{"_id":"58db4d8c4f1c1bfe0a63f914","slug":"counting-ended-of-the-great-indian-bustard-in-jaisalmer","type":"story","status":"publish","title_hn":"विलुप्त हो रहे इस पक्षी की गणना कर लौटे 55 एक्सपर्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
विलुप्त हो रहे इस पक्षी की गणना कर लौटे 55 एक्सपर्ट
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Wed, 29 Mar 2017 12:13 PM IST
विज्ञापन
गोडावण की गणना के लिए जुटी एक्सपर्ट्स की टीम
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने जैसलमेर में सात दिनों में गोडावण की गणना पूरी कर ली है। गौरतलब है कि डेजर्ट नेशनल पार्क में गोडावण की गणना के लिए 55 टीमों का गठन किया गया। जिसमें 110 लोगों ने जिले के विभिन्न क्षेत्रों में जाकर गोडावण की गिनती करने का काम किया।
ले के करीब 22 हजार वर्ग किलोमीटर के विस्तृत क्षेत्र में ग्रीड पद्धति के माध्यम से गोडावण की गिनती की। ग्रीड पद्धति में ट्रांजेट सिस्टम से गोडावण की वास्तविक संख्या का पता लगाने के लिए 55 टीमों ने सात दिनों तक फील्ड में रहकर गणना की। इस बार गणना के तहत कई एक्सपर्ट आए। विशेषज्ञों द्वारा इस गणना में सहयोग किया गया। साथ ही पुणे, मुंबई, देहरादून व बेंगलूरू से कई वॉलंटियर भी बुलाए गए थे।
इनके साथ डीएनपी के अधिकारी, रेंजर व फॉरेस्टर ने भी गणना की। डीएनपी की ओर से गणना के लिए 55 टीमें बनाई गई। हर टीम में एक एक विशेषज्ञ शामिल था। इन टीमों ने 7 दिन तक जंगलों में रहकर गणना की। यह गणना वाहन ट्रांजेक्ट के आधार पर की गई। सभी टीमों को अलग अलग वाहन उपलब्ध करवाए गए।
विज्ञापन
हालांकि डीएनपी द्वारा कुछ टीमों को प्रायोगिक तौर पर उंटों पर भी भेजा गया। गोडावण के शर्मीले पक्षी होने के कारण उंटाें का प्रयोग किया गया। अब यह प्रयोग सफल होने के बाद अगले साल गणना उंटों पर ही की जाएगी।
इसमें प्रत्येक टीम को 12 गुणा 12 किलोमीटर का ग्रिड दिया गया। उस ग्रिड में जिस रास्ते पर उस टीम को चलना है उसे जीपीएस सिस्टम में फीड कर दिया गया। टीमें उसी रास्ते पर चली और दोनों तरफ दिखाई देने वाले वन्यजीवों की गणना की।
फील्ड फायरिंग रेंज भी डीएनपी क्षेत्र में आता है जिसके तहत फील्ड फायरिंग रेंज में भी वन्यजीवों की गणना की गई। लेकिन फील्ड फायरिंग रेंज में चल रहे प्रशिक्षण के कारण बमबारी होती रही जिससे विशेषज्ञों व वॉलंटियर को अंदर नहीं जाने दिया गया।
अभ्यास खत्म होने के बाद इन्हें अंदर जाकर गणना की अनुमति दी गई। जिससे फील्ड फायरिंग रेंज में इस बार वन्यजीवों की संख्या कम आने की संभावना है।
विज्ञापन
ले के करीब 22 हजार वर्ग किलोमीटर के विस्तृत क्षेत्र में ग्रीड पद्धति के माध्यम से गोडावण की गिनती की। ग्रीड पद्धति में ट्रांजेट सिस्टम से गोडावण की वास्तविक संख्या का पता लगाने के लिए 55 टीमों ने सात दिनों तक फील्ड में रहकर गणना की। इस बार गणना के तहत कई एक्सपर्ट आए। विशेषज्ञों द्वारा इस गणना में सहयोग किया गया। साथ ही पुणे, मुंबई, देहरादून व बेंगलूरू से कई वॉलंटियर भी बुलाए गए थे।
विज्ञापन
इनके साथ डीएनपी के अधिकारी, रेंजर व फॉरेस्टर ने भी गणना की। डीएनपी की ओर से गणना के लिए 55 टीमें बनाई गई। हर टीम में एक एक विशेषज्ञ शामिल था। इन टीमों ने 7 दिन तक जंगलों में रहकर गणना की। यह गणना वाहन ट्रांजेक्ट के आधार पर की गई। सभी टीमों को अलग अलग वाहन उपलब्ध करवाए गए।
विज्ञापन
हालांकि डीएनपी द्वारा कुछ टीमों को प्रायोगिक तौर पर उंटों पर भी भेजा गया। गोडावण के शर्मीले पक्षी होने के कारण उंटाें का प्रयोग किया गया। अब यह प्रयोग सफल होने के बाद अगले साल गणना उंटों पर ही की जाएगी।
इसमें प्रत्येक टीम को 12 गुणा 12 किलोमीटर का ग्रिड दिया गया। उस ग्रिड में जिस रास्ते पर उस टीम को चलना है उसे जीपीएस सिस्टम में फीड कर दिया गया। टीमें उसी रास्ते पर चली और दोनों तरफ दिखाई देने वाले वन्यजीवों की गणना की।
फील्ड फायरिंग रेंज भी डीएनपी क्षेत्र में आता है जिसके तहत फील्ड फायरिंग रेंज में भी वन्यजीवों की गणना की गई। लेकिन फील्ड फायरिंग रेंज में चल रहे प्रशिक्षण के कारण बमबारी होती रही जिससे विशेषज्ञों व वॉलंटियर को अंदर नहीं जाने दिया गया।
अभ्यास खत्म होने के बाद इन्हें अंदर जाकर गणना की अनुमति दी गई। जिससे फील्ड फायरिंग रेंज में इस बार वन्यजीवों की संख्या कम आने की संभावना है।