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रोमानिया से आए पर्यटक ने एक गांव में डाला डेरा
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Sun, 02 Apr 2017 02:27 PM IST
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गांव के रहन सहन में इनोट ने अपने आप को भी बखूबी ढाल लिया
- फोटो : amar ujala
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भारतीय संस्कृति से रूबरू होने के लिए जैसलमेर आए रोमानिया निवासी इनोट को धोरों से लगाव हो गया है। पांच महीने हो गए है लेकिन, उनका यहां से जाने का मन नहीं करता। इनोट यहां रामदेवरा गांव में ग्रामीणों के साथ बहुत ज्यादा हिलमिल गए है। ग्रामीण भी इस अतिथि को पूरा सम्मान देते है।
इनोट ने बताया कि भारत के बारे में उसको महर्षि रमण की पुस्तक 'मैं कौन हूं' से जानकारी मिली। इसके बाद वह रोमानिया से सीधा चैन्नई पहुंचा। यहां से एक बाईक खरीदी और निकल पड़ा भारतीय संस्कृति को जानने के लिए। इनोट ने बताया कि वह अब तक दक्षिण भारत के तमिलनाडु,कर्नाटक राज्यों में घूमकर वहां की संस्कृति को जान चुका है।
इसके बाद वह जैसलमेर पंहुचा है तथा वहां घूमने के बाद रामदेवरा पंहुचा। यहां से वह जयपुर होते हुए दिल्ली जाएगा। इस दौरान भारत में विभिन्न जगहों पर संस्कृति के बारे में और भी ज्यादा जानकारी लेगा फिर इसके बाद नेपाल होते हुए अपने वतन जाएगा।
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इनोट ने बताया कि भारत के बारे में उसको महर्षि रमण की पुस्तक 'मैं कौन हूं' से जानकारी मिली। इसके बाद वह रोमानिया से सीधा चैन्नई पहुंचा। यहां से एक बाईक खरीदी और निकल पड़ा भारतीय संस्कृति को जानने के लिए। इनोट ने बताया कि वह अब तक दक्षिण भारत के तमिलनाडु,कर्नाटक राज्यों में घूमकर वहां की संस्कृति को जान चुका है।
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इसके बाद वह जैसलमेर पंहुचा है तथा वहां घूमने के बाद रामदेवरा पंहुचा। यहां से वह जयपुर होते हुए दिल्ली जाएगा। इस दौरान भारत में विभिन्न जगहों पर संस्कृति के बारे में और भी ज्यादा जानकारी लेगा फिर इसके बाद नेपाल होते हुए अपने वतन जाएगा।
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रहते रहते सीख गया यहां की बोली
रोमानियन पर्यटक इनोट
- फोटो : amar ujala
इनोट अपनी पांच महीनों की भारत यात्रा के दौरान स्थानीय लोगों के घरों में अधिक रुका है और उसे यह अनुभव हुआ कि लोगों के घरों में रुकने से यहां की संस्कृति को नजदीक से समझा जा सकता हैं। इनोट ने कहा कि उसे अपनी भारत यात्रा के दौरान किसी तरह की कोई समस्या नहीं हुई और वो जहां भी गया वहां उसका भारत के लोगों ने पूरा ध्यान रखा।
इनोट के अनुसार भारत के बारे में सुना, वैसा ही यहां आकर देखा है। यहां की संस्कृति हजारों वर्ष पुरानी है तथा यहां हर अलग अलग क्षेत्र में भाषा बदल जाती है। यहां के लोग अत्यन्त सीधे और सरल है। उसने बताया कि हालांकि भारतीय शहरों की संस्कृति में अब धीरे धीरे पश्चिम की संस्कृति आ रही है। लेकिन गांवों में आज भी वहीं पुराने लोग है। उसने बताया कि उसकी यह भारत यात्रा जिन्दगी भर याद रहेगी। पांच महीने में वह भारत में आम बोलचाल में बोले जाने वाले शब्द भी सीख गया है।