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Rajasthan: निजी प्रैक्टिस रोकने के आदेश पर बवाल; SMS से जुड़े अधीक्षकों ने प्रिंसिपल को सौंपे सामूहिक इस्तीफे

Mon, 17 Nov 2025 04:48 PM IST
जयपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: जयपुर ब्यूरो Updated Mon, 17 Nov 2025 04:48 PM IST
सार

Jaipur News: एसएमएस मेडिकल कॉलेज से जुड़े कई अस्पतालों के अधीक्षकों ने निजी प्रैक्टिस पर रोक और उम्र सीमा के आदेशों के खिलाफ सामूहिक इस्तीफे सौंप दिए। डॉक्टरों ने इसे एकतरफा निर्णय बताया। मंत्री खींवसर ने 18 नवंबर को सचिव संग बैठक बुलाकर समाधान का आश्वासन दिया।

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Mass Resignations by SMS Hospital Superintendents Over Ban on Private Practice
SMS से जुड़े अधीक्षकों ने प्रिंसिपल को सौंपे सामूहिक इस्तीफे - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजस्थान में मेडिकल कॉलेजों के प्रिंसिपल और हॉस्पिटलों के अधीक्षकों पर निजी प्रैक्टिस बंद करने के आदेशों का विरोध तेजी से बढ़ गया है। सोमवार को सवाई मानसिंह (SMS) मेडिकल कॉलेज से अटैच विभिन्न अस्पतालों के अधीक्षक सामूहिक तौर पर इस्तीफा लेकर प्रिंसिपल डॉ. दीपक माहेश्वरी के चैंबर पहुंचे। सभी डॉक्टरों ने यहां आदेशों को एकतरफा करार देते हुए लिखित रूप में अपना विरोध दर्ज कराया और इस्तीफे तथा ज्ञापन प्रिंसिपल को सौंपे।

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इस्तीफा सौंपने वालों में जे. के. लोन हॉस्पिटल के आर. एम. सेहरा, सांगानेरी गेट महिला चिकित्सालय की अधीक्षक डॉ. आशा वर्मा, सैटेलाइट हॉस्पिटल सेठी कॉलोनी के डॉ. गोर्वधन मीणा, गणगौरी हॉस्पिटल के डॉ. लिनेश्वर हर्षवर्धन सहित कई अन्य अधीक्षक शामिल रहे। सभी डॉक्टर इसके बाद सामूहिक रूप से स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर के आवास पहुंचे और उन्हें भी इस निर्णय के खिलाफ विस्तार से अपनी आपत्तियां सौंपी।
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डॉक्टरों ने कहा कि बिना किसी चर्चा और विचार-विमर्श के निजी प्रैक्टिस पर रोक लगाने के साथ उनकी हॉस्पिटल वर्किंग को 25 फीसदी तक सीमित करना अनुचित है। अधीक्षकों ने सरकार द्वारा नियुक्ति के लिए अधिकतम आयु 57 वर्ष तय करने को भी गलत बताया। उनका कहना है कि जब सरकार खुद 62 वर्ष तक प्रिंसिपल और अधीक्षक पद पर बने रहने की अनुमति देती है, तो 58 और 59 साल के वरिष्ठ डॉक्टरों को आवेदन से बाहर करने का कोई औचित्य नहीं रह जाता।
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डॉक्टरों ने आरोप लगाया कि इस निर्णय में कई तकनीकी अनियमितताएं हैं और यह क्लिनिकल चिकित्सकों को हाशिए पर धकेलने जैसा है। इससे पहले 11 नवंबर को राजस्थान मेडिकल कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन (RMCTA) भी इन आदेशों का विरोध जता चुका है। संगठन ने अधिकतम आयु सीमा को नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के नियमों के खिलाफ बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की थी।

स्वास्थ्य मंत्री खींवसर ने डॉक्टरों की आपत्तियां सुनने के बाद आश्वासन दिया कि मामले का समाधान जल्द निकाला जाएगा। उन्होंने इस संबंध में 18 नवंबर को मेडिकल एजुकेशन सचिव के साथ बैठक बुलाने के निर्देश दिए हैं। अब सभी की निगाहें इस बैठक पर टिकी हैं कि सरकार आदेशों पर पुनर्विचार करती है या नहीं।

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