राजस्थान: जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल जनवरी 2027 में पूरे करेगा 20 साल, 14 जनवरी से होगा 20वें संस्करण का आगाज
जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल जनवरी 2027 में अपने सफर के 20 साल पूरे करेगा। इसका 20वां संस्करण 14 से 18 जनवरी 2027 तक जयपुर में आयोजित होगा, जिसकी थीम 'विचारों, कहानियों और संवाद के 20 साल' रखी गई है।
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दुनिया के प्रमुख साहित्यिक और सांस्कृतिक आयोजनों में अपनी पहचान बना चुका जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (JLF) जनवरी 2027 में अपने सफर के 20 साल पूरे करने जा रहा है। फेस्टिवल का 20वां संस्करण 14 से 18 जनवरी 2027 तक जयपुर में आयोजित किया जाएगा। दो दशक पूरे होने के मौके पर होने वाले इस विशेष आयोजन की थीम 'विचारों, कहानियों और संवाद के 20 साल' रखी गई है। वर्ष 2008 में एक शहर स्तरीय आयोजन के रूप में शुरू हुआ यह फेस्टिवल अब दुनियाभर में साहित्यिक संवाद और विचारों के आदान-प्रदान के लिए अपनी अलग पहचान बना चुका है।
दो दशक में 8 हजार से अधिक लेखकों और कलाकारों की मेजबानी
जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल ने अपने दो दशक लंबे सफर में 8 हजार से अधिक लेखकों, वक्ताओं और कलाकारों की मेजबानी की है। इस दौरान 50 लाख से अधिक दर्शक सीधे तौर पर फेस्टिवल से जुड़े हैं। वहीं, डिजिटल प्लेटफॉर्म, प्रसारण और मीडिया नेटवर्क के जरिए इसकी पहुंच एक अरब से अधिक लोगों तक बनी है। वर्ष 2008 में एक शहर स्तरीय साहित्यिक आयोजन से शुरू हुआ यह मंच अब वैश्विक पहचान हासिल कर चुका है। फेस्टिवल ने साहित्य और नए विचारों को केवल किताबों और साहित्यिक जगत तक सीमित रखने के बजाय उन्हें आम लोगों की बातचीत और सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
22 आधिकारिक भारतीय भाषाओं में एक साथ हुई घोषणा
फेस्टिवल के 20वें संस्करण की घोषणा भारत की सभी 22 आधिकारिक भाषाओं में एक साथ जारी की गई है। आयोजकों की यह पहल फेस्टिवल की बहुभाषी और समावेशी साहित्यिक संस्कृति के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है। क्षेत्रीय साहित्य को व्यापक पाठकों तक पहुंचाने के लिए फेस्टिवल में अलग-अलग भारतीय भाषाओं के रचनाकारों को मंच दिया जाता रहा है। इसके अलावा अनुवाद सत्रों और बहुभाषी कार्यक्रमों के जरिए विभिन्न भाषाओं और साहित्यिक परंपराओं के बीच संवाद को बढ़ावा दिया जाता है।
विदेशों में भी पहुंचा जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल
जयपुर से शुरू हुआ यह साहित्यिक मंच अब भारत की सीमाओं से बाहर भी अपनी पहचान बना चुका है। अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, स्पेन, ऑस्ट्रेलिया, मध्य पूर्व, मालदीव और आयरलैंड सहित अलग-अलग देशों में फेस्टिवल के 15 से अधिक संस्करण आयोजित किए जा चुके हैं। फेस्टिवल की संवाद और विचारों को खुलकर साझा करने की संस्कृति से प्रेरित होकर दुनियाभर में 300 से अधिक साहित्यिक आयोजन भी शुरू हुए हैं। इस तरह जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल ने वैश्विक साहित्यिक आयोजनों के क्षेत्र में अपनी एक अलग छाप छोड़ी है।
साहित्य से आगे इतिहास, राजनीति और विज्ञान पर भी चर्चा
जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल सिर्फ किताबों और लेखकों तक सीमित नहीं रहा है। यहां इतिहास, राजनीति, विज्ञान, अर्थशास्त्र, दर्शन, कला, लैंगिक अध्ययन, स्वास्थ्य, प्रवासन और पर्यावरण जैसे गंभीर और समकालीन विषयों पर भी गहन चर्चा होती रही है। पिछले दो दशकों में नोबेल और बुकर पुरस्कार विजेताओं के साथ-साथ विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षों, अर्थशास्त्रियों, दार्शनिकों, कलाकारों और दुनिया के शीर्ष विचारकों ने भी फेस्टिवल में हिस्सा लिया है। इससे यह आयोजन साहित्य के साथ-साथ व्यापक सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक विमर्श का महत्वपूर्ण मंच बन गया है।
राजस्थान सरकार के सहयोग से मिली वैश्विक पहचान
जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल की सफलता और विस्तार में राजस्थान सरकार के निरंतर सहयोग की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इस आयोजन ने जयपुर को अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक मानचित्र पर स्थापित करने में योगदान दिया है और शहर को दुनिया भर के लेखकों, कलाकारों और विचारकों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में पहचान दिलाई है।
अब 20 साल पूरे करने के बाद जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल अपने तीसरे दशक में प्रवेश करने जा रहा है। आने वाले वर्षों में इसका लक्ष्य नए पाठकों और दर्शकों तक पहुंच बढ़ाना तथा साहित्य, विचारों और सार्वजनिक विमर्श के लिए एक स्वतंत्र, समावेशी और वैश्विक मंच के रूप में अपनी भूमिका को और मजबूत करना है।