फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Rajasthan ›   jaswant singh can be surprising for both congress and bjp

भाजपा और कांग्रेस दोनों को चौंका सकते हैं जसवंत सिंह

Sun, 06 Apr 2014 08:24 AM IST
Updated Sun, 06 Apr 2014 08:24 AM IST
विज्ञापन
jaswant singh can be surprising for both congress and bjp

भाजपा से टिकट कटने के बाद बगावत पर उतरे पूर्व केन्द्रीय मंत्री जसवंत सिंह के कारण देश की दूसरी सबसे बड़ी लोकसभा सीट बाड़मेर-जैसलमेर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी हुई है।

विज्ञापन


यहां दिन का तापमान करीब 42 डिग्री है और चुनावी सरगरमियां भी गर्मी जितनी ही तेज चल रही हैं। यहां देखने को मिला कि जसवंत सिंह की नाव संवेदना लहरों पर सवार हैं, जो उन्हें किनारे की ओर ढकेल भी रही है।
विज्ञापन


स्थानीय होने के कारण जसवंत सिंह को भरपूर समर्थन मिल रहा है। लोगों का कहना है कि भाजपा ने इनके (जसवंत सिंह) साथ ठीक नहीं किया।

इधर, उनके सामने हाल की कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए कर्नल सोनाराम हैं, तो कांग्रेस के वर्तमान सांसद हरीश चौधरी, दोनों ही जाट समाज से आते हैं। जाट भी बड़ा वोट बैंक है, लेकिन बंटने के कारण दोनों की ताकत भी बंटी हुई लग रही है।

विज्ञापन
विज्ञापन

जसवंत ने की भाजपा-कांग्रेस की राह कठिन

jaswant singh can be surprising for both congress and bjp
इस संसदीय क्षेत्र की आठ में से सात विधानसभा सीटें भाजपा के खाते में हैं और इनमें से तीन पर राजपूत विधायक हैं। सातों विधायक चाहते थे कि जसवंत सिंह को टिकट मिले।

जसवंत सिंह का राजपूत समाज पर ही नहीं, यहां के मुस्लिमों के बीच भी अच्छा खासा प्रभाव है। इधर, वर्षों से जुड़े होने के कारण जसवंत सिंह का भाजपा का वोट काटना तो तय है। साथ ही, भाजपा का वोट बैंक नहीं माने जानेवाले अल्पसंख्यकों के पास भी कांग्रेस के अलावा जसवंत विकल्प बनकर खड़े हैं।

उनके बेटे विधायक मानवेन्द्र सिंह का ससुराल और उनकी साली का रिश्ता भी पाकिस्तान में हुआ है। ऐसे में सीमा पार के रिश्तेदार यहां के रिश्तेदारों को जसवंत सिंह के पक्ष में ही वोट करने का आग्रह कर रहे हैं।

जातिगत मतों का गणित

jaswant singh can be surprising for both congress and bjp
इस सीट पर सर्वाधिक जाट मतदाता हैं, लेकिन राजपूत, अल्पसंख्यक तथा दलित मतदाता भी परिणाम पटलने की हैसियत रखते हैं।

यहां करीब 17 लाख मतदाताओं में से करीब 2.5 लाख राजपूत मतदाता हैं, जो मानते हैं कि भाजपा ने टिकट वितरण में राजपूत समाज का खयाल नहीं रखा।

इधर, कर्नल सोनाराम की नजरें करीब 3.5 लाख जाट मतदाताओं पर लगी हुई हैं, लेकिन कांग्रेस के हरीश चौधरी के भी इसी समाज से आने के कारण जाट मतदाता निश्चित रूप से बंटेंगे।

यहां अल्पसंख्यक के भी करीब 2.5  तथा दलित समाज के करीब 4 लाख मत हैं, जिन पर जसवंत सिंह का प्रभाव खासा प्रभाव है।

वसुंधरा राजे की प्रतिष्ठा की लड़ाई

jaswant singh can be surprising for both congress and bjp

यहां भाजपा और जसवंत सिंह की नहीं, बल्कि जसवंत सिंह और मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के बीच प्रतिष्ठा की लड़ाई है।

राजे ने ही कर्नल सोनाराम को भाजपा से टिकट दिलवाया है, जो इस संसदीय सीट पर कांग्रेस से वर्ष 1996 से 2004 तक तीन बार लगातार सांसद रहे हैं।

लेकिन विधानसभा चुनाव में इसी संसदीय क्षेत्र में ही आनेवाली बायतू सीट पर कांग्रेस से खड़े हुए कर्नल सोनाराम को भाजपा के कैलाश चौधरी से हार का स्वाद चखाया था।

सोनाराम को जिताने के लिए वसुंधरा रेज ने यहां के विधायकों को कितने ही कड़े निर्देश दे दिए हों, लेकिन उन्हें जिताने के लिए लगन से लगेंगे, इसमें शक है।

कांग्रेस की भी मुश्किलें

jaswant singh can be surprising for both congress and bjp

राजस्थान में विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की गहलोत सरकार की तरह ही महंगाई, भ्रष्टाचार सहित कुछ मुद्दों पर यूपीए सरकार से नाराजगी की कीमत कांग्रेस के हरीश चौधरी को चुकानी पड़ सकती है।

कांग्रेस के वोट बैंक अल्पसंख्यकों को जसवंत सिंह अपनी ओर खींच रहे हैं तथा जाट वोट बैंक में सोनाराम सेंध मान रहे हैं। राजपूत भी जसवंत के साथ खड़े हैं।

दलितों से जरूर उन्हें कांग्रेस के पक्ष में मतदान करने की उम्मीद है। हालांकि इस सीट का इतिहास जरूर कांग्रेस के पक्ष में। यहां हुए 14 लोकसभा चुनावों में 9 बार कांग्रेस जीती है और भाजपा का खाता केवल एक बार ही खुला है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed