Rajasthan: उपचुनावों में BJP की रणनीति रही फेल, 10 साल में 16 चुनाव में सिर्फ इतने जीते, क्या कहते हैं आंकड़े
प्रदेश की भजनलाल सरकार के लिए सियासी मोर्चों पर एक के बाद एक चुनौतियां तैयार खड़ी हैं। पिछली गहलोत सरकार के पांच साल के कार्यकाल में ही कुल 8 उपचुनाव हुए और इससे पहले तत्कालीन वसुंधरा सरकार में भी 8 उपचुनाव हुए थे। वहीं मौजूदा भजनलाल सरकार के 8 महीने का कार्यकाल पूरा होते-होते 7 विधानसभा सीटें उपचुनाव के लिए खाली हो गईं।
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प्रदेश की भजनलाल सरकार के गठन को अभी 8 महीने ही हुए हैं, लेकिन इन 8 महीनों में अब तक उन्हें 7 उपचुनावों का सामना करना पड़ रहा है। दौसा, टोंक जिले की देवली-उनियारा, खींवसर, झुंझुनू और बांसवाड़ा की चौरासी विधानसभा सीट शामिल हैं। इन सीटों पर इसी साल के अंत में उपचुनाव होने हैं, लेकिन इनमें अब उदयपुर की सलूम्बर सीट भी जुड़ गई है। यहां गुरुवार को भारतीय जनता पार्टी के विधायक अमृतलाल मीणा का हार्ट अटैक से निधन हो गया था। इनके अलावा लोकसभा चुनावों के दौरान कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हुए बागीदौरा विधानसभा सीट पर लोकसभा के साथ ही उपचुनाव हो चुके हैं। ये सीट कांग्रेस गठबंधन की भारत आदिवासी पार्टी के खाते में जा चुकी है। बीएपी के जयकिशन पटेल यहां से विधायक चुने जा चुके हैं।
पिछली 2 सरकारों में 8-8 उपचुनाव हुए, जिनमें से 12 कांग्रेस ने जीते
पिछली गहलोत सरकार के पांच वर्षों में कुल 8 उपचुनाव हुए थे। बीजेपी की सरकार और संगठन के लिए यह चिंता और चुनौती दोनों हैं, क्योंकि उपचुनावों में बीजेपी का ट्रैक रिकॉर्ड अच्छा नहीं रहा। पिछली गहलोत सरकार और उससे पहले की वसुंधरा सरकार में 8-8 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव हुए थे। इनमें दोनों बार कांग्रेस 6-6 सीटें जीतकर टॉप पर रही थी। इसमें वसुंधरा सरकार के समय तो बीजेपी 163 सीटों के बंपर बहुमत से बनी थी।
लोकसभा चुनाव में हार की गाज संगठन पर
नई भजनलाल सरकार के सत्ता में आने के बाद हुए लोकसभा चुनावों में बीजेपी राजस्थान में 11 सीटें हार चुकी है। हालांकि इसकी गाज संगठन पर डाल दी गई और हाल में तत्कालीन प्रदेशाध्यक्ष सीपी जोशी का इस्तीफा ले लिया गया। नए अध्यक्ष के रूप राज्य सभा सांसद मदन राठौड़ को नियुक्ति दे दी गई।
पिछली सरकार में इन 8 सीटों पर हुए थे चुनाव
पिछली गहलोत सरकार में 8 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव हुए थे। इनमें राजसमंद, सहाड़ा, सूरजगढ़, सरदार शहर, वल्लभनगर, धरियावद, मंडावा और खींवसर शामिल हैं। इनमें से 8 में से 6 विधानसभा सीटों पर कांग्रेस को जीत मिली थी। एक आरएलपी तथा एक सीट बीजेपी के खाते में गई थी।
वसुंधरा सरकार में 8 उपचुनाव, 6 कांग्रेस के खाते में गईं
गहलोत से पहले 2013 से 2018 तक तत्कालीन वसुंधरा राजे की सरकार में भी कुल 8 उपचुनाव हुए थे। इनमें से 6 उपचुनाव कांग्रेस जीती थी, जबकि वसुंधरा राजे की सरकार 200 में से 163 सीटें जीतकर सत्ता में आई थी। इनमें नसीराबाद से सांवर लाल जाट, सूरजगढ़ से संतोष अहलावत, वैर से बहादुर कोहली और कोटा दक्षिण से ओम बिड़ला के लोकसभा चुनाव जीतने के बाद खाली हुई विधानसभा सीटों में से नसीराबाद, सूरजगढ़ और वैर सीट पर कांग्रेस प्रत्याशियों ने जीत ली। सिर्फ कोटा दक्षिण पर बीजेपी को जीत मिली। इसके बाद धौलपुर में उपचुनाव हुए, जिसमें बीजेपी ने बसपा से सीट जीत ली।
2018 में इन सीटों पर हुए थे उपचुनाव
मंडावा- झुंझुनू जिले की मंडावा विधानसभा सीट आम चुनाव में बीजेपी के नरेंद्र कुमार ने जीती थी। इसके बाद नरेंद्र कुमार 2019 में सांसद चुने गए और यह सीट उपचुनाव में भाजपा से कांग्रेस ने छीन ली। उपचुनाव में कांग्रेस की रीटा चौधरी ने भाजपा की सुशीला सींगड़ा को हराया दिया।
खींवसर- नागौर की खींवसर विधानसभा सीट आरएलपी के हनुमान बेनीवाल के सांसद बनने के बाद उपचुनाव के लिए खाली हो गई थी। लेकिन उपचुनावों में भी यह सीट हनुमान के भाई नारायण बेनीवाल ने जीतकर इसे फिर से आरएलपी के खाते में डाल दिया।
राजसमंद- भाजपा की वरिष्ठ नेता किरण माहेश्वरी के निधन के बाद उपचुनावों के लिए खाली हुई राजसमंद सीट पर मार्च 2021 में उपचुनाव हुए। इस उपचुनाव में किरण माहेश्वरी की बेटी दीप्ति माहेश्वरी जीतीं और यह सीट फिर से भाजपा के खाते में गई।
सहाड़ा- कांग्रेस के कैलाश चंद्र त्रिवेदी सहाड़ा के निधन के बाद सहाड़ा सीट पर मार्च 2021 में विधानसभा उपचुनाव हुए। इस उप चुनाव में कांग्रेस ने दिवंगत कैलाश त्रिवेदी की पत्नी गायत्री देवी को चुनाव मैदान में उतारा। गायत्री देवी ने जीत दर्ज की और कांग्रेस की यह सीट बरकरार रही।
सुजानगढ़- कांग्रेस के मंत्री रहे मास्टर भंवरलाल मेघवाल के निधन के बाद सुजानगढ़ सीट पर मार्च 2021 में उपचुनाव हुए। कांग्रेस ने मास्टर भंवरलाल मेघवाल के बेटे मनोज मेघवाल को चुनाव मैदान में उतारा था। मनोज मेघवाल ने जीत हासिल की और कांग्रेस की यह सीट बरकरार रही।
वल्लभनगर- उदयपुर जिले की वल्लभनगर विधानसभा सीट पर कांग्रेस विधायक गजेंद्र सिंह शक्तावत के निधन के बाद अक्टूबर 2021 में उपचुनाव हुए। कांग्रेस ने दिवंगत गजेंद्र सिंह शक्तावत की पत्नी प्रीति शक्तावत को चुनाव मैदान में उतारा। प्रीति ने जीत दर्ज की और वल्लभ नगर की यह सीट कांग्रेस के पास ही रही।
धरियावद- प्रतापगढ़ जिले की धरियावद सीट से भाजपा विधायक गौतम लाल मीणा के निधन के बाद अक्टूबर 2021 में धरियावद में उपचुनाव हुए। उपचुनाव में भाजपा ने दिवंगत विधायक गौतम लाल मीणा के बेटे कन्हैयालाल मीणा को टिकट देने के बजाय खेत सिंह राठौड़ को प्रत्याशी बनाकर चुनाव मैदान में उतारा। उधर कांग्रेस ने पूर्व विधायक नगराज मीणा को चुनाव मैदान में उतारा। नगराज मीणा चुनाव जीत गए और कांग्रेस इस सीट को भाजपा से छीनने में कामयाब हो गई।