जयपुर : हवा में घुला प्रदूषण, सीतापुरा में एक्यूआई 273; अगले 72 घंटे में सुधार की उम्मीद
दीपावली के बाद जयपुर की हवा में प्रदूषण का स्तर बढ़ा हुआ है। सीतापुरा में AQI 273, मानसरोवर में 237 और शास्त्री नगर में 217 दर्ज किया गया। पीएम 2.5 और पीएम 10 प्रमुख प्रदूषक हैं। IITM के पूर्वानुमान के अनुसार अगले 72 घंटे में हवा की गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद है।
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गुलाबी सर्दी के बीच दीपावली के बाद जयपुर की हवा में प्रदूषण का स्तर बढ़ा हुआ है। शहर के अलग-अलग इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) मध्यम से खराब श्रेणी में दर्ज किया जा रहा है। भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) पुणे के एयर क्वालिटी अर्ली वार्निंग सिस्टम के आंकड़ों के अनुसार, रीको सीतापुरा में एक्यूआई 273 तक पहुंच गया है। वहीं, मानसरोवर और शास्त्री नगर में भी हवा की गुणवत्ता खराब श्रेणी में है। हालांकि, आदर्श नगर में एक्यूआई 78 दर्ज किया गया, जो संतोषजनक श्रेणी में आता है।
दीपावली के बाद पटाखों से निकले धुएं और हवा में मौजूद धूल के कणों के कारण प्रदूषण का स्तर बढ़ा है। इस समय पीएम 2.5 और पीएम 10 प्रमुख प्रदूषक बने हुए हैं। तापमान में गिरावट और हवा की कम रफ्तार के कारण प्रदूषक कण वातावरण में ज्यादा देर तक बने रह सकते हैं। ऐसे में शहर के कई इलाकों में लोगों को प्रदूषित हवा में सांस लेनी पड़ रही है।
सीतापुरा में सबसे ज्यादा प्रदूषण, आदर्श नगर में हवा बेहतर
IITM के मॉनिटरिंग सिस्टम पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जयपुर के अलग-अलग क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता का स्तर अलग-अलग है। रीको सीतापुरा में एक्यूआई 273 दर्ज किया गया, जो खराब श्रेणी में है। मानसरोवर सेक्टर-12 में 237 और शास्त्री नगर में 217 एक्यूआई रहा। इन दोनों क्षेत्रों में भी हवा की गुणवत्ता खराब श्रेणी में दर्ज की गई।
दूसरी ओर पुलिस कमिश्नरेट (एमआई रोड) क्षेत्र में एक्यूआई 174 और मुरलीपुरा सेक्टर-2 में 145 दर्ज किया गया। ये दोनों क्षेत्र मध्यम श्रेणी में हैं। वहीं आदर्श नगर में एक्यूआई 78 रहा, जो संतोषजनक श्रेणी में आता है। आंकड़ों से साफ है कि शहर के औद्योगिक और व्यस्त इलाकों में प्रदूषण का स्तर अपेक्षाकृत ज्यादा है।
पीएम 2.5 और पीएम 10 बने प्रदूषण की बड़ी वजह
जयपुर की हवा में इस समय पार्टिकुलेट मैटर यानी पीएम 2.5 और पीएम 10 प्रमुख प्रदूषक हैं। दीपावली पर आतिशबाजी के कारण हवा में सूक्ष्म कणों की मात्रा बढ़ जाती है। इसके अलावा वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण कार्यों की धूल और सड़क की धूल भी प्रदूषण में योगदान करते हैं।
सर्दी की शुरुआत के साथ तापमान में गिरावट और हवा की धीमी गति से प्रदूषक कणों का फैलाव प्रभावित होता है। हवा की रफ्तार कम रहने पर ये कण वातावरण में जमा रहते हैं और वायु गुणवत्ता पर असर डालते हैं।
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अगले 72 घंटे में हवा में सुधार की संभावना
IITM के एयर क्वालिटी अर्ली वार्निंग सिस्टम के पूर्वानुमान के अनुसार, जयपुर में अगले 72 घंटे के दौरान वायु गुणवत्ता में कुछ सुधार हो सकता है। सीतापुरा जैसे प्रदूषण प्रभावित क्षेत्र में भी एक्यूआई घटकर करीब 176 तक आने का अनुमान है। इससे हवा की गुणवत्ता खराब श्रेणी से मध्यम श्रेणी की ओर आ सकती है। हालांकि, प्रदूषण से पूरी राहत मिलने की संभावना फिलहाल नहीं है।
बच्चों और बुजुर्गों को सावधानी बरतने की जरूरत
खराब वायु गुणवत्ता का असर बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी बीमारियों से जूझ रहे लोगों पर ज्यादा पड़ सकता है। जिन इलाकों में एक्यूआई 200 से ऊपर है, वहां सुबह और शाम की बाहरी गतिविधियों में सावधानी बरतने की जरूरत है। ऐसे लोगों को खुले में लंबे समय तक रहने और भारी व्यायाम से बचना चाहिए।