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जयपुर के गढ़े खजानों की रहस्यमयी कहानियां: हवेलियों से जयगढ़ तक... कहीं मिली दौलत तो कहीं रहस्य बन गए तहखाने

Tue, 21 Jul 2026 04:16 PM IST
Sourabh Bhatt न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: Sourabh Bhatt Updated Tue, 21 Jul 2026 04:16 PM IST
सार

जयपुर के त्रिपोलिया बाजार स्थित एक पुश्तैनी हवेली में खुदाई के दौरान करोड़ों रुपये के कथित खजाने के मिलने और उसके गायब होने के आरोपों ने शहर में गड़े खजानों की पुरानी कहानियों को फिर चर्चा में ला दिया है। हवेली मालिक की शिकायत के बाद एफआईआर दर्ज की गई है।

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Jaipur's Buried Treasure Legends Return to Spotlight After Haveli Treasure Claim
जयपुर की हवेलियों में गड़े खजानों के रहस्य फिर सुर्खियों में आ गए - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजधानी जयपुर में त्रिपोलिया बाजार स्थित एक पुश्तैनी हवेली में खुदाई के दौरान करोड़ों रुपये के कथित खजाने के मिलने और उसके गायब होने के आरोपों ने शहर में एक बार फिर गड़े खजानों की पुरानी कहानियों को जीवंत कर दिया है। सदियों पुराने किले, हवेलियां और ऐतिहासिक स्थल लंबे समय से गुप्त तहखानों, सोने-चांदी के भंडार और रहस्यमयी खजानों की लोककथाओं का हिस्सा रहे हैं। हालांकि इनमें से अधिकांश दावों की कभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी, लेकिन त्रिपोलिया की ताजा घटना ने इन रहस्यमयी किस्सों को फिर चर्चा के केंद्र में ला खड़ा किया है।
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त्रिपोलिया की हवेली से फिर उठी खजाने की चर्चा

माणक चौक थाना क्षेत्र स्थित एक पुश्तैनी हवेली के मालिक ने आरोप लगाया है कि निर्माण कार्य के दौरान करीब 40-45 किलो चांदी की सिल्लियां, सोने के सिक्कों से भरे कलश और हजारों पुराने चांदी के सिक्के मिले थे। आरोप है कि ठेकेदार और उसके साथियों ने यह कथित खजाना गायब कर दिया। मामले में एफआईआर दर्ज हो गई हैं। 
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पुलिस के अनुसार, इस मामले में राहुल सेठी के परिवार ने 15 जून को एफआईआर दर्ज कराई थी। परिवार मूल रूप से आदर्श नगर का निवासी है। उनकी एक पुश्तैनी हवेली काफी जर्जर हो चुकी थी, जिसके चलते उन्हें नगर पालिका की ओर से नोटिस भी जारी किया गया था। इसके बाद उन्होंने हवेली को गिराने का ठेका दिया। पुलिस के मुताबिक, तोड़फोड़ की पूरी प्रक्रिया का वीडियो बनाया गया था, लेकिन कथित खजाना मिलने का कोई वीडियो या अन्य प्रत्यक्ष सबूत अब तक सामने नहीं आया है पुलिस ने बताया कि खजाना मिलने की लगातार चर्चाओं के बाद परिवार ने एफआईआर दर्ज कराई। प्रारंभिक जानकारी में यह भी सामने आया है कि मौके से एक तिजोरी मिली थी, लेकिन उसमें क्या और कितना सामान था, इसकी अभी पुष्टि नहीं हुई है। पूरे मामले की जांच जारी है।
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इसी बीच जयपुर की करीब 250 साल पुरानी 'बंबई वालों की हवेली' में भी दीवार तोड़ने के दौरान दो तिजोरियां मिलने का दावा सामने आया है। परिवार का आरोप है कि एक छोटी तिजोरी ठेकेदार चोरी-छिपे ले गया, जबकि पुलिस का कहना है कि उसे ऐसी किसी तिजोरी की जानकारी नहीं है।

जयगढ़ का खजाना आज भी सबसे बड़ा रहस्य

जयपुर के खजानों की चर्चा होते ही सबसे पहले जयगढ़ किले का नाम सामने आता है। वर्षों से यह कहानी प्रचलित है कि आमेर के राजा मानसिंह ने युद्धों से अर्जित अपार संपत्ति जयगढ़ किले के गुप्त तहखानों में छिपाई थी।  वर्ष 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के निर्देश पर सेना और आयकर विभाग ने यहां महीनों तक खुदाई और तलाशी अभियान चलाया था। आधिकारिक तौर पर कुछ भी नहीं मिला, लेकिन जयगढ़ के खजाने की कहानी आज भी जयपुर की सबसे चर्चित ऐतिहासिक रहस्यों में गिनी जाती है। इतिहासकार यह भी बताते हैं कि जयपुर के मौतीडूंगरी गढ़ में भी इसी तरह खजाना मिलने की चर्चा रही है।
 

Jaipur's Buried Treasure Legends Return to Spotlight After Haveli Treasure Claim
जयपुर के गड़े खजानों का रहस्य फिर जिंदा - फोटो : अमर उजाला
कई हवेलियां भी रही हैं खजाने की तलाश का केंद्र

इतिहासकार एवं वरिष्ठ पत्रकार जितेंद्र सिंह शेखावत के अनुसार, जयपुर की कई पुरानी हवेलियों में वर्षों से खजाना मिलने की लोककथाएं प्रचलित हैं। उनके मुताबिक, जगन्नाथ जी की हवेली, सम्राट जी की हवेली, पांड्रिक जी की हवेली और ताड़केश्वर मंदिर के पीछे स्थित हवेली के आंगनों में भी कभी खजाने की तलाश में खुदाई की गई थी। हालांकि इन घटनाओं का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है, लेकिन स्थानीय स्तर पर यह माना जाता है कि इन स्थानों से कभी मूल्यवान वस्तुएं निकली थीं, जो बाद में बिखर गईं या गायब हो गईं।

ये भी पढ़ें- Rajasthan: हवेली में दफन खजाना मिलने का दावा, मालिक ने ठेकेदार पर सोने-चांदी की संपत्ति हड़पने का केस कराया

आमागढ़ से नाहरगढ़ तक खजाने की तलाश की कहानियां


जितेंद्र सिंह शेखावत के अनुसार, आमागढ़ क्षेत्र में भी वर्षों पहले खजाने की तलाश में आंगनों की खुदाई की गई थी। करीब दस वर्ष पहले एक साधु द्वारा यहां कथित रूप से खजाना निकालने का प्रयास भी चर्चा में रहा था। इसी तरह खो नागौरियान के ऐतिहासिक किले को भी लोगों ने खजाने की उम्मीद में क्षतिग्रस्त कर दिया। गलता जी के ऊपर स्थित रघुनाथगढ़ से भी समय-समय पर खजाना मिलने की चर्चाएं सामने आती रही हैं, लेकिन इसका कोई प्रमाण कभी नहीं मिला। वहीं, नाहरगढ़ किले के आथूनी कुंड स्थित बुर्ज में भी कथित खजाने की तलाश में अवैध खुदाई किए जाने की बातें स्थानीय लोग बताते हैं।

फागी में अफवाह ने मचा दी थी हलचल

जयपुर जिले के फागी क्षेत्र के चौरू गांव में कुछ वर्ष पहले पुराने सिक्के मिलने की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में लोग रातों-रात फावड़े और कुदाल लेकर खेतों और खाली जमीनों में खजाना खोजने निकल पड़े थे। बाद में यह मामला महज अफवाह साबित हुआ, लेकिन इस घटना ने यह जरूर दिखाया कि गड़े खजानों को लेकर लोगों में आज भी कितनी उत्सुकता और रोमांच है।

कानून क्या कहता है?

विशेषज्ञों के अनुसार यदि कहीं गड़ा हुआ खजाना मिलता है तो उस पर किसी व्यक्ति का स्वतः स्वामित्व नहीं माना जाता। इंडियन ट्रेजर ट्रोव एक्ट, 1878 तथा राजस्थान में लागू संबंधित नियमों के तहत ऐसे मामलों की सूचना प्रशासन को देना अनिवार्य है। जांच के बाद कानून के अनुसार यह तय किया जाता है कि उस खजाने पर राज्य सरकार का अधिकार होगा या नहीं।
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