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जैसलमेर में विदेशी फंडिंग मामले में ईडी की कार्रवाई: बेल्जियम से आए पांच करोड़ की जांच, दो ठिकानों पर तलाशी

Tue, 22 Sep 2026 11:48 AM IST
जैसलमेर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जैसलमेर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जैसलमेर Published by: जैसलमेर ब्यूरो Updated Tue, 22 Sep 2026 11:48 AM IST
सार

जैसलमेर में विदेशी फंडिंग से जुड़े मामले में ईडी ने देऊ राम और उसके सहयोगी ज्ञान चंद से जुड़े दो ठिकानों पर तलाशी ली है। एजेंसी के अनुसार, दोनों से जुड़े खातों में बेल्जियम से करीब 5.10 करोड़ रुपये आए, जिनमें से लगभग 2.60 करोड़ रुपये नकद निकाले गए।

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ED Raids Jaisalmer Investigation Underway Into 5 Crore Foreign Funding From Belgium Across Two Locations
ईडी ने दो ठिकानों पर मारी रेड - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

राजस्थान के जैसलमेर में विदेशी फंडिंग से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 19 सितंबर 2026 को दो ठिकानों पर तलाशी कार्रवाई की। जांच का केंद्र जैसलमेर निवासी देऊ राम और उसके सहयोगी ज्ञान चंद हैं। ईडी के अनुसार, दोनों से जुड़े खातों में बेल्जियम से करीब 5.10 करोड़ रुपये की विदेशी धनराशि पहुंची।
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जांच एजेंसी के मुताबिक, रकम का बड़ा हिस्सा ब्रसेल्स स्थित अमर एएसबीएल नामक संस्था से आया। ईडी का कहना है कि यह संस्था वर्ष 2011 में बेल्जियम में स्थापित हुई थी और इसका संचालन जोस गोफिनेट तथा उनके बेटे सालियन गोफिनेट से जुड़ा है। एजेंसी के अनुसार, संस्था की जैसलमेर में गतिविधियां होने के बावजूद भारत में इसके नाम से कोई ट्रस्ट या एनजीओ पंजीकृत नहीं मिला।
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अलग-अलग उद्देश्यों के नाम पर आया पैसा
ईडी के मुताबिक, बैंक रिकॉर्ड में विदेशी रकम को परिवार के रखरखाव व बचत, शैक्षणिक सेवाओं, सांस्कृतिक एवं मनोरंजन गतिविधियों, कमीशन एजेंट सेवाओं और कर्मचारियों के मुआवजे जैसे अलग-अलग उद्देश्यों के तहत दर्ज किया गया। जांच एजेंसी का दावा है कि इन उद्देश्यों के अनुरूप सेवाएं दिए जाने के पर्याप्त प्रमाण नहीं मिले और रकम के वास्तविक इस्तेमाल की जांच की जा रही है। एजेंसी के अनुसार, करीब 2.60 करोड़ रुपये नकद निकाले जाने की बात भी सामने आई है। साथ ही विदेशी धनराशि के प्राप्त होने और खर्च किए जाने का उचित लेखा-जोखा नहीं मिलने का दावा किया गया है।
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एफसीआरए और फेमा के उल्लंघन की जांच
ईडी का कहना है कि संबंधित विदेशी संस्था के पास भारत में आवश्यक एफसीआरए पंजीकरण नहीं था। इसके बावजूद कथित तौर पर विदेशी योगदान प्राप्त किया गया। कार्रवाई FEMA, 1999 के तहत की गई है और विदेशी मुद्रा से जुड़े लेन-देन की जांच की जा रही है। जांच में यह भी सामने आने का दावा है कि बाद में देऊ राम और ज्ञान चंद के खातों में विदेशी रकम स्वीकार किए जाने में दिक्कत आने पर अन्य लोगों के निजी बैंक खातों के जरिए धन मंगाने का प्रयास किया गया।


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धर्मांतरण के आरोप भी जांच के दायरे में
मामले में विदेशी फंड के कथित इस्तेमाल को धर्म प्रचार और धर्मांतरण गतिविधियों से भी जोड़ा जा रहा है। हालांकि, ये फिलहाल जांच एजेंसी के आरोप हैं। इनके संबंध में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद ही सामने आएगा। तलाशी के दौरान मिले दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच जारी है। ईडी अब विदेशी रकम के स्रोत, उसके इस्तेमाल और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों व संस्थाओं की भूमिका का पता लगा रही है।
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