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High Court: मेयर मुनेश की बर्खास्तगी की कार्रवाई पेंडिंग; राज्य सरकार को जवाब के लिए 21 अगस्त तक दिया समय

Mon, 14 Aug 2023 09:49 PM IST
अर्पित याज्ञनिक न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: अर्पित याज्ञनिक Updated Mon, 14 Aug 2023 09:49 PM IST
सार

जयपुर हेरिटेज नगर निगम की निलंबित मेयर मुनेश गुर्जर की याचिका पर हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद बर्खास्तगी की कार्रवाई को पेंडिंग कर दिया है। राज्य सरकार को जवाब के लिए 21 अगस्त तक दिया समय गया है।

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High Court pending the action of dismissal of suspended Mayor Munesh Gurjar
मेयर मुनेश गुर्जर और पति सुशील गुर्जर। - फोटो : Amar Ujala Digital

विस्तार

जयपुर हेरिटेज नगर निगम जयपुर की निलंबित मेयर मुनेश गुर्जर की याचिका पर राजस्थान हाईकोर्ट में सोमवार को सुनवाई हुई। स्वायत शासन विभाग ने मामले में जवाब पेश करने के लिए समय मांगा तो कोर्ट ने 21 अगस्त को मामले की अगली सुनवाई रखी है।

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जयपुर हेरिटेज नगर निगम की निलंबित मेयर मुनेश गुर्जर ने स्वायत शासन विभाग की ओर से उन्हें सस्पेंड करने के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। मुनेश गुर्जर ने याचिका में कहा है कि निलंबन से पहले उनकी सुनवाई नहीं की गई और एसीबी की एफआईआर में उनका नाम शामिल नहीं है। स्वायत शासन विभाग ने हाईकोर्ट में पहले से केविएट लगा दी थी। इस कारण हाईकोर्ट ने सरकार के पक्ष को सुनना ज़रूरी समझा। सरकार की ओर से याचिका में उठाए गए सवालों का जवाब देने के लिए समय मांगा गया, तो कोर्ट ने करीब एक सप्ताह बाद 21 अगस्त तक का समय देकर जवाब पेश करने को कहा है। 
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स्वायत शासन निदेशालय ने निलंबित की गईं मेयर मुनेश गुर्जर को नोटिस भी जारी किया हुआ है और उन्हें पूरी स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। माना जा रहा है कि सरकार उन्हें बर्खास्त करने की कार्रवाई करने जा रही है। नई मेयर लगाने के लिए इंटरव्यू भी मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास के बंगले पर दो दिन पहले लिए गए थे।
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पांच अगस्त को निलंबित की गई थी मेयर
मेयर के पति सुशील गुर्जर के भ्रष्टाचार मामले में आरोपी पाए जाने और एसीबी की ओर से गिरफ्तारी होने पर पांच अगस्त को स्वायत्त शासन निदेशालाय ने मेयर मुनेश गुर्जर को निलंबित कर दिया था। जयपुर में ज़मीन और मकानों के पट्टे देने के नाम पर मेयर के पति सुशील गुर्जर पर दो दलालों के माध्यम से दो लाख रुपये से ज़्यादा की रिश्वत लेने के आरोप हैं, जबकि सुशील गुर्जर के घर से भी 40 लाख रुपये से ज़्यादा कैश बरामद हुए थे। जिसे उन्होंने एक प्लाट बेचने पर आई रकम बताया था, लेकिन इतनी बड़ी रकम का कैश में क्यों भुगतान हुआ, यह भी सवाल है। नियमों के मुताबिक मकान या प्लाट के खरीद और बेचान पर एक निश्चित राशि से ज्यादा कैश का लेनदेन नहीं किया जा सकता है। 


रिश्वत के मामले में मेयर की भूमिका संदिग्ध 
स्वायत्त शासन निदेशालय ने रिश्वत के इस मामले में मेयर की भूमिका को संदिग्ध माना था, क्योंकि मेयर भी उसी घर में ही अपने पति के साथ रहती हैं और पट्टे देने के लिए सौदा करने की पावर उनके पति के पास कैसे आई? ये बड़े सवाल हैं। अब तक जारी हुई पट्टों की भी जांच की जा रही है। मेयर यदि पद पर बरकरार रहेंगी, तो जांच कार्रवाई में हस्तक्षेप होने या जांच प्रभावित होने की आशंका है। इसीलिए उन्हें निलंबित किया गया है। साथ ही दोष साबित होने पर बर्खास्तगी के लिए भी प्रोसीजर अपनाया जा रहा है।

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