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Rajasthan: शौर्य दिवस का शोर निकला फेक! राजस्थान शिक्षा विभाग ने समाचार को बताया भ्रामक

Sun, 30 Nov 2025 11:44 AM IST
आशुतोष प्रताप सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: आशुतोष प्रताप सिंह Updated Sun, 30 Nov 2025 11:44 AM IST
सार

राजस्थान के शिक्षा विभाग में शनिवार देर रात बाबरी विध्वंस दिवस यानी 6 दिसंबर को “शौर्य दिवस” मनाने का आदेश जारी किया गया, लेकिन रविवार सुबह 9:15 बजे इसे अचानक स्थगित कर दिया गया।

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rajasthan education department shaurya diwas order issued and suddenly postponed babri demolition day
शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजस्थान शिक्षा विभाग में शनिवार देर रात से लेकर रविवार सुबह तक अचानक प्रशासनिक हलचल देखने को मिली। बाबरी विध्वंस दिवस यानी 6 दिसंबर को “शौर्य दिवस” मनाए जाने से जुड़े आदेश पर विभाग ने अब स्पष्ट किया है कि इस संबंध में न तो माध्यमिक शिक्षा निदेशालय और न ही शिक्षा विभाग द्वारा कोई निर्णय लिया गया है। विभाग ने इसे भ्रामक और पूरी तरह निराधार बताया है।

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माध्यमिक शिक्षा निदेशक, बीकानेर कार्यालय की ओर से जारी आधिकारिक प्रेस नोट में कहा गया कि राजस्थान पत्रिका में 30.11.2025 को प्रकाशित समाचार, जिसमें दावा किया गया था कि प्रदेश के स्कूलों में 6 दिसंबर को शौर्य दिवस मनाया जाएगा, पूरी तरह गलत है। प्रेस नोट में कहा गया कि अधोहस्ताक्षरकर्ता द्वारा ऐसा कोई आदेश जारी करने का दावा भी असत्य है। निदेशक सीताराम जाट (IAS) ने यह भी बताया कि इस संबंध में पहले वायरल हुए एक पत्र का खंडन 05.11.2025 को (राजकाज-18665233) के माध्यम से किया जा चुका है।

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इस बीच, शनिवार रात 9:37 बजे एक आदेश जारी किया गया था, जिसमें सभी सरकारी और निजी विद्यालयों को 6 दिसंबर को “शौर्य दिवस” मनाने का निर्देश दिया गया था। बताया गया कि यह आदेश शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर के निर्देश पर जारी हुआ था। आदेश में विद्यालयों में राम मंदिर आंदोलन और भगवान राम पर भाषण, निबंध प्रतियोगिताएं, चित्रकला और पोस्टर निर्माण, देशभक्ति गीत, लोकनृत्य, पौराणिक घटनाओं पर लघु नाटिका, राम मंदिर आंदोलन से जुड़ी प्रदर्शनी, शौर्य यात्रा या जागरूकता मार्च, भगवान राम की आरती एवं विशेष प्रार्थना सभा, सूर्य नमस्कार और योगाभ्यास जैसी गतिविधियों के आयोजन का सुझाव दिया गया था। आदेश में इन गतिविधियों को विद्यार्थियों में देशभक्ति, वीरता, सांस्कृतिक गौरव और राष्ट्रीय एकता की भावना को बढ़ाने वाला बताया गया था।

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हालांकि रविवार सुबह 9:15 बजे विभागीय व्हाट्सऐप ग्रुपों से रात में भेजे गए सभी संदेश अचानक हटा दिए गए और नया संदेश भेजकर यह जानकारी दी गई कि आदेश को स्थगित माना जाए। विभाग ने यह भी निर्देश दिया कि इस आदेश से संबंधित कोई भी समाचार प्रकाशित न किया जाए। साथ ही बताया गया कि आदेश “निजी कारणों” से स्थगित किया गया है। इस अचानक बदलाव से शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया और राजनीतिक व प्रशासनिक स्तर पर आपत्तियों को आदेश वापस लेने का कारण बताया जा रहा है।

अब तक शिक्षा विभाग की ओर से पूरे मामले पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। सूत्रों का कहना है कि आदेश पर “ऊपरी स्तर से” आपत्ति जताए जाने के बाद इसे तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया। वहीं जयपुर से मिली जानकारी के अनुसार, राज्य के सभी विद्यालयों में 5–6 दिसंबर तक परीक्षाएँ संचालित हो रही हैं और परीक्षा अवधि के कारण किसी भी अन्य आयोजन की संभावना नहीं है। माना जा रहा है कि यही कार्यक्रम स्थगित किए जाने का एक प्रमुख कारण है।

पूरे घटनाक्रम को विभागीय गलियारों में एक बड़े प्रशासनिक उलटफेर के रूप में देखा जा रहा है। रात में आदेश जारी होने, फिर सुबह स्थगित किए जाने और बाद में मीडिया रिपोर्ट को निराधार बताने से पूरा मामला और भी चर्चित हो गया है।

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