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Rajasthan: 50 डिग्री सेल्सियस में पापड़ पक जाए, ऐसी गर्मी में सरहद की हिफाजत में जुटी BSF; ऑपरेशन सिंदूर...

Sat, 24 May 2025 10:07 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जैसलमेर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जैसलमेर Published by: हिमांशु प्रियदर्शी Updated Sat, 24 May 2025 10:07 PM IST
सार

Indian Army: राजस्थान की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर तैनात बीएसएफ के जवानों का हौसला देखने लायक है। 50 डिग्री की जानलेवा गर्मी में भी वे पूरी निष्ठा से अपनी चौकियों पर डटे हुए हैं। इस खबर में जानें कि वे कैसे देशवासियों की सुरक्षा में जुटे हुए हैं।

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BSF engaged in protecting border in scorching heat, border security strengthened after Operation Sindoor
भीषण गर्मी में सरहद की हिफाजत में जुटी बीएसएफ - फोटो : AI Image- Grok

विस्तार

राजस्थान की तपती रेत, लू के थपेड़े और 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचता तापमान किसी के भी होश उड़ा सकता है, लेकिन इन सबके बावजूद सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवान भारत-पाक सीमा पर पूरी मुस्तैदी से तैनात हैं। जैसलमेर में हालात किसी भट्टी से कम नहीं हैं, यहां तपती रेत में पापड़ तक मिनटों में पक जाते हैं। ऐसे कठिन मौसम में भी देश की सीमाओं की सुरक्षा में कोई कोताही न हो, इसके लिए बीएसएफ के जवान 24 घंटे, सातों दिन सजग रहते हैं।

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भीषण गर्मी में भी अडिग हैं जवान
राजस्थान की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर तैनात बीएसएफ के जवानों का हौसला देखने लायक है। 50 डिग्री की जानलेवा गर्मी में भी वे पूरी निष्ठा से अपनी चौकियों पर डटे हुए हैं। रेत के समंदर में बसे इस इलाके में दिन के वक्त बाहर निकलना आम लोगों के लिए लगभग नामुमकिन होता है, लेकिन बीएसएफ के जवान पूरे दिन गश्त करते हैं, चौकियों पर निगरानी रखते हैं और हर तरह की चुनौती का सामना करने के लिए तैयार रहते हैं।
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बीएसएफ के एक अधिकारी ने बताया कि हमारा लक्ष्य है कि देशवासी चैन से रहें, सुरक्षित रहें और सतर्क रहें। जब तक हम सीमा पर हैं, देश निश्चिंत रह सकता है।
 
ऑपरेशन सिंदूर से बढ़ा मनोबल
22 अप्रैल को हुई कायराना घटना के बाद बीएसएफ ने ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिया, जिसमें दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब दिया गया। इस ऑपरेशन की सफलता ने जवानों का मनोबल बढ़ा दिया है। अधिकारियों का कहना है कि इस घटना के बाद से लगातार सतर्कता बरती जा रही है, क्योंकि पाकिस्तानी सीमा से कोई भी कायराना हरकत फिर से हो सकती है।
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बीएसएफ अधिकारी ने बताया कि हमारी ट्रेनिंग निरंतर चलती रहती है। हम हर स्थिति के लिए तैयार रहते हैं। सर्विलांस ग्रिड पूरी तरह से सक्रिय है और हमने इसे वायु सेना और सेना के ग्रिड्स के साथ भी इंटीग्रेट कर रखा है। इससे कोई भी हरकत हमारी निगाहों से बच नहीं सकती।
 
दुश्मन की नई रणनीति: ड्रोन हमला
इस बार दुश्मन ने परंपरागत हमलों की जगह ड्रोन के माध्यम से हमले की रणनीति अपनाई। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने एक के बाद एक कई स्पैम ड्रोन भारतीय सीमा में भेजे। इन ड्रोन में चीन और तुर्की की मदद से विकसित तकनीक का इस्तेमाल किया गया था। हालांकि बीएसएफ की तैयारियों ने उन्हें नाकाम कर दिया। जवानों ने स्थानीय संसाधनों का उपयोग करते हुए इम्प्रोवाइज्ड एलएमजी (लाइट मशीन गन) सिस्टम से ड्रोन को मार गिराने की व्यवस्था की। अधिकारी ने बताया कि उनके पास ड्रोन डिटेक्शन के लिए आवश्यक उपकरण मौजूद थे, जिससे समय पर खतरे का पता लगाकर उसे न्यूट्रलाइज किया गया।


 
एलएमजी से निगरानी और रक्षा
सीमा पर एलएमजी की तैनाती खासतौर पर ड्रोन जैसी हवाई गतिविधियों से निपटने के लिए की गई है। बीएसएफ के जवानों ने बताया कि ड्रोन से खतरे को देखते हुए चौकियों पर एलएमजी माउंट की गई हैं, ताकि दुश्मन की किसी भी नापाक कोशिश का तुरंत जवाब दिया जा सके। बीएसएफ अधिकारी ने स्पष्ट किया कि हमारी पहली प्राथमिकता यह है कि सीमा पार से आने वाली किसी भी हरकत को समय पर पहचान कर उसे रोक दिया जाए। एलएमजी जैसे हथियार इस काम में बेहद मददगार हैं।
 
महिला जवानों का भी अहम योगदान
सीमा सुरक्षा बल में तैनात महिला जवान भी पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर अपनी जिम्मेदारियां निभा रही हैं। गर्मी, रेगिस्तान, और सीमावर्ती खतरों के बावजूद महिला जवान पूरी तत्परता के साथ पेट्रोलिंग और निगरानी करती हैं। एक महिला जवान ने बताया कि हम पुरुष साथियों के बराबर ड्यूटी करते हैं। हमें वही आदेश दिए जाते हैं और हम उन्हें उसी समर्पण से निभाते हैं। हमारे लिए कोई भेदभाव नहीं है और हम हर स्थिति से निपटने में सक्षम हैं।


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पाकिस्तान से सटी 1070 किलोमीटर लंबी सीमा
राजस्थान की अंतरराष्ट्रीय सीमा की कुल लंबाई 1070 किलोमीटर है, जो पाकिस्तान के साथ लगती है। इस सीमा पर बीएसएफ की जिम्मेदारी बहुत बड़ी है। यह इलाका रेगिस्तानी है, जहां मौसम की मार के साथ-साथ दुश्मन की चालों का खतरा हमेशा बना रहता है। इसके बावजूद बीएसएफ के जवान अपनी ड्यूटी से एक पल के लिए भी नहीं चूकते। बीएसएफ की गश्त, सर्विलांस, हथियारों की तैनाती और प्रोफेशनल ट्रेनिंग इस इलाके को सुरक्षित बनाए रखती है। किसी भी प्रकार के खतरे से निपटने के लिए जवानों को आधुनिक तकनीक और हथियारों से लैस किया गया है।
 
लगातार सतर्कता और तैयारी
बीएसएफ के अधिकारियों ने बताया कि वे दुश्मन की रणनीति को समझते हैं और उसी अनुसार अपनी तैयारियों को अपग्रेड करते रहते हैं। एयर थ्रेट हो या ग्राउंड मूवमेंट, बीएसएफ का सर्विलांस सिस्टम हर गतिविधि पर नजर रखता है। बीएसएफ अधिकारी ने कहा कि हमारे लिए मौसम, दिन-रात, या परिस्थितियां मायने नहीं रखतीं। हमारी प्राथमिकता सिर्फ एक है—देश की सुरक्षा। चाहे लू चले या बर्फबारी हो, हम हर मौसम में डटे रहते हैं।
 
क्यों कहलाती है बीएसएफ भारत की पहली रक्षा पंक्ति?
बीएसएफ का नाम आते ही देशवासियों के मन में गर्व की भावना जाग जाती है। यह एकमात्र सुरक्षा बल है जो देश की सीमाओं पर 24x7 तैनात रहता है। दुश्मन की किसी भी गतिविधि को नाकाम करने की जिम्मेदारी सबसे पहले इन्हीं के कंधों पर होती है। जैसलमेर की तपती रेत, बाड़मेर की उबड़-खाबड़ जमीन या श्रीगंगानगर की खेती योग्य सीमाएं, हर इलाके में बीएसएफ पूरी तरह सजग है। इनकी मौजूदगी ही दुश्मन को किसी भी दुस्साहस से पहले दस बार सोचने पर मजबूर कर देती है।

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