाने का पूरा विश्वास है। मुकंद का सपना आईआईटी करना है जिसकी तैयारी उसने अभी से शुरू कर दी है।
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स्कूल में भी मुकंद अपने साथियों और टीचर्स में काफी लोकप्रिय है। इसका कारण उसकी पढ़ाई के प्रति लगन और खुश रहने का जज्बा है। उसके स्कूल प्रिंसिपल प्रमोद सिंह का कहना है कि विपरीत परिस्थितियों में कैसे विजेता बन कर निकला जाता है यह मुकंद से सीखा जा सकता है। मुकुंद के पिता देवेन्द्र प्रसाद एक व्यापारी हैं। उन्होंने बताया कि मुकुंद जब बहुत छोटा था तो नीचे गिर गया। इसके बाद से ही उसके हाथ—पैरों में हचलत बंद हो गई थी। काफी इलाज के बाद सिंगापुर के चिकित्सकों ने उसके पैरों को कुछ हद तक ठीक कर दिया, लेकिन हाथ सही नहीं हो सके।
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ऐसे में मुकंद ने अपने पैरों से ही हाथों का काम लेना शुरू कर दिया। अब उसकी लगन देखकर उन्हें बहुत खुशी महसूस होती है। वे बताते हैं कि मुकंद अपने सभी काम पैरों से ही करता है। दसवीं में उसके विज्ञान विषय में 98 और गणित में 96 अंक आए थे।