राजस्थान: 51 लाख का बैंक घोटाला उजागर करने वाले मैनेजर को मिली राहत, दो वरिष्ठ अधिकारियों पर केस
राजस्थान हाईकोर्ट ने एसबीआई की भिवाड़ी शाखा में 51 लाख रुपये का फर्जी आवास ऋण उजागर करने वाले पूर्व शाखा प्रबंधक विवेक शर्मा के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश रद्द कर दी। एसीबी ने दो वरिष्ठ अधिकारियों पर रिश्वत मांगने का केस दर्ज किया।
विस्तार
राजस्थान उच्च न्यायालय ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की भिवाड़ी शाखा में हुए 51 लाख रुपये के फर्जी आवास ऋण मामले को उजागर करने वाले शाखा प्रबंधक के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश को रद्द कर दिया है। उच्च न्यायालय ने चार वर्ष पुराने इस मामले में बैंक को स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच करने के निर्देश दिए हैं। अदालत के आदेश के बाद भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने रिश्वत मांगने और आपराधिक षड्यंत्र रचने के आरोप में बैंक के दो वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।
बैंक घोटाला उजागर करने का मामला
जयपुर जिले की भिवाड़ी शाखा में जून 2018 में मुख्य प्रबंधक का पदभार संभालने वाले विवेक शर्मा ने अप्रैल 2019 में वर्ष 2015 का 51 लाख रुपये का फर्जी आवास ऋण मामला पकड़ा था। इस घोटाले में शामिल कर्मचारियों के खिलाफ जब उन्होंने नियमानुसार कार्रवाई शुरू की, तो वरिष्ठ अधिकारी नाराज हो गए। अधिकारियों ने घोटाला उजागर करने वाले विवेक शर्मा को ही निलंबित करवा दिया। इसके साथ ही आरोपी अधिकारियों ने उनके खिलाफ मुकदमा भी दर्ज करवा दिया।
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वेतन जारी करने के बदले रिश्वत की मांग
निलंबन के बाद विवेक शर्मा ने अपने बकाया वेतन तथा भत्तों के भुगतान के लिए प्रयास शुरू किए। आरोप है कि बैंक के अधिकारियों ने बकाया वेतन-भत्ते जारी करने के एवज में 20 लाख रुपये की रिश्वत मांगी। विवेक शर्मा ने जब रिश्वत मांगने वाले अधिकारियों की शिकायत की, तो जांच प्रक्रिया में उनके पक्ष को सुनने के बजाय उल्टे उनके खिलाफ ही दंडात्मक कार्रवाई की सिफारिश कर दी गई। इसके बाद तत्कालीन शाखा प्रबंधक विवेक शर्मा ने निष्पक्ष जांच के लिए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की।
दो वरिष्ठ अधिकारियों पर दर्ज हुआ केस
पूर्व शाखा प्रबंधक की याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को चार वर्ष बाद उनके खिलाफ की गई कार्रवाई की सिफारिश निरस्त कर दी। अदालत ने बैंक को पूरे मामले की स्वतंत्र जांच करने के स्पष्ट निर्देश दिए। उच्च न्यायालय के आदेश पर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो अधिकारियों पर केस दर्ज किया। ब्यूरो ने उदयपुर प्रशासनिक कार्यालय के तत्कालीन उप महाप्रबंधक दिनेश प्रताप तोमर और जयपुर निवासी तत्कालीन मुख्य प्रबंधक अवधेश प्रताप सिंह के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र और रिश्वत मांगने का मामला दर्ज कर लिया है।