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जैसलमेर-पोकरण निकाय चुनाव: टिकटों पर तस्वीर लगभग साफ, भाजपा-कांग्रेस में आखिरी दौर की कवायद तेज
Fri, 28 Aug 2026 11:35 PM IST
जैसलमेर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जैसलमेर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जैसलमेर
Published by: जैसलमेर ब्यूरो
Updated Fri, 28 Aug 2026 11:35 PM IST
सार
नगरीय निकाय चुनाव को लेकर जैसलमेर और पोकरण में राजनीतिक गतिविधियां अब निर्णायक दौर में पहुंच गई हैं। नगर निकायों में पार्षद पद के लिए भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों ने अपने अधिकांश प्रत्याशियों के नाम तय कर लिए हैं। हालांकि दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों ने अभी तक आधिकारिक रूप से प्रत्याशियों की सूची सार्वजनिक नहीं की है।
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जैसलमेर-पोकरण चुनावी रण तैयार
विस्तार
नगरीय निकाय चुनाव को लेकर जैसलमेर और पोकरण में कांग्रेस की ओर से तैयार की गई सूची को अंतिम मंजूरी के लिए जयपुर भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। वहीं भाजपा ने प्रत्याशियों के नाम सार्वजनिक करने के बजाय अलग रणनीति अपनाई है। पार्टी स्तर पर जिन दावेदारों के नाम लगभग तय माने जा रहे हैं, उन्हें फोन के माध्यम से टिकट मिलने की सूचना दी जा रही है। इसके पीछे पार्टी की कोशिश संभावित बगावत और टिकट नहीं मिलने वाले दावेदारों की नाराजगी को चुनावी मैदान में उतरने से पहले ही नियंत्रित करने की बताई जा रही है।
नामांकन प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में पहुंचने के साथ ही दोनों शहरों में चुनावी सरगर्मी और बढ़ने वाली है। प्रत्याशियों की आधिकारिक घोषणा के बाद पार्टी नेताओं, समर्थकों और कार्यकर्ताओं की सक्रियता भी तेज होने की संभावना है।
भाजपा ने अपनाई गोपनीय रणनीति
भाजपा ने जैसलमेर और पोकरण में टिकट वितरण को लेकर इस बार सार्वजनिक घोषणा से पहले अंदरूनी स्तर पर प्रत्याशियों को जानकारी देने का रास्ता चुना है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक जिन नामों पर सहमति बन चुकी है, उन्हें व्यक्तिगत रूप से फोन कर चुनाव लड़ने की तैयारी करने के संकेत दिए जा रहे हैं।
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पार्टी की इस रणनीति का एक बड़ा कारण टिकट वितरण के बाद पैदा होने वाली संभावित नाराजगी को माना जा रहा है। स्थानीय निकाय चुनाव में एक-एक वार्ड में कई दावेदार सामने आते हैं। ऐसे में अंतिम समय तक नामों को सार्वजनिक नहीं करने से पार्टी नेतृत्व को असंतुष्ट दावेदारों से बातचीत करने और स्थिति संभालने के लिए कुछ अतिरिक्त समय मिल जाता है।
भाजपा की ओर से प्रत्याशियों को टिकट की जानकारी दिए जाने के बाद पार्टी का अधिकृत चुनाव चिह्न और आवश्यक प्रक्रिया पूरी की जाएगी। यानी नाम सार्वजनिक होने से पहले ही कई संभावित उम्मीदवार चुनावी तैयारी शुरू कर सकते हैं।
पिछले चुनावों के अनुभव से सबक
टिकट वितरण के दौरान राजनीतिक दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ जीतने योग्य प्रत्याशी तलाशना नहीं होती, बल्कि टिकट से वंचित दावेदारों को साथ बनाए रखना भी होती है। स्थानीय चुनावों में यह चुनौती और बढ़ जाती है, क्योंकि वार्ड स्तर पर व्यक्तिगत संपर्क और स्थानीय समीकरणों की भूमिका काफी महत्वपूर्ण होती है।
भाजपा द्वारा नामों को अंतिम समय तक सीमित दायरे में रखने की रणनीति को इसी राजनीतिक गणित से जोड़कर देखा जा रहा है। पार्टी नहीं चाहती कि अधिकृत सूची जारी होने से पहले ही टिकट को लेकर विरोध का माहौल बने या कोई दावेदार निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरने की तैयारी कर ले। हालांकि अंतिम सूची सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि टिकट वितरण के बाद पार्टी के भीतर किस तरह की प्रतिक्रिया देखने को मिलती है।
कांग्रेस की सूची जयपुर पहुंची
कांग्रेस में भी टिकट वितरण की प्रक्रिया लगभग अंतिम चरण में बताई जा रही है। जैसलमेर और पोकरण के संभावित प्रत्याशियों के नामों पर स्थानीय स्तर पर मंथन के बाद सूची को प्रदेश स्तर पर मंजूरी के लिए जयपुर भेजा गया है।
स्थानीय निकाय चुनाव में कांग्रेस के सामने भी वार्डवार मजबूत चेहरे उतारने की चुनौती है। पार्टी को ऐसे उम्मीदवारों के चयन पर जोर देना होगा जिनकी अपने वार्ड में व्यक्तिगत पकड़ के साथ-साथ संगठन और स्थानीय कार्यकर्ताओं के बीच भी स्वीकार्यता हो।
कांग्रेस की सूची पर अंतिम मंजूरी के बाद ही अधिकृत रूप से तस्वीर साफ होगी। सूची जारी होने के साथ यह भी सामने आएगा कि पार्टी ने किन पुराने चेहरों पर दोबारा भरोसा जताया है और किन वार्डों में नए चेहरों को मौका दिया गया है।
रविवार को सामने आ सकती है दोनों पार्टियों की तस्वीर
नामांकन की अंतिम तारीख करीब आने के कारण अब राजनीतिक दल ज्यादा समय तक प्रत्याशियों के नाम रोककर नहीं रख सकते। चुनावी प्रक्रिया के बीच छुट्टियों का असर भी पड़ रहा है। ऐसे में माना जा रहा है कि रविवार तक भाजपा और कांग्रेस दोनों अपनी अधिकृत सूची जारी कर सकती हैं।
सूची सामने आते ही जैसलमेर और पोकरण की चुनावी तस्वीर काफी हद तक स्पष्ट हो जाएगी। इसके बाद राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं को अपने-अपने प्रत्याशियों के पक्ष में प्रचार अभियान शुरू करने का मौका मिलेगा।
टिकट वितरण के बाद सबसे दिलचस्प स्थिति उन वार्डों में बन सकती है जहां एक से अधिक मजबूत दावेदार टिकट की दौड़ में रहे हैं। पार्टी का फैसला आने के बाद ऐसे दावेदारों की अगली राजनीतिक भूमिका चुनावी मुकाबले को प्रभावित कर सकती है।
सोमवार से नामांकन में दिखेगा शक्ति प्रदर्शन
प्रत्याशियों की सूची जारी होने के बाद चुनावी गतिविधियों में तेजी आने की संभावना है। नामांकन दाखिल करने के दौरान भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशी समर्थकों और स्थानीय नेताओं के साथ निर्वाचन केंद्रों तक पहुंचकर अपनी ताकत का प्रदर्शन कर सकते हैं।
नामांकन रैली और समर्थकों की मौजूदगी अब चुनावी माहौल का महत्वपूर्ण हिस्सा बनने वाली है। प्रत्याशी यह संदेश देने की कोशिश करेंगे कि उनके पीछे पार्टी संगठन के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर भी मजबूत जनसमर्थन मौजूद है।
जैसलमेर और पोकरण जैसे क्षेत्रों में स्थानीय मुद्दे, वार्ड स्तर की समस्याएं, व्यक्तिगत संपर्क और प्रत्याशी की छवि चुनावी परिणामों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इसलिए टिकट वितरण के बाद दोनों दलों के सामने सिर्फ प्रत्याशी घोषित करने की चुनौती नहीं होगी, बल्कि पार्टी के भीतर संभावित असंतोष को संभालना भी उतना ही जरूरी होगा।
बगावत रोकना दोनों दलों के लिए बड़ी चुनौती
निकाय चुनाव में एक वार्ड का समीकरण कई बार विधानसभा या लोकसभा चुनाव से अलग होता है। यहां स्थानीय रिश्ते, व्यक्तिगत पहचान, सामाजिक समीकरण और लंबे समय से क्षेत्र में सक्रियता जैसे पहलू मतदाताओं के निर्णय को प्रभावित कर सकते हैं।
यही वजह है कि टिकट वितरण के बाद असंतुष्ट दावेदारों को मनाना दोनों दलों के लिए अहम होगा। यदि कोई मजबूत दावेदार निर्दलीय मैदान में उतरता है तो उसका सीधा असर पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के वोट बैंक पर पड़ सकता है।
यह भी पढ़ें: यूजीसी रोलबैक: मकराना का बीजेपी को अल्टीमेटम, बोले- मांग नहीं मानी तो चुनाव में करेंगे विरोध
भाजपा और कांग्रेस दोनों ही इस स्थिति से बचने की कोशिश में हैं। आने वाले कुछ दिन यह तय करेंगे कि टिकट वितरण के बाद कितने दावेदार पार्टी के फैसले को स्वीकार करते हैं और कितने चुनावी मैदान में अलग रास्ता अपनाते हैं।
अब निगाहें अधिकृत सूची और नामांकन पर
फिलहाल जैसलमेर और पोकरण में चुनावी मुकाबले की औपचारिक तस्वीर पूरी तरह सामने नहीं आई है। भाजपा और कांग्रेस दोनों के अधिकांश नाम तय होने के बाद अब आधिकारिक सूची का इंतजार है। सूची जारी होने के साथ ही यह साफ होगा कि दोनों दलों ने किन वार्डों में पुराने चेहरों पर भरोसा जताया और कहां नए उम्मीदवारों को मौका दिया।
इसके बाद नामांकन का अंतिम दौर शुरू होगा और राजनीतिक गतिविधियां वार्ड स्तर तक पहुंच जाएंगी। नेताओं के दौरे, समर्थकों की लामबंदी, नामांकन रैलियां और प्रत्याशियों के बीच सीधा मुकाबला चुनावी माहौल को और गर्म करेगा।
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नामांकन प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में पहुंचने के साथ ही दोनों शहरों में चुनावी सरगर्मी और बढ़ने वाली है। प्रत्याशियों की आधिकारिक घोषणा के बाद पार्टी नेताओं, समर्थकों और कार्यकर्ताओं की सक्रियता भी तेज होने की संभावना है।
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भाजपा ने अपनाई गोपनीय रणनीति
भाजपा ने जैसलमेर और पोकरण में टिकट वितरण को लेकर इस बार सार्वजनिक घोषणा से पहले अंदरूनी स्तर पर प्रत्याशियों को जानकारी देने का रास्ता चुना है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक जिन नामों पर सहमति बन चुकी है, उन्हें व्यक्तिगत रूप से फोन कर चुनाव लड़ने की तैयारी करने के संकेत दिए जा रहे हैं।
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पार्टी की इस रणनीति का एक बड़ा कारण टिकट वितरण के बाद पैदा होने वाली संभावित नाराजगी को माना जा रहा है। स्थानीय निकाय चुनाव में एक-एक वार्ड में कई दावेदार सामने आते हैं। ऐसे में अंतिम समय तक नामों को सार्वजनिक नहीं करने से पार्टी नेतृत्व को असंतुष्ट दावेदारों से बातचीत करने और स्थिति संभालने के लिए कुछ अतिरिक्त समय मिल जाता है।
भाजपा की ओर से प्रत्याशियों को टिकट की जानकारी दिए जाने के बाद पार्टी का अधिकृत चुनाव चिह्न और आवश्यक प्रक्रिया पूरी की जाएगी। यानी नाम सार्वजनिक होने से पहले ही कई संभावित उम्मीदवार चुनावी तैयारी शुरू कर सकते हैं।
पिछले चुनावों के अनुभव से सबक
टिकट वितरण के दौरान राजनीतिक दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ जीतने योग्य प्रत्याशी तलाशना नहीं होती, बल्कि टिकट से वंचित दावेदारों को साथ बनाए रखना भी होती है। स्थानीय चुनावों में यह चुनौती और बढ़ जाती है, क्योंकि वार्ड स्तर पर व्यक्तिगत संपर्क और स्थानीय समीकरणों की भूमिका काफी महत्वपूर्ण होती है।
भाजपा द्वारा नामों को अंतिम समय तक सीमित दायरे में रखने की रणनीति को इसी राजनीतिक गणित से जोड़कर देखा जा रहा है। पार्टी नहीं चाहती कि अधिकृत सूची जारी होने से पहले ही टिकट को लेकर विरोध का माहौल बने या कोई दावेदार निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरने की तैयारी कर ले। हालांकि अंतिम सूची सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि टिकट वितरण के बाद पार्टी के भीतर किस तरह की प्रतिक्रिया देखने को मिलती है।
कांग्रेस की सूची जयपुर पहुंची
कांग्रेस में भी टिकट वितरण की प्रक्रिया लगभग अंतिम चरण में बताई जा रही है। जैसलमेर और पोकरण के संभावित प्रत्याशियों के नामों पर स्थानीय स्तर पर मंथन के बाद सूची को प्रदेश स्तर पर मंजूरी के लिए जयपुर भेजा गया है।
स्थानीय निकाय चुनाव में कांग्रेस के सामने भी वार्डवार मजबूत चेहरे उतारने की चुनौती है। पार्टी को ऐसे उम्मीदवारों के चयन पर जोर देना होगा जिनकी अपने वार्ड में व्यक्तिगत पकड़ के साथ-साथ संगठन और स्थानीय कार्यकर्ताओं के बीच भी स्वीकार्यता हो।
कांग्रेस की सूची पर अंतिम मंजूरी के बाद ही अधिकृत रूप से तस्वीर साफ होगी। सूची जारी होने के साथ यह भी सामने आएगा कि पार्टी ने किन पुराने चेहरों पर दोबारा भरोसा जताया है और किन वार्डों में नए चेहरों को मौका दिया गया है।
रविवार को सामने आ सकती है दोनों पार्टियों की तस्वीर
नामांकन की अंतिम तारीख करीब आने के कारण अब राजनीतिक दल ज्यादा समय तक प्रत्याशियों के नाम रोककर नहीं रख सकते। चुनावी प्रक्रिया के बीच छुट्टियों का असर भी पड़ रहा है। ऐसे में माना जा रहा है कि रविवार तक भाजपा और कांग्रेस दोनों अपनी अधिकृत सूची जारी कर सकती हैं।
सूची सामने आते ही जैसलमेर और पोकरण की चुनावी तस्वीर काफी हद तक स्पष्ट हो जाएगी। इसके बाद राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं को अपने-अपने प्रत्याशियों के पक्ष में प्रचार अभियान शुरू करने का मौका मिलेगा।
टिकट वितरण के बाद सबसे दिलचस्प स्थिति उन वार्डों में बन सकती है जहां एक से अधिक मजबूत दावेदार टिकट की दौड़ में रहे हैं। पार्टी का फैसला आने के बाद ऐसे दावेदारों की अगली राजनीतिक भूमिका चुनावी मुकाबले को प्रभावित कर सकती है।
सोमवार से नामांकन में दिखेगा शक्ति प्रदर्शन
प्रत्याशियों की सूची जारी होने के बाद चुनावी गतिविधियों में तेजी आने की संभावना है। नामांकन दाखिल करने के दौरान भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशी समर्थकों और स्थानीय नेताओं के साथ निर्वाचन केंद्रों तक पहुंचकर अपनी ताकत का प्रदर्शन कर सकते हैं।
नामांकन रैली और समर्थकों की मौजूदगी अब चुनावी माहौल का महत्वपूर्ण हिस्सा बनने वाली है। प्रत्याशी यह संदेश देने की कोशिश करेंगे कि उनके पीछे पार्टी संगठन के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर भी मजबूत जनसमर्थन मौजूद है।
जैसलमेर और पोकरण जैसे क्षेत्रों में स्थानीय मुद्दे, वार्ड स्तर की समस्याएं, व्यक्तिगत संपर्क और प्रत्याशी की छवि चुनावी परिणामों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इसलिए टिकट वितरण के बाद दोनों दलों के सामने सिर्फ प्रत्याशी घोषित करने की चुनौती नहीं होगी, बल्कि पार्टी के भीतर संभावित असंतोष को संभालना भी उतना ही जरूरी होगा।
बगावत रोकना दोनों दलों के लिए बड़ी चुनौती
निकाय चुनाव में एक वार्ड का समीकरण कई बार विधानसभा या लोकसभा चुनाव से अलग होता है। यहां स्थानीय रिश्ते, व्यक्तिगत पहचान, सामाजिक समीकरण और लंबे समय से क्षेत्र में सक्रियता जैसे पहलू मतदाताओं के निर्णय को प्रभावित कर सकते हैं।
यही वजह है कि टिकट वितरण के बाद असंतुष्ट दावेदारों को मनाना दोनों दलों के लिए अहम होगा। यदि कोई मजबूत दावेदार निर्दलीय मैदान में उतरता है तो उसका सीधा असर पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के वोट बैंक पर पड़ सकता है।
यह भी पढ़ें: यूजीसी रोलबैक: मकराना का बीजेपी को अल्टीमेटम, बोले- मांग नहीं मानी तो चुनाव में करेंगे विरोध
भाजपा और कांग्रेस दोनों ही इस स्थिति से बचने की कोशिश में हैं। आने वाले कुछ दिन यह तय करेंगे कि टिकट वितरण के बाद कितने दावेदार पार्टी के फैसले को स्वीकार करते हैं और कितने चुनावी मैदान में अलग रास्ता अपनाते हैं।
अब निगाहें अधिकृत सूची और नामांकन पर
फिलहाल जैसलमेर और पोकरण में चुनावी मुकाबले की औपचारिक तस्वीर पूरी तरह सामने नहीं आई है। भाजपा और कांग्रेस दोनों के अधिकांश नाम तय होने के बाद अब आधिकारिक सूची का इंतजार है। सूची जारी होने के साथ ही यह साफ होगा कि दोनों दलों ने किन वार्डों में पुराने चेहरों पर भरोसा जताया और कहां नए उम्मीदवारों को मौका दिया।
इसके बाद नामांकन का अंतिम दौर शुरू होगा और राजनीतिक गतिविधियां वार्ड स्तर तक पहुंच जाएंगी। नेताओं के दौरे, समर्थकों की लामबंदी, नामांकन रैलियां और प्रत्याशियों के बीच सीधा मुकाबला चुनावी माहौल को और गर्म करेगा।