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Rajasthan News: राइट टू हेल्थ कानून पर मंत्री के जवाब को लेकर गहलोत का तीखा वार, सरकार पर साधा निशाना

Thu, 12 Feb 2026 01:41 PM IST
प्रिया वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: प्रिया वर्मा Updated Thu, 12 Feb 2026 01:41 PM IST
सार

‘राइट टू हेल्थ एक्ट’ को लेकर विधानसभा में हुई बहस के बीच पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने स्वास्थ्य मंत्री के बयान को निंदनीय बताते हुए आरोप लगाया कि सरकार कानून के नियम बनाने में विफल रही है और अब जनता के स्वास्थ्य अधिकारों से पीछे हट रही है।
 

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Rajasthan News: Gehlot launches sharp attack over minister’s reply on Right to Health law, targets government
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

विधानसभा में आज प्रश्नकाल के दौरान स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के एक जवाब को लेकर जोरदार हंगामा हुआ। मामला ‘राइट टू हेल्थ एक्ट’ के तहत नियम बनाए जाने से संबंधित था। प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस विधायक हरिमोहन शर्मा ने कहा कि राइट टू हेल्थ एक्ट को 12 अप्रैल 2023 को अधिसूचित किया गया था लेकिन अब तक इसके नियम नहीं बनाए गए हैं। उन्होंने पूछा कि दो साल बीत जाने के बावजूद नियम क्यों नहीं बनाए गए।

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इस पर जवाब देते हुए स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने कहा कि यह कानून तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक उद्देश्य से और लोक लुभावन कदम के रूप में लाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि विधेयक अचानक पेश किया गया और हितधारकों की राय शामिल नहीं की गई।
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मंत्री ने कहा कि वर्तमान भाजपा सरकार एमएए योजना लागू कर रही है, जिसके तहत विभिन्न स्वास्थ्य सुविधाएं दी जा रही हैं। उन्होंने कहा कि एमएए योजना व्यापक है और राइट टू हेल्थ एक्ट की जरूरत नहीं है। साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि पिछली कांग्रेस सरकार ने अपने कार्यकाल में इस कानून के नियम क्यों नहीं बनाए।

ये भी पढ़ें: Rajasthan Budget 2026: बजट पर आज से सदन में होगी बहस शुरू; क्या देवस्थान की जमीन निजी हाथों में देगी सरकार?

नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि सरकार स्पष्ट करे कि वह नियम बनाने का इरादा रखती है या नहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार राजस्थान की जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रही है।

मंत्री के जवाब से नाराज कांग्रेस विधायकों ने सदन के वेल में आकर हंगामा किया। स्पीकर वासुदेव देवनानी ने सदस्यों से अपनी-अपनी सीटों पर लौटने की अपील की और चेतावनी दी कि व्यवस्था कायम नहीं रही तो सदन स्थगित कर दिया जाएगा। थोड़ी देर के व्यवधान के बाद विपक्षी सदस्य अपनी सीटों पर लौट आए। हालांकि मंत्री के बयान के विरोध में कांग्रेस विधायकों ने बाद में सदन से वॉकआउट कर दिया।


गहलोत ने भी की कड़ी आलोचना

गहलोत ने एक्स पर जारी अपने बयान में कहा कि विधानसभा में स्वास्थ्य मंत्री का यह कहना कि राइट टू हेल्थ की आवश्यकता नहीं है, निंदनीय है और यह महंगे इलाज के बोझ से दबे गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है।

https://twitter.com/ashokgehlot51/status/2021824967956959457

उन्होंने कहा कि चिरंजीवी योजना और निरोगी राजस्थान योजना जैसी सार्वभौमिक स्वास्थ्य योजनाएं लागू करने के बावजूद तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने राइट टू हेल्थ की परिकल्पना इसलिए की थी ताकि आपातकालीन स्थिति में किसी भी मरीज को किसी भी कारण से इलाज से वंचित न रहना पड़े।

गहलोत ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने कानून के तहत नियम बनाने में विफलता दिखाई है और अब बहाने बना रही है। उनका कहना था कि कांग्रेस सरकार महंगे इलाज से लोगों को राहत देने के लिए राइट टू हेल्थ लागू करना चाहती थी, जबकि भाजपा सरकार मेडिकल लॉबी के सामने झुकते हुए इस कानून को ही अनावश्यक बता रही है।

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