जयपुर में बच्चे की रोबोटिक सर्जरी से सफल इलाज: एक किडनी में थीं दो मूत्र नलिकाएं, जन्मजात विकार से मिली राहत
जयपुर के संतोकबा दुर्लभजी मेमोरियल हॉस्पिटल में डॉक्टरों की विशेषज्ञ टीम ने चार वर्षीय बच्चे के डुप्लेक्स यूरेटर का रोबोटिक सर्जरी से सफल उपचार किया। बच्चे की एक किडनी में जन्म से ही दो मूत्र नलिकाएं थीं।
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जयपुर के संतोकबा दुर्लभजी मेमोरियल हॉस्पिटल में डॉक्टरों की विशेषज्ञ टीम ने रोबोटिक तकनीक की सहायता से चार वर्षीय बच्चे का इलाज कर उसे जन्मजात किडनी विकार से राहत प्रदान की है। बच्चे को जन्म से ही किडनी से जुड़ी जटिल परेशानी थी, जिसका अब रोबोटिक प्रक्रिया के जरिए सफल समाधान किया गया है।
क्या बोले डॉक्टर?
हॉस्पिटल की मुख्य पीडियाट्रिक सर्जन डॉ. सुनीता ओझा ने जानकारी दी कि चार वर्षीय मासूम बच्चे में एक किडनी के भीतर दो मूत्र नलिकाएं मौजूद थीं। चिकित्सा विज्ञान की भाषा में इस विशिष्ट स्थिति को ‘डुप्लेक्स यूरेटर’ कहा जाता है। एनेस्थेटिस्ट डॉ. आशीष शाह और पीडियाट्रिक सर्जन डॉ. सुनीता ओझा ने अत्याधुनिक रोबोटिक तकनीक का प्रयोग करते हुए इस ‘डुप्लेक्स यूरेटर’ की समस्या का पूर्ण रूप से उपचार किया है।
इस जटिल रोबोटिक सर्जरी के सफल होने से चार वर्षीय मासूम को जन्मजात किडनी विकार से राहत मिली है।
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जन्मजात किडनी विकार का सफल उपचार
एक ही किडनी में दो मूत्र नलिकाएं यानी ‘डुप्लेक्स यूरेटर’ होना एक जन्मजात किडनी विकार है। पीडियाट्रिक सर्जन डॉ. सुनीता ओझा ने एनेस्थेटिस्ट डॉ. आशीष शाह के सहयोग से इस विकार को ठीक करने के लिए आधुनिक रोबोटिक शल्य प्रक्रिया को अपनाया। मासूम बच्चे की इस जटिल रोबोटिक सर्जरी को सुरक्षित और प्रभावी ढंग से अंजाम दिया गया है। इस सफल चिकित्सीय प्रक्रिया के बाद मासूम बच्चे की स्वास्थ्य स्थिति में सुधार हुआ है तथा जन्मजात किडनी विकार का निवारण हो गया है।