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राजस्थान: गैर आरएएस से आईएएस पदोन्नति पर हाईकोर्ट का बड़ा निर्देश, सरकार को 15 दिन में फैसला लेने का आदेश

Tue, 03 Nov 2026 11:30 AM IST
आशुतोष प्रताप सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: आशुतोष प्रताप सिंह Updated Tue, 03 Nov 2026 11:30 AM IST
सार

गैर आरएएस अधिकारियों को आईएएस पद पर पदोन्नति देने के मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को 15 दिनों के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति अनूप ढंढ की अदालत ने सुरेश कुमार वर्मा, श्यामसुंदर ज्यानी, कार्तिकेय मिश्रा और नर्बदा इंदौरिया की याचिका का निस्तारण करते हुए यह आदेश दिया।

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rajasthan high court non ras to ias promotion state government decision 15 days
राजस्थान हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गैर आरएएस अधिकारियों को आईएएस पद पर पदोन्नति देने से जुड़े मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को 15 दिनों के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति अनूप ढंढ की अदालत ने सुरेश कुमार वर्मा, श्यामसुंदर ज्यानी, कार्तिकेय मिश्रा और नर्बदा इंदौरिया की ओर से दायर याचिका का निस्तारण करते हुए यह आदेश दिया। अदालत ने सरकार से कहा कि आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने की तारीख से 15 दिनों के भीतर इस मामले में कारणयुक्त आदेश पारित किया जाए। हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उसने सरकार को किसी खास पक्ष में फैसला देने के लिए बाध्य नहीं किया है। राज्य सरकार कानून के प्रावधानों के अनुसार निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र होगी।

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चार रिक्तियों के लिए शुरू हुई थी पदोन्नति प्रक्रिया

याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता राजीव सोगरवाल ने अदालत में मामले का पूरा विवरण पेश किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 की चार रिक्तियों के विरुद्ध वर्ष 2025 में गैर आरएएस अधिकारियों को आईएएस पद पर पदोन्नति देने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। इसके तहत विभिन्न सेवाओं के 20 अधिकारियों को संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के बोर्ड के सामने साक्षात्कार के लिए बुलाया गया था। पिछले साल दिसंबर में हुए साक्षात्कार के बाद आयोग ने 20 अधिकारियों में से चार का चयन किया। इसके बाद चयनित अधिकारियों के नाम राज्य सरकार को उसकी टिप्पणियों के लिए भेजे गए थे। लेकिन राज्य सरकार की ओर से इस प्रक्रिया में आगे की कार्रवाई नहीं की गई।

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45 दिन में टिप्पणी भेजने का है प्रावधान

याचिकाकर्ताओं के अनुसार, अखिल भारतीय सेवा नियमावली, 1997 के नियम छह के तहत राज्य सरकार को अपनी टिप्पणियां 45 दिनों के भीतर संघ लोक सेवा आयोग को भेजनी थीं। इसके बावजूद कई महीने बीत जाने पर भी सरकार की ओर से इस मामले में निर्णय नहीं लिया गया।

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याचिका में आरोप लगाया गया कि राज्य सरकार पिछले करीब 10 महीनों से संबंधित फाइल रोके हुए है। चयन प्रक्रिया पूरी होने और चार अधिकारियों के नाम तय होने के बावजूद सरकार की ओर से टिप्पणियां नहीं भेजे जाने के कारण उनकी पदोन्नति की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। इसी देरी को लेकर अधिकारियों ने हाईकोर्ट का रुख किया था।

सरकार कानून के मुताबिक निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र

मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को 15 दिनों के भीतर निर्णय लेने की समय सीमा तय की। अदालत ने स्पष्ट किया कि उसका आदेश सरकार को किसी विशेष तरीके से फैसला लेने के लिए बाध्य नहीं करता। सरकार संबंधित नियमों और कानून के प्रावधानों के अनुसार अपना निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र है। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से मामले में जल्द निर्णय कराने का अनुरोध किया था। इस पर कोर्ट ने समय सीमा निर्धारित करते हुए याचिका का निस्तारण कर दिया। अब राज्य सरकार को आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के 15 दिनों के भीतर इस मामले में कारणयुक्त आदेश पारित करना होगा।

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