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Jodhpur: जोजरी रिवर फ्रंट के पुनरुद्धार प्रयास शुरू, साबरमती रिवर फ्रंट की तर्ज पर होगा डेवलपमेंट
Mon, 09 Jan 2023 10:53 PM IST
अरविंद कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जोधपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जोधपुर
Published by: अरविंद कुमार
Updated Mon, 09 Jan 2023 10:53 PM IST
सार
केन्द्रीय जलशक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत के कोशिशों से क्लीन गंगा प्रोजेक्ट में जोधपुर का जोजरी रिवर फ्रंट पुनरुद्धार प्रोजेक्ट भी शामिल हो चुका है। जोधपुर शहर के पास से गुजर रही जोजरी नदी का डेवलपमेंट साबरमती रिवर फ्रंट की तर्ज पर होगा।
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टीम ने जोधपुर का दौरा किया
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
जोजरी नदी की मौजूदा स्थिति का मूल्यांकन करने के लिए केन्द्रीय जलशक्ति मंत्रालय की एक टीम ने सोमवार को जोधपुर का दौरा किया। टीम ने जिला कलक्टर से वार्ता की और इस नदी के पुनरुद्धार के लिए अपना प्लान पेश किया। जिला प्रशासन इस प्लान के सभी पहलुओं की समीक्षा कर अपने सुझावों के साथ वापस मंत्रालय को अपनी रिपोर्ट सौंपेगा। इसके बाद पूरी योजना बनाई जाएगी।
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जोजरी नदी को अहमदाबाद की साबरमती रिवर फ्रंट की तर्ज पर विकसित किया जाना है। केन्द्रीय जलशक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने जोजरी नदी को क्लीन गंगा परियोजना में शामिल करवा दिया था। टीम ने पाया कि वर्तमान में औद्योगिक और नगरपालिका क्षेत्र का गंदा पानी सीधे नदी में डाला जा रहा है। यह नदी वर्तमान में बहुत खराब स्थिति में है। टीम ने जोजरी में प्रदूषण कम करने के लिए राज्य और केंद्र सरकार की ओर से किए जा रहे उपायों की जांच की। साथ ही मौजूदा रिसोर्सेस का रिव्यू भी किया। प्रदूषण कम करने के लिए किए जा सकने वाले संभावित उपायों पर भी चर्चा की।
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गंदे पानी के ट्रीटमेंट की माकूल व्यवस्था नहीं...
टीम ने पाया कि जोजरी ने जितना सीवरेज, वेस्ट वाटर और इंडस्ट्री का अपशिष्ट डाला जा रहा है, उसकी तुलना में ट्रीटमेंट प्लांट्स की कैपेसिटी काफी कम है। यह नदी एक तरह से नाले में तब्दील हो चुकी है। टीम के अनुसार साल 2035 तक नदी में 200 एमएलडी गंदा पानी डाले जाने का अनुमान है। इसकी तुलना में यहां मौजूदा वक्त में 120 एमएलडी गंदा पानी ही ट्रीट किया जा रहा है, जो कि नाकाफी है।
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हालांकि, 75 एमएलडी का ट्रीटमेंट प्लांट बन रहा है। फिर भी जरूरत के हिसाब से यहां ट्रीटमेंट प्लांट कम है। इसी तरह इंडस्ट्री से निकलने वाले गंदे पानी के ट्रीटमेंट के लिए जरूरत के मुताबिक सीईटी (कॉमन एफ्ल्यूएंट ट्रीटमेंट) प्लांट्स नहीं है। वर्तमान में 35 एमएलडी गंदा पानी उद्योगों से निकल रहा है, जबकि मात्र 20 एमएलडी गंदा पानी सीईटी प्लांट से साफ हो रहा है। टीम ने यह भी पाया कि शहर के सीवरेज लाइन जगह जगह टूटी पड़ी है, उसमें मलबा जमा है।
नदी के कायाकल्प का प्लान पेश...
टीम ने जिला कलक्टर से मुलाकात की और नदी के कायाकल्प के लिए मंत्रालय की ओर से तैयार की गई प्राइमरी स्कीम पर चर्चा की। इस स्कीम में शहरी और औद्योगिक दोनों तरह के पॉल्युशन के सॉल्यूशन का प्लान शामिल किया गया है। इसमें नई सीवर लाइन बिछाने और पुराने सीवर लाइन को ठीक करने जैसे उपाय शामिल हैं।
रिवर फ्रंट की तरह होगा डेवलपमेंट...
टीम की इस स्कीम में बताया गया कि हर सीईटीपी के बाहर वेटलैंड डवलप किया जाएगा। इसके लिए नए सीईटी प्लांट्स लगाए जाएंगे। इन प्लांट्स से पानी ट्रीट होगा और साफ पानी बाहर निकलेगा। इसकी मदद से नदी के किनारे हरियाली से भरे एरिया डवलप किए जाएंगे, जो ग्रीन रिवर फ्रंट की तरह काम करेंगे। इससे शहर की सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
जिला प्रशासन करेगा स्कीम रिव्यू...
टीम ने अपनी योजना जिला प्रशासन के सामने पेश की। अब जिला प्रशासन इसे संबंधित विभागों से चर्चा कर समीक्षा करेगा और अपने सुझावों के साथ इसे वापस भेजा जाएगा। इसके बाद डिटेल स्कीम बनाई जाएगी।