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राजस्थान न्यूज: डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर डॉक्टर दंपती से ठगे 76 लाख, पुणे का मुख्य आरोपी गिरफ्तार

Sat, 31 Oct 2026 12:41 PM IST
आशुतोष प्रताप सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: आशुतोष प्रताप सिंह Updated Sat, 31 Oct 2026 12:41 PM IST
सार

जयपुर में बुजुर्ग डॉक्टर दंपती को आतंकवादी गतिविधियों और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में फंसाने की धमकी देकर 76 लाख रुपये की साइबर ठगी करने के मामले में पुलिस ने मुख्य लाभार्थी किरण लक्ष्मण ताम्हाणे को महाराष्ट्र के ठाणे से गिरफ्तार किया है।

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jaipur digital arrest scam doctor couple 76 lakh fraud pune accused arrested
(प्रतीकात्मक फोटो) - फोटो : ANI

विस्तार

जयपुर में बुजुर्ग डॉक्टर दंपती को डिजिटल अरेस्ट करने और आतंकवादी गतिविधियों व मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में फंसाने की धमकी देकर 76 लाख रुपये की साइबर ठगी करने के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। सेंट्रल साइबर पुलिस स्टेशन की टीम ने ठगी के मामले में मुख्य लाभार्थी आरोपी किरण लक्ष्मण ताम्हाणे को महाराष्ट्र के ठाणे से गिरफ्तार किया है। वह पुणे का रहने वाला है। पुलिस आरोपी को ट्रांजिट वारंट पर जयपुर लेकर आई है। इस मामले में अब तक कुल चार आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच में सामने आया कि ठगी की रकम में से 50 लाख रुपये आरोपी की कंपनी के आईसीआईसीआई बैंक खाते में जमा हुए थे।

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व्हाट्सएप कॉल कर खुद को पुलिस और एनआईए अधिकारी बताया

साइबर अपराधियों ने जयपुर निवासी डॉक्टर और उनकी पत्नी से व्हाट्सएप कॉल के जरिए संपर्क किया था। आरोपियों ने अलग-अलग मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल कर खुद को पुलिस, एटीएस और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) का वरिष्ठ अधिकारी बताया। जालसाजों ने दंपती को डराया कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों और करोड़ों रुपये के वित्तीय अपराध में किया गया है। उन्होंने तुरंत गिरफ्तार करने और परिवार के अन्य सदस्यों के खिलाफ भी गंभीर कानूनी कार्रवाई करने की धमकी दी। दंपती पर मानसिक दबाव बनाने के लिए आरोपियों ने व्हाट्सएप पर कथित एनआईए का फर्जी नोटिस भी भेजा। इसके साथ ही कुछ दिनों में एनओसी यानी अनापत्ति प्रमाण पत्र या सुरक्षा प्रमाण पत्र जारी करने का झांसा दिया।

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लगातार वीडियो कॉल कर रखी निगरानी, जीवनभर की बचत ट्रांसफर कराई

ठगों ने व्हाट्सएप पर लगातार वॉइस और वीडियो कॉल के जरिए बुजुर्ग दंपती पर नजर रखी और उन्हें मानसिक दबाव में रखा। इस दौरान आरोपियों ने दंपती से उनकी फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) की जानकारी और संबंधित प्रमाण-पत्रों की तस्वीरें भी मंगवा लीं। आरोपियों के निर्देश पर दंपती ने अपनी जीवनभर की बचत भुनाई और अलग-अलग बैंक खातों में कुल 76 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। इस तरह जालसाजों ने डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर दंपती को ठगी का शिकार बनाया।

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बैंक खातों की जांच में सामने आया रकम ट्रांसफर करने का तरीका

मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने आरोपियों के संदिग्ध मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर), सीएएफ आईडी, आईपीडीआर और संबंधित बैंक खातों का विश्लेषण किया। बैंक स्टेटमेंट की जांच में पता चला कि ठगी की रकम खाते में जमा होने के उसी दिन आरटीजीएस के जरिए दूसरे बैंक खाते में भेज दी गई थी। इसके अगले दिन रकम एक अन्य खाते में ट्रांसफर कर दी गई। इस तरह पुलिस ने बैंकिंग लेन-देन की कड़ियों को जोड़कर रकम प्राप्त करने वाले लोगों की पहचान की।

दिल्ली और यूपी से पहले पकड़े गए तीन आरोपी

तकनीकी साक्ष्यों और बैंक खातों में हुए लेन-देन के आधार पर पुलिस ने सबसे पहले दिल्ली और उत्तर प्रदेश से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इसके बाद जांच टीम ठगी की रकम प्राप्त करने वाले पहले मुख्य लाभार्थी किरण लक्ष्मण ताम्हाणे तक पहुंची। उसे महाराष्ट्र के ठाणे से गिरफ्तार किया गया।


पुलिस आरोपी को ट्रांजिट वारंट पर जयपुर लेकर आई है। इस गिरफ्तारी के साथ ही मामले में पकड़े गए आरोपियों की संख्या चार हो गई है।

कंपनी के बैंक खाते और नेट बैंकिंग की जानकारी साझा की थी

पुलिस पूछताछ में आरोपी किरण लक्ष्मण ताम्हाणे ने स्वीकार किया कि उसकी कंपनी के.टी. मल्टी सर्विस प्राइवेट लिमिटेड के बैंक खाते का इस्तेमाल साइबर ठगी में हुआ था। ठगी की कुल रकम में से 50 लाख रुपये इसी कंपनी के आईसीआईसीआई बैंक खाते में जमा हुए थे। आरोपी के अनुसार, उसने रियल एस्टेट में निवेश और मुनाफे पर कमीशन मिलने के आश्वासन पर जिगना प्रथमेश सावंत और अनुराग माहेश्वरी के साथ अपने बैंक खाते की जानकारी साझा की थी। उसने उन्हें नेट बैंकिंग की आईडी और पासवर्ड, चेकबुक और सिम कार्ड भी दे दिए थे। पुलिस अब इस मामले में बैंक खातों के जरिए रकम के लेन-देन और साइबर ठगी में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।

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