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Rajasthan News: पांचना बांध विवाद पर कांग्रेस में अलग सुर, पायलट ने कहा- संवाद जरूरी, रामकेश ने सरकार को घेरा

Fri, 19 Jun 2026 08:14 PM IST
जयपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: जयपुर ब्यूरो Updated Fri, 19 Jun 2026 08:14 PM IST
सार

पांचना बांध से पानी छोड़े जाने की मांग को लेकर किसानों का आंदोलन जारी है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सचिन पायलट और उपनेता प्रतिपक्ष रामकेश मीणा के अलग-अलग रुख ने इस मुद्दे को राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

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Rajasthan News: Congress divided on Panchna Dam row; Pilot seeks dialogue, Ramkesh presses for action
कांग्रेस महासचिव सचिन पायलट

विस्तार

पांचना बांध से पानी छोड़े जाने के मुद्दे पर कांग्रेस के भीतर अलग-अलग स्वर सुनाई दे रहे हैं। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने राज्य सरकार से सभी पक्षों को विश्वास में लेकर बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है, जबकि कांग्रेस के उपनेता प्रतिपक्ष एवं टोडाभीम विधायक रामकेश मीणा कमांड क्षेत्र के किसानों के साथ धरने पर बैठकर हाईकोर्ट के आदेश की तत्काल पालना की मांग कर रहे हैं।

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सचिन पायलट ने कहा कि पांचना बांध विवाद लंबे समय से चला आ रहा है और इससे जुड़े विभिन्न पक्षों की अपनी-अपनी चिंताएं तथा मांगें हैं। नदी किनारे बसे 360 गांवों के किसानों का भी अपना पक्ष है। ऐसे में सरकार की जिम्मेदारी है कि वह सभी हितधारकों से संवाद स्थापित कर सहमति का रास्ता निकाले। उन्होंने कहा कि पानी सभी की आवश्यकता है और किसी भी परिस्थिति में सामाजिक तनाव या आपसी भाईचारे में खटास नहीं आनी चाहिए। पायलट ने न्यायपालिका के आदेशों का सम्मान करते हुए बातचीत और सहमति के आधार पर समाधान खोजने पर जोर दिया।
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वहीं दूसरी ओर ग्राम खंडीप में 5 जून से चल रहा किसानों का धरना शुक्रवार को 15वें दिन भी जारी रहा। कमांड क्षेत्र के किसान राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार पांचना बांध से नहरों में पानी छोड़े जाने की मांग कर रहे हैं। धरना स्थल पर बड़ी संख्या में किसान, महिलाएं और युवा पहुंचकर आंदोलन को समर्थन दे रहे हैं।
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धरना स्थल से विधायक रामकेश मीणा ने राज्य सरकार पर किसानों की अनदेखी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि किसान किसी प्रकार की आर्थिक सहायता नहीं मांग रहे, बल्कि अपने हिस्से का पानी मांग रहे हैं। उनके अनुसार यह न्याय और अन्याय की लड़ाई है तथा किसान केवल न्यायालय के आदेश की पालना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि देवलेन मोड़ पर आयोजित महापंचायत में 360 गांवों के किसानों की मांग सामने आई थी। कमांड क्षेत्र के किसानों को अन्य क्षेत्रों को पानी दिए जाने पर कोई आपत्ति नहीं है लेकिन उनके हिस्से का पानी भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए।


धरने को समर्थन देने पूर्व मंत्री गोलमा देवी भी खंडीप पहुंचीं। उन्होंने कहा कि जब तक नहरों में पानी नहीं छोड़ा जाता, तब तक संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने किसानों से लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन जारी रखने का आह्वान किया।

राजनीतिक दृष्टि से देखा जाए तो दोनों नेताओं की मांगों में मूलभूत विरोधाभास कम और प्राथमिकताओं का अंतर अधिक दिखाई देता है। सचिन पायलट जहां सभी प्रभावित पक्षों के बीच संतुलन बनाकर स्थायी समाधान की बात कर रहे हैं, वहीं रामकेश मीणा हाईकोर्ट के आदेश के तत्काल क्रियान्वयन और कमांड क्षेत्र के किसानों के अधिकारों पर जोर दे रहे हैं। दोनों ही नेता न्यायालय के निर्णय का सम्मान करने की बा त कह रहे हैं लेकिन समाधान के तरीके और प्राथमिकता को लेकर उनके दृष्टिकोण अलग नजर आ रहे हैं।अब निगाहें राज्य सरकार पर टिकी हैं कि वह संवाद, न्यायिक आदेश और किसानों की अपेक्षाओं के बीच संतुलन बनाते हुए इस संवेदनशील जल विवाद का समाधान कैसे निकालती है।

 

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