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Jaipur: देवी-देवताओं के समय से चली आ रही है समलैंगिकता, किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर का बड़ा बयान

Thu, 13 Feb 2025 12:20 PM IST
प्रिया वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: प्रिया वर्मा Updated Thu, 13 Feb 2025 12:20 PM IST
सार

समाज में किन्नरों की उपस्थिति को लेकर किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर साध्वी ईश्वरी नंद गिरी ने कहा कि किन्नरों का आशीर्वाद तो सब लेना चाहते हैं लेकिन पीठ पीछे उनकी बुराई करते हैं।

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Jaipur: Homosexuality Has Existed Since the Era of Deities, Says Mahamandaleshwar of Kinnar Akhara
राजस्थान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर साध्वी ईश्वरी नंद गिरी ने अमर उजाला के साथ विशेष बातचीत में समाज में किन्नरों की स्थिति, समलैंगिकता और प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ को लेकर अपनी बेबाक राय रखी। उन्होंने कहा कि जीवन सिर्फ भोग-विलास के लिए नहीं, बल्कि सेवा और सनातन धर्म के प्रचार के लिए है।

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साध्वी ने कहा कि समाज में किन्नरों की स्थिति आज भी उपेक्षित है। लोग उनका आशीर्वाद तो लेना चाहते हैं, लेकिन पीठ पीछे उनकी बुराई करते हैं। उन्होंने बताया कि अपने जीवन में उन्होंने कई संघर्षों का सामना किया है और किन्नर समाज की तकलीफों को नजदीक से देखा है।
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समलैंगिकता पर बात करते हुए साध्वी ने कहा कि यह कोई नई चीज नहीं है। यह तो देवी-देवताओं के समय से चली आ रही परंपरा है। उन्होंने इसे प्राकृतिक भावना बताते हुए कहा कि यह सिर्फ मनुष्यों में ही नहीं, बल्कि जानवरों में भी पाई जाती है। साध्वी ने इसे मां के वात्सल्य भाव से जोड़ा और कहा कि यह कोई अपराध नहीं है।


महाकुंभ पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह सनातन धर्म का सबसे बड़ा आयोजन है, जो आध्यात्मिक शक्ति को जागृत करता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे केवल बाहरी आडंबर में न उलझें, बल्कि धर्म और सेवा को आत्मसात करें।

साध्वी ईश्वरी नंद गिरी ने कहा कि किन्नर अखाड़ा केवल एक धार्मिक संस्था नहीं, बल्कि सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार का एक माध्यम है। समाज में किन्नरों को उचित सम्मान और अधिकार मिलने चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज को समय के साथ अपनी सोच में बदलाव लाने की जरूरत है।

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