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Rajasthan News:विधानसभा सत्र से पहले सवालों पर उलझी सियासत; नियम प्रक्रिया में बदलाव पर कांग्रेस भड़की

Sat, 17 Jan 2026 11:35 AM IST
सौरभ भट्ट न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: सौरभ भट्ट Updated Sat, 17 Jan 2026 11:35 AM IST
सार

राजस्थान में विधानसभा सत्र शुरू होने से पहले ही विवादों की एंट्री हो गई है। सत्र के दौरान पूछे जाने वाले सवालों को लेकर नई गाइडलाइन पर कांग्रेस भड़क गई है। इस पर आपत्ति जताते हुए  नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने विधानसभा सचिवालय को पत्र लिखा है।  टीकाराम जूली ने नियमों में बदलाव को लोकतंत्र पर हमला बताया।

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Rajasthan News: Rajasthan Assembly Question Rules Trigger Opposition Row
कांग्रेस - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इसी महीने की 28 तारीख को राजस्थान  विधानसभा का बजट सत्र आहूत होने जा रहा है। लेकिन विधानसभा में विधायकों की एंट्री से पहले ही विवादों ने प्रवेश कर लिया है। विवाद सत्र के दौरान पूछे जाने वाले सवालों और प्रक्रियाओं को लेकर खड़ा हो रहा है। विधानसभा सचिवालय ने की ओर से सत्र के दौरान सवाल पूछे जाने को लेकर कुछ प्रक्रियागत बदलाव किए गए हैं। इस पर कांग्रेस बुरी तरह से भड़क गई है।

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 विधानसभा सचिवालय की ओर से विधायकों को सूचित किया गया है कि सत्र के दौरान पूछे जाने वाले सवालों में 5 साल से अधिक पुराने नहीं हों तथा यह प्रयास रहे कि विधायक जो सवाल पूछे वह उसी के क्षेत्र से संबंधित हो।  राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने विधानसभा सचिवालय द्वारा 7 और 9 जनवरी को जारी बुलेटिन में प्रक्रिया नियमों की गलत व्याख्या कर विपक्षी सदस्यों के सवाल पूछने के अधिकारों पर पाबंदियां लगाए जाने को लोकतंत्र का अपमान बताया। जूली ने इसे सरकार द्वारा विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश करार दिया।
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जूली ने इस मामले को लेकर विधान सभा अध्यक्ष को इस पत्र लिखकर गहरी आपत्ति जताई है। उन्होंने पत्र में माननीय अध्यक्ष महोदय का ध्यान आकर्षित करते हुए लिखा कि जहां तक पांच साल से पुराने मामले से सम्बन्धित प्रश्न नहीं पूछे जाने का विषय है, तो यदि किसी मामले में सरकार द्वारा कार्रवाई नहीं की गई है, तो सदस्य कितना भी पुराना मामला हो उस सम्बन्ध में प्रश्न पूछ सकता है। विभागों की योजनाएं, नियम और अन्य जानकारियां ऑन लाईन उपलब्ध हैं, क्या उसकी जानकारी नहीं मांगी जाए।

ये भी पढ़ें:राजस्थान विधानसभा का बजट सत्र 28 जनवरी से, फरवरी के दूसरे सप्ताह में आ सकता है बजट

जूली ने कहा कि  योजना जनहित में है या नहीं, इस सम्बन्ध में सरकार से सदस्य को किसी भी योजना नियम आदि की जानकारी प्राप्त करने का अधिकार है, इसे करटेल नहीं किया जा सकता । 
उन्होंने कहा कि इसी बुलेटिन के बिन्दु संख्या-4 के में कहा गया है कि  ‘‘प्रश्न में जहां तक सम्भव हो माननीय सदस्यों द्वारा प्रदेश के किसी भी विशेष स्थान, विधान सभा क्षेत्र, तहसील आदि तक की ही सूचना मांगी जावे, पूरे जिला, प्रदेश की नहीं।’’  उन्होंने लिखा कि जब कोई व्यक्ति विधान सभा का सदस्य निर्वाचित हो जाता है, तो वह सम्पूर्ण प्रदेश के किसी भी जिले, तहसील और गांव से सम्बन्धित प्रश्न पूछ सकता है। यह अधिकार उसको प्रक्रिया नियमों द्वारा प्रदान किये गए हैं। 


जूली ने अपने पत्र में राजस्थान विधान सभा के तृतीय सत्र में प्रश्न शाखा द्वारा जारी बुलेटिन भाग-2 संख्याः 04, दिनांक 13 जनवरी, 2025 की प्रति संलग्न करते हुए लिखा कि इस बुलेटिन में राजस्थान विधान सभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन सम्बन्धी नियमों के नियम-37 (2) के तहत माननीय सदस्यों द्वारा प्रस्तुत किये जाने वाले प्रश्नों की ग्राह्यता विनिश्चित करने हेतु 25 शर्तों का निर्धारण किया गया है।

उक्त बुलेटिन में उल्लिखित नियम-37 (2) के बिन्दु संख्या 1 से 25 तक के किसी भी बिन्दु में ऐसी पाबंदियों का उल्लेख नहीं किया हुआ है, फिर किन नियमों के तहत सदस्यों द्वारा ऐसे सवाल पूछे जाने पर पाबंदी लगाई जा रही है? जब कोई व्यक्ति राजस्थान विधान सभा के सदस्य के रूप में निर्वाचित होता है, तो उसका यह अधिकार है कि वह सम्पूर्ण राजस्थान के किसी भी हिस्से की समस्या के सम्बन्ध में प्रश्न पूछ सकता है।

वहीं शून्यकाल और ध्यानाकर्षण प्रस्तावों पर भी पाबंदी लगाने की बात जूली ने गंभीर आरोप माना। उन्होंने कहा कि यदि सरकार तात्कालिक मुद्दों पर उत्तर ही नहीं देती, तो विधानसभा में विपक्ष के सवालों का कोई औचित्य नहीं रह जाता। जूली ने इसे राजस्थान में लोकतंत्र पर राजतंत्र जैसा प्रहार करार दिया और कहा कि विपक्ष और जनता की आवाज को दबाने का यह एक नया तरीका है।

 

 

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