Rajasthan: रील और अश्लील कंटेट बच्चों को कर रहे बीमार, कांग्रेस विधायक ने की कानून बनाने की मांग
Rajasthan: प्रदेश में बच्चों में बढ़ती डिजिटल लत को लेकर कांग्रेस विधायक मनीष यादव ने सदन में बच्चों पर रील्स, मोबाइल और अश्लील कंटेंट के बढ़ते प्रभाव को लेकर कानून बनाने की मांग की। विधायक ने 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए डिजिटल विनियमन, पैरेंटल कंट्रोल, रात्रिकालीन ऑटो-लॉक और डिजिटल वेल-बीइंग शिक्षा को अनिवार्य करने की भी सिफारिश की।
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विस्तार
राजस्थान में बच्चों में बढ़ती डिजिटल लत को लेकर अब सख्त कानून बनाने की मांग उठने लगी है। विधायक मनीष यादव ने सदन में मोबाइल फोन पर अवांछित कंटेंट और रील्स की बढ़ती लत पर गंभीर चिंता जताते हुए सरकार से ठोस नीति लाने की मांग की।
मोबाइल की उपयोगिता, लेकिन खतरे भी बढ़े
कांग्रेस विधायक ने कहा कि ऑनलाइन कक्षाओं, अध्ययन सामग्री और तकनीकी ज्ञान के लिए मोबाइल की उपयोगिता से इनकार नहीं किया जा सकता। लेकिन अवांछित सोशल साइट्स, अश्लील और भ्रामक कंटेंट तथा रील्स की लत बच्चों की एकाग्रता, मानसिक स्वास्थ्य, चरित्र निर्माण और शैक्षणिक भविष्य के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल अभिभावकों की चिंता तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज और नीति-निर्माताओं के लिए भी गंभीर विषय बन चुका है।
स्क्रीन टाइम और एल्गोरिदम का जाल
विधायक ने कहा कि अत्यधिक स्क्रीन टाइम, एल्गोरिदम आधारित आकर्षण और अनुपयुक्त सामग्री बच्चों को साइबर बुलिंग, दुरुपयोग और असामाजिक प्रभावों की ओर धकेल रही है। इससे उनके मानसिक और भावनात्मक विकास पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। उन्होंने चिंता जताई कि कई बच्चे आपराधिक और गैंगस्टर प्रवृत्ति के लोगों को फॉलो करने लगते हैं और गलत रास्तों पर बढ़ने लग जाते हैं।
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ऑनलाइन गेमिंग और कर्ज का जाल
विधायक ने कहा कि सोशल मीडिया के जरिए बच्चे ऑनलाइन गेमिंग के शिकार हो जाते हैं। कई मामले ऐसे सामने आए हैं, जहां बच्चे लाखों रुपये के कर्ज में डूब गए। मानसिक तनाव बढ़ने पर कई बार बच्चे आत्महत्या जैसे कदम तक उठा लेते हैं।
दूसरे देशों और राज्यों का उदाहरण
विधायक ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया, चीन और साउथ कोरिया जैसे देशों ने डिजिटल लत पर नीतियां बनाई हैं। भारत में भी कर्नाटक, महाराष्ट्र और आंध्रप्रदेश इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब दूसरे राज्य नीति बना सकते हैं तो हमारा प्रदेश क्यों नहीं? उन्होंने चेतावनी दी कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो बच्चों में शारीरिक और मानसिक विकार बढ़ सकते हैं, उनका करियर प्रभावित हो सकता है और यह समाज व परिवारों के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
16 साल से कम बच्चों के लिए नियम बनाने की मांग
विधायक ने मांग की कि 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए आयु-आधारित डिजिटल विनियमन लागू किया जाए। साथ ही डिफॉल्ट समय-सीमा, रात्रिकालीन ऑटो-लॉक व्यवस्था, सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अनिवार्य पैरेंटल कंट्रोल और सेफ मोड सुनिश्चित किया जाए। अवांछित कंटेंट पर त्वरित नियंत्रण हो, विद्यालयों में डिजिटल वेल-बीइंग को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए और डिजिटल लत पर शोध के साथ विशेष हेल्पलाइन व क्लिनिक स्थापित किए जाएं, ताकि देश के भविष्य को सुरक्षित रखा जा सके।
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प्रभावी कानून लाने की मांग
विधायक ने सरकार से इस गंभीर विषय पर जल्द प्रभावी कानूनी और नीतिगत प्रावधान लाने की मांग की, ताकि राष्ट्र का भविष्य सुरक्षित और सशक्त रह सके।
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