'जैसे मुझे निकाला ऐसे तो चपरासी को भी नहीं निकालता'
बाड़मेर से टिकट नहीं मिलने से नाराज भाजपा के वरिष्ठ नेता जसवंत सिंह ने समर्थकों की बड़ी संख्या के साथ पहुंचकर सोमवार को इस सीट से निर्दलीय के रूप में नामांकन दाखिल कर दिया।
सूत्रों ने बताया कि पर्चा भरने के बाद उन्होंने फोन पर लालकृष्ण आडवाणी से बात की और आशीर्वाद लिया। इसके बाद उन्होंने सभा में भाजपा नेताओं को जमकर खरी-खोटी सुनाई।
उन्होंने कहा कि भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह और प्रदेश की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने उन्हें धोखा दिया है। जबकि मुख्यमंत्री के तौर पर राजे का तथा भाजपा के अध्यक्ष पद के लिए राजनाथ सिंह के नाम उन्होंने ही सुझाए थे।
ऐसे तो कोई चपरासी को भी नहीं निकालता
इधर, भाजपा के खिलाफ बन रहे माहौल को सुधारने के लिए वसुंधरा राजे खुद मंगलवार को बाड़मेर पहुंचेंगी और चार दिन पहले कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल होकर टिकट लेनेवाले कर्नल सोनाराम के नामांकन के समय मौजूद रहेंगी।
वे रैली भी आयोजित कर सकती हैं।
सभा में जसवंत सिंह ने जिन्ना को सेकुलर कहने के बाद पार्टी से निकाले जाने के मुद्दे को याद दिलाया तथा कहा कि उस समय जिस तरह से उन्हें पार्टी से निकाला गया, उस तरह से कोई चपरासी को भी नहीं निकालता है।
आडवाणी की भी नहीं चली
सिंह ने कहा कि उनके परिजनों ने कहा था कि भाजपा अब कांग्रेस की तरह हो गई है और केवल वोट बैंक की राजनीति करने लगी है। उनके अनुसार नामाकंन दाखिल करके वे राहत महसूस कर रहे हैं।
नामांकन के समय उनके पुत्र बाड़मेर की शिव विधानसभा सीट से विधायक मानवेन्द्र सिंह उनके साथ नहीं थे।
जसवंत सिंह ने कहा कि बाड़मेर को लेकर आडवाणी ने उन्हें समर्थन दिया था, लेकिन उनकी भी नहीं चली और उन्हें टिकट नहीं दिया गया।
उन्होंने कहा कि भाजपा में नई और पुरानी विचारधारा के बीच लड़ाई चल रही है। पार्टी ने केवल उनके साथ धोखा ही नहीं है, बल्कि एक तरह से तानाशाही की है। जिसके तहत वरिष्ठ नेताओं और पार्टी के कार्यकर्ताओं का अपमान किया जा रहा है।
विधायक बोले जसवंत के साथ है जनता
इस पर राजे ने विधायकों से कहा कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर कमान सम्भाले, जिससे जनता भाजपा उम्मीदवार कर्नल सोनाराम के साथ आ जाएगी।
इस बैठक में जसवंत सिंह के पुत्र शिव से विधायक मानवेन्द्र सिंह नहीं पहुंचे थे। बैठक के बाद वसुंधरा ने खुद बाड़मेर पहुंचने का कार्यक्रम बनाया।
इससे पहले सिंह के समर्थन में क्षेत्र के विधायक भी साथ आ गए थे, लेकिन राजे की समझाइश के बाद वह मान गए। सिंह के निर्दलीय चुनाव लड़ने से भाजपा को काफी मुश्किल का सामना करना पड़ सकता है।