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मौसम विभाग ने दिया बारिश का अलर्ट; प्रकृति ने दिया विदाई संदेश-कांस के फूल बात रहे मौसम बदलने वाला है

Thu, 10 Sep 2026 06:41 AM IST
Sourabh Bhatt न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: Sourabh Bhatt Updated Thu, 10 Sep 2026 06:41 AM IST
सार

राजस्थान में मौसम विभाग ने भले ही 11 सितंबर से बारिश का अलर्ट जारी किया है, लेकिन प्रकर्ति ने मानसून की विदाई का संदेश दे दिया है। जयपुर के कूकस में कांस के सफेद फूल शरद ऋतु के आगमन का प्राकृतिक संकेत दे रहे हैं।

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Rajasthan Rain Alert, But Kans Flowers Signal Monsoon’s Farewell
कूकस रोड पर खिले कांस के फूल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 राजस्थान में मौसम विभाग ने एक बार फिर बारिश की संभावना जताई है। 11 सितंबर से बारिश का दौर शुरू होने के आसार हैं, जबकि 12 और 13 सितंबर को भरतपुर, जयपुर, अजमेर, कोटा और उदयपुर संभाग के कई इलाकों में बारिश हो सकती है। 11 सितंबर को पांच जिलों में तेज बारिश का यलो अलर्ट भी जारी किया गया है।

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लेकिन इसी बीच प्रकृति का मिजाज कुछ और कहानी कह रहा है। जयपुर-कूकस रोड के आसपास पहाड़ियों के बीच खिले कांस के सफेद फूल मानसून की विदाई और शरद ऋतु के आगमन का संकेत दे रहे हैं। हरी पहाड़ियों के बीच दूर तक फैले कांस के फूल इन दिनों ऐसा नजारा बना रहे हैं, मानो प्रकृति खुद बता रही हो कि बारिश का मौसम अब अपने अंतिम दौर में पहुंच चुका है।

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मौसम विभाग का अलर्ट, प्रकृति का अलग संकेत

मौसम विभाग के मुताबिक फिलहाल मानसून ट्रफ अपनी सामान्य स्थिति से उत्तर की ओर खिसकी हुई है। इसी वजह से राजस्थान में पिछले कुछ दिनों से बारिश की गतिविधियां कमजोर हुई हैं। बुधवार को प्रदेश के ज्यादातर शहरों में सुबह से शाम तक धूप रही। दिन में हल्की गर्मी रही, जबकि सुबह-शाम हवा चलने से मौसम सुहावना रहा।

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अब बंगाल की खाड़ी में बन रहा नया लो-प्रेशर सिस्टम उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ने की संभावना है। इसके प्रभाव से मध्य भारत में भारी बारिश हो सकती है, जबकि राजस्थान में इसका असर अपेक्षाकृत हल्का रहने और कुछ इलाकों में बारिश होने के आसार हैं।  यानी मौसम विभाग कह रहा है कि मानसून अभी एक बार फिर सक्रिय हो सकता है, लेकिन प्रकृति मानसून के अंतिम पड़ाव का संकेत दे रही है।


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11 सितंबर से फिर बारिश, 12-13 को कई संभागों में असर

मौसम विभाग के अनुसार 11 सितंबर से राजस्थान में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। शुक्रवार को पांच जिलों में तेज बारिश का यलो अलर्ट है। इसके बाद 12 और 13 सितंबर को भरतपुर, जयपुर, अजमेर, कोटा और उदयपुर संभाग के कई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। हालांकि बारिश का यह दौर प्रदेश के सभी हिस्सों में एक जैसा नहीं रहेगा। पिछले कुछ दिनों की तरह पश्चिमी राजस्थान में मौसम अपेक्षाकृत शुष्क रहने की संभावना है।

धूप के साथ बढ़ा तापमान, गंगानगर 39.4 डिग्री

बुधवार को बारिश नहीं होने और धूप निकलने से तापमान में बढ़ोतरी हुई। श्रीगंगानगर में अधिकतम तापमान 39.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। प्रदेश के 10 से ज्यादा शहरों में दिन का तापमान 35 डिग्री से ऊपर रहा। जयपुर में अधिकतम तापमान 35 डिग्री रहा। कोटा में 34.4, अजमेर में 33.6 और अलवर में करीब 35-36 डिग्री तापमान दर्ज हुआ।

कांस के फूल क्यों दे रहे हैं विदाई का संकेत?

मानसून के अंतिम दौर में जब कांस के सफेद फूल खिलने लगते हैं तो भारतीय लोक परंपरा में इसे वर्षा ऋतु की विदाई और शरद ऋतु के आगमन से जोड़कर देखा जाता है। जयपुर-कूकस रोड के आसपास इन दिनों पहाड़ियों की हरियाली के बीच दूर तक खिले कांस के फूल इसी बदलाव का प्राकृतिक दृश्य पेश कर रहे हैं। सफेद फूलों से ढकी जमीन और पीछे हरी पहाड़ियां मौसम के बदलते मिजाज की खूबसूरत तस्वीर बना रही हैं।

गोस्वामी तुलसीदास ने भी रामचरितमानस में कांस के फूलों के जरिए वर्षा ऋतु के बीतने का संकेत दिया है-

“फूले कास सकल मही छाई, जनु बरसा कृत प्रकट बुढ़ाई।”

अर्थात कांस के फूलों से पूरी धरती ढक गई है, मानो वर्षा ऋतु बूढ़ी होकर अपनी विदाई का संकेत दे रही हो।

मौसम की भविष्यवाणी और प्रकृति का संकेत साथ-साथ

राजस्थान में इस समय मौसम की तस्वीर दिलचस्प है। एक तरफ मौसम विभाग 11 से 13 सितंबर के बीच बारिश की वापसी की संभावना बता रहा है, दूसरी तरफ खेत-खलिहानों और पहाड़ियों में खिलता कांस मानसून के बूढ़े होने का संकेत दे रहा है। इसका मतलब यह नहीं कि कांस के फूल खिलने के साथ बारिश तुरंत खत्म हो जाती है। वैज्ञानिक मौसम पूर्वानुमान ही बारिश की वास्तविक स्थिति बताता है। लेकिन प्राकृतिक चक्र में कांस का खिलना मानसून से शरद ऋतु की ओर बढ़ते मौसम का एक पारंपरिक संकेत जरूर माना जाता है।




जहां आमतौर पर झुंड छोटे होते हैं, वहां सफेद मैदान

राज्य सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के उप निदेशक कमलेश शर्मा ने अपने कैमरे में कांस के फूलों की तस्वीर कैद की। उन्होंने बताया कि कांस की खासियत यह है कि यह सामान्यतः किसी खेत की तरह व्यवस्थित तरीके से नहीं उगता। खाली पड़ी जमीन, सड़क किनारे की जगह, नदी-नालों के आसपास या नम मिट्टी वाले खुले क्षेत्रों में यह स्वतः उगने वाला घास कुल का पौधा है। सामान्य परिस्थितियों में इसके पौधे छोटे-छोटे समूहों में दिखाई देते हैं।

कांस असल में क्या है?

कांस का वैज्ञानिक नाम Saccharum spontaneum है। अंग्रेजी में इसे Wild Sugarcane यानी जंगली गन्ना कहा जाता है। यह Poaceae (घास कुल) का पौधा है और गन्ने की ही वंशावली से संबंधित है।
 

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