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देवप्रयाग हादसा: जैसलमेर के एक परिवार की तीन महिलाएं अब भी लापता, तलाश जारी; चार शवों का हुआ अंतिम संस्कार
Thu, 04 Jun 2026 07:50 PM IST
जैसलमेर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जैसलमेर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जैसलमेर
Published by: जैसलमेर ब्यूरो
Updated Thu, 04 Jun 2026 07:50 PM IST
सार
उत्तराखंड के देवप्रयाग में अलकनंदा नदी किनारे हुए भीषण सड़क हादसे ने जैसलमेर के एक परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। हादसे में चार लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि परिवार की तीन महिलाएं अब भी लापता हैं। वहीं 12 वर्षीय आयुष्मान गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती है और उसका उपचार जारी है।
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60 घंटे बाद भी 3 महिलाएं लापता, अलकनंदा में जारी सर्च ऑपरेशन
विस्तार
उत्तराखंड के देवप्रयाग में अलकनंदा नदी के किनारे हुए भीषण सड़क हादसे ने जैसलमेर के एक परिवार की खुशियों को पलभर में मातम में बदल दिया। दुर्घटना के दो दिन बाद भी परिवार की तीन महिलाएं लापता हैं, जबकि चार मृतकों का अंतिम संस्कार हरिद्वार में कर दिया गया है। दूसरी ओर हादसे में गंभीर रूप से घायल 12 वर्षीय आयुष्मान अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहा है।
रेस्क्यू टीमों ने लगातार दूसरे दिन भी अलकनंदा नदी में व्यापक सर्च ऑपरेशन चलाया, लेकिन देर शाम तक लापता तीनों महिलाओं का कोई सुराग नहीं मिल सका। अब एसडीआरएफ और गोताखोरों की विशेष टीमें नदी की गहराई में उतरकर तलाशी अभियान चला रही हैं।
चारधाम यात्रा के दौरान हुआ दर्दनाक हादसा
जानकारी के अनुसार जैसलमेर शहर के दरियानाथ की बावड़ी क्षेत्र निवासी एम्स में कार्यरत युवा चिकित्सक डॉ. दिनेश कुमार माली अपने परिवार के साथ चारधाम यात्रा और उत्तराखंड भ्रमण पर गए हुए थे। करीब दस दिन पहले परिवार जैसलमेर से उत्तराखंड पहुंचा था।
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26 मई को परिवार हरिद्वार पहुंचा, जहां डॉ. दिनेश ने अपने पिता लूणाराम को पतंजलि आश्रम में पंचकर्म उपचार के लिए ठहराया। इसके बाद वे अपनी मां कमला देवी, बड़ी बहन गुड्डी देवी और उनके चार बच्चों के साथ किराए की इनोवा कार में उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों की यात्रा पर निकल गए। यात्रा पूरी करने के बाद 2 जून को सभी लोग हरिद्वार लौट रहे थे, ताकि लूणाराम को साथ लेकर वापस राजस्थान लौट सकें। लेकिन देवप्रयाग के निकट पहुंचते ही यह यात्रा एक भयावह हादसे में बदल गई।
200 मीटर गहरी खाई में गिरी इनोवा
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार इनोवा कार अचानक अनियंत्रित होकर सड़क से नीचे करीब 200 मीटर गहरी खाई में जा गिरी और कई बार पलटते हुए अलकनंदा नदी में जा समाई। दुर्घटना इतनी भयानक थी कि वाहन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।
चार लोगों की मौत, तीन अब भी लापता
इस हादसे में डॉ. दिनेश कुमार माली, उनकी माता कमला देवी, भांजी अश्लेषा, तथा वाहन चालक की मौत हो गई। रेस्क्यू टीमों ने चारों शव बरामद कर पोस्टमॉर्टम के बाद परिजनों को सौंप दिए। दूसरी ओर डॉ. दिनेश की बहन गुड्डी देवी, उनकी बेटी नम्रता और जान्हवी घटना के बाद से लापता हैं। हादसे के 58 से 60 घंटे बीत जाने के बावजूद उनका कोई पता नहीं चल पाया है।
अलकनंदा में 8 किलोमीटर तक चला सर्च ऑपरेशन
लापता लोगों की तलाश के लिए एसडीआरएफ, पुलिस और फ्लड रेस्क्यू टीमों ने दुर्घटना स्थल से लेकर करीब 8 किलोमीटर तक नदी के बहाव क्षेत्र में सघन तलाशी अभियान चलाया। गोताखोरों और विशेष बचाव दलों को भी लगाया गया। बचाव अधिकारियों के अनुसार नदी का तेज बहाव और गहराई अभियान को चुनौतीपूर्ण बना रहे हैं। अब नदी के गहरे हिस्सों में डीप डाइविंग तकनीक के जरिए खोजबीन की जा रही है। उम्मीद है कि इससे लापता लोगों के संबंध में कोई महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।
ये भी पढ़ें- Rajasthan Rajya Sabha Election: भाजपा ने खेला बड़ा दांव, अलका गुर्जर व सतीश पूनिया को बनाया राज्यसभा उम्मीदवार
नदी से मिली क्षतिग्रस्त इनोवा
रेस्क्यू टीमों को हादसे में दुर्घटनाग्रस्त इनोवा कार भी अलकनंदा नदी से बरामद हो गई है। क्रेन और विशेष उपकरणों की मदद से वाहन को बाहर निकाला गया। अधिकारियों के अनुसार कार पूरी तरह पिचक चुकी थी और उसके अंदर कोई व्यक्ति मौजूद नहीं था। इसके बाद लापता लोगों की तलाश का दायरा और बढ़ा दिया गया है। हादसे में परिवार का एकमात्र जीवित बचा सदस्य 12 वर्षीय आयुष्मान गंभीर रूप से घायल हुआ है। रेस्क्यू टीम ने उसे घटना के तुरंत बाद नदी क्षेत्र से बाहर निकालकर उपचार के लिए पहले श्रीनगर अस्पताल पहुंचाया और बाद में ऋषिकेश एम्स रेफर किया गया।
चिकित्सकों के अनुसार आयुष्मान की दाहिनी जांघ की हड्डी (राइट फीमर) दो स्थानों से टूट गई है। ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञों ने तत्काल उसके पैर में ट्रैक्शन लगाया। फिलहाल वह वेंटिलेटर सपोर्ट पर है, हालांकि डॉक्टर उसकी स्थिति को स्थिर बता रहे हैं।
हरिद्वार में हुआ अंतिम संस्कार
तीन लोगों के अभी भी लापता होने के कारण शवों को जैसलमेर नहीं ले जाया जा सका। ऐसे में डॉ. दिनेश कुमार, उनकी माता कमला देवी, भांजी अश्लेषा और चालक का अंतिम संस्कार हरिद्वार में ही कर दिया गया। शोकाकुल परिवार के सदस्य अब भी उत्तराखंड में हैं और लापता तीनों महिलाओं के बारे में किसी सकारात्मक खबर की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
जैसलमेर में पसरा मातम
दुर्घटना की खबर सामने आने के बाद जैसलमेर शहर, विशेषकर दरियानाथ की बावड़ी क्षेत्र में गहरा शोक व्याप्त है। एक ही परिवार के कई सदस्यों को खोने की इस त्रासदी ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। लोग लगातार लापता महिलाओं की सुरक्षित बरामदगी और घायल आयुष्मान के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना कर रहे हैं। वहीं, प्रशासन और बचाव एजेंसियां दिन-रात खोज अभियान में जुटी हुई हैं। फिलहाल पूरे परिवार और जैसलमेरवासियों की निगाहें अलकनंदा नदी में चल रहे सर्च ऑपरेशन पर टिकी हैं, जहां तीन जिंदगियों की तलाश अभी भी जारी है।
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रेस्क्यू टीमों ने लगातार दूसरे दिन भी अलकनंदा नदी में व्यापक सर्च ऑपरेशन चलाया, लेकिन देर शाम तक लापता तीनों महिलाओं का कोई सुराग नहीं मिल सका। अब एसडीआरएफ और गोताखोरों की विशेष टीमें नदी की गहराई में उतरकर तलाशी अभियान चला रही हैं।
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चारधाम यात्रा के दौरान हुआ दर्दनाक हादसा
जानकारी के अनुसार जैसलमेर शहर के दरियानाथ की बावड़ी क्षेत्र निवासी एम्स में कार्यरत युवा चिकित्सक डॉ. दिनेश कुमार माली अपने परिवार के साथ चारधाम यात्रा और उत्तराखंड भ्रमण पर गए हुए थे। करीब दस दिन पहले परिवार जैसलमेर से उत्तराखंड पहुंचा था।
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26 मई को परिवार हरिद्वार पहुंचा, जहां डॉ. दिनेश ने अपने पिता लूणाराम को पतंजलि आश्रम में पंचकर्म उपचार के लिए ठहराया। इसके बाद वे अपनी मां कमला देवी, बड़ी बहन गुड्डी देवी और उनके चार बच्चों के साथ किराए की इनोवा कार में उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों की यात्रा पर निकल गए। यात्रा पूरी करने के बाद 2 जून को सभी लोग हरिद्वार लौट रहे थे, ताकि लूणाराम को साथ लेकर वापस राजस्थान लौट सकें। लेकिन देवप्रयाग के निकट पहुंचते ही यह यात्रा एक भयावह हादसे में बदल गई।
200 मीटर गहरी खाई में गिरी इनोवा
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार इनोवा कार अचानक अनियंत्रित होकर सड़क से नीचे करीब 200 मीटर गहरी खाई में जा गिरी और कई बार पलटते हुए अलकनंदा नदी में जा समाई। दुर्घटना इतनी भयानक थी कि वाहन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।
चार लोगों की मौत, तीन अब भी लापता
इस हादसे में डॉ. दिनेश कुमार माली, उनकी माता कमला देवी, भांजी अश्लेषा, तथा वाहन चालक की मौत हो गई। रेस्क्यू टीमों ने चारों शव बरामद कर पोस्टमॉर्टम के बाद परिजनों को सौंप दिए। दूसरी ओर डॉ. दिनेश की बहन गुड्डी देवी, उनकी बेटी नम्रता और जान्हवी घटना के बाद से लापता हैं। हादसे के 58 से 60 घंटे बीत जाने के बावजूद उनका कोई पता नहीं चल पाया है।
अलकनंदा में 8 किलोमीटर तक चला सर्च ऑपरेशन
लापता लोगों की तलाश के लिए एसडीआरएफ, पुलिस और फ्लड रेस्क्यू टीमों ने दुर्घटना स्थल से लेकर करीब 8 किलोमीटर तक नदी के बहाव क्षेत्र में सघन तलाशी अभियान चलाया। गोताखोरों और विशेष बचाव दलों को भी लगाया गया। बचाव अधिकारियों के अनुसार नदी का तेज बहाव और गहराई अभियान को चुनौतीपूर्ण बना रहे हैं। अब नदी के गहरे हिस्सों में डीप डाइविंग तकनीक के जरिए खोजबीन की जा रही है। उम्मीद है कि इससे लापता लोगों के संबंध में कोई महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।
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नदी से मिली क्षतिग्रस्त इनोवा
रेस्क्यू टीमों को हादसे में दुर्घटनाग्रस्त इनोवा कार भी अलकनंदा नदी से बरामद हो गई है। क्रेन और विशेष उपकरणों की मदद से वाहन को बाहर निकाला गया। अधिकारियों के अनुसार कार पूरी तरह पिचक चुकी थी और उसके अंदर कोई व्यक्ति मौजूद नहीं था। इसके बाद लापता लोगों की तलाश का दायरा और बढ़ा दिया गया है। हादसे में परिवार का एकमात्र जीवित बचा सदस्य 12 वर्षीय आयुष्मान गंभीर रूप से घायल हुआ है। रेस्क्यू टीम ने उसे घटना के तुरंत बाद नदी क्षेत्र से बाहर निकालकर उपचार के लिए पहले श्रीनगर अस्पताल पहुंचाया और बाद में ऋषिकेश एम्स रेफर किया गया।
चिकित्सकों के अनुसार आयुष्मान की दाहिनी जांघ की हड्डी (राइट फीमर) दो स्थानों से टूट गई है। ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञों ने तत्काल उसके पैर में ट्रैक्शन लगाया। फिलहाल वह वेंटिलेटर सपोर्ट पर है, हालांकि डॉक्टर उसकी स्थिति को स्थिर बता रहे हैं।
हरिद्वार में हुआ अंतिम संस्कार
तीन लोगों के अभी भी लापता होने के कारण शवों को जैसलमेर नहीं ले जाया जा सका। ऐसे में डॉ. दिनेश कुमार, उनकी माता कमला देवी, भांजी अश्लेषा और चालक का अंतिम संस्कार हरिद्वार में ही कर दिया गया। शोकाकुल परिवार के सदस्य अब भी उत्तराखंड में हैं और लापता तीनों महिलाओं के बारे में किसी सकारात्मक खबर की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
जैसलमेर में पसरा मातम
दुर्घटना की खबर सामने आने के बाद जैसलमेर शहर, विशेषकर दरियानाथ की बावड़ी क्षेत्र में गहरा शोक व्याप्त है। एक ही परिवार के कई सदस्यों को खोने की इस त्रासदी ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। लोग लगातार लापता महिलाओं की सुरक्षित बरामदगी और घायल आयुष्मान के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना कर रहे हैं। वहीं, प्रशासन और बचाव एजेंसियां दिन-रात खोज अभियान में जुटी हुई हैं। फिलहाल पूरे परिवार और जैसलमेरवासियों की निगाहें अलकनंदा नदी में चल रहे सर्च ऑपरेशन पर टिकी हैं, जहां तीन जिंदगियों की तलाश अभी भी जारी है।