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'सचिन पायलट को कभी आगे नहीं बढ़ने देंगे गहलोत': विवाद में भाजपा की एंट्री; मदन राठौड़ के बयान से गरमाई सियासत
Sun, 07 Jun 2026 08:14 PM IST
हिमांशु सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: हिमांशु सिंह
Updated Sun, 07 Jun 2026 08:14 PM IST
सार
राजस्थान भाजपा अध्यक्ष मदन राठौड़ ने अशोक गहलोत पर सचिन पायलट को राजनीतिक रूप से कमजोर करने का आरोप लगाया। गहलोत के हालिया बयान के बाद उन्होंने कहा कि कांग्रेस में पायलट को कभी पूरी तरह स्थापित नहीं होने दिया जाएगा।
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राजस्थान में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष के बयान के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है।
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर अशोक गहलोत और सचिन पायलट के रिश्तों को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर निशाना साधते हुए कहा कि वह कभी भी सचिन पायलट को कांग्रेस में पूरी तरह स्थापित नहीं होने देंगे।
दरअसल, रविवार को अशोक गहलोत ने सितंबर 2022 के राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि उस समय कांग्रेस में जो घटनाएं हुई थीं, वह पार्टी हाईकमान के खिलाफ बगावत नहीं थी, बल्कि सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाए जाने की संभावनाओं को लेकर विधायकों की असहमति थी।
अशोक गहलोत कमजोर कर रहे हैं पायलट की राजनीतिक स्थिति
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि जब भी सचिन पायलट की राजनीतिक स्थिति मजबूत होती है, अशोक गहलोत उन्हें कमजोर करने का प्रयास करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि गहलोत आज भी पायलट को एक बच्चे की तरह देखते हैं और उन्हें आगे बढ़ने नहीं देना चाहते हैं।
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सचिन पायलट को अपना रास्ता बनाना चाहिए
मदन राठौड़ ने कहा कि यह कांग्रेस का आंतरिक मामला है, लेकिन सचिन पायलट को खुद तय करना होगा कि उनका राजनीतिक भविष्य किस दिशा में है। यदि उन्हें लगता है कि कांग्रेस में उनका भविष्य सुरक्षित है तो वह वहीं रहें, अन्यथा उन्हें अपना रास्ता तय करना चाहिए।
कांग्रेस के अंदर खत्म नहीं हो रही गुटबाजी
भाजपा नेता ने दावा किया कि कांग्रेस के भीतर अब भी गुटबाजी खत्म नहीं हुई है। उनके अनुसार, एक तरफ अशोक गहलोत और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा हैं, जबकि दूसरी तरफ सचिन पायलट खड़े हैं। उन्होंने कहा कि गहलोत समय-समय पर ऐसे बयान देते हैं, जिससे पायलट की राजनीतिक छवि को नुकसान पहुंचे।
ये भी पढ़ें- Rajasthan News: 'साजिश थी और मैं बदनाम हो गया'; 2022 की बगावत पर पहली बार गहलोत ने तोड़ी चुप्पी
गौरतलब है कि 2020 में सचिन पायलट ने तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व के खिलाफ बगावत की थी। उस दौरान वह अपने समर्थक विधायकों के साथ हरियाणा के मानेसर में ठहरे थे। इसके बाद से दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक मतभेद समय-समय पर सामने आते रहे हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आगामी चुनावों को देखते हुए कांग्रेस के भीतर नेतृत्व और संगठन को लेकर चल रही चर्चाएं आने वाले दिनों में और तेज हो सकती हैं।
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दरअसल, रविवार को अशोक गहलोत ने सितंबर 2022 के राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि उस समय कांग्रेस में जो घटनाएं हुई थीं, वह पार्टी हाईकमान के खिलाफ बगावत नहीं थी, बल्कि सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाए जाने की संभावनाओं को लेकर विधायकों की असहमति थी।
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अशोक गहलोत कमजोर कर रहे हैं पायलट की राजनीतिक स्थिति
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि जब भी सचिन पायलट की राजनीतिक स्थिति मजबूत होती है, अशोक गहलोत उन्हें कमजोर करने का प्रयास करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि गहलोत आज भी पायलट को एक बच्चे की तरह देखते हैं और उन्हें आगे बढ़ने नहीं देना चाहते हैं।
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सचिन पायलट को अपना रास्ता बनाना चाहिए
मदन राठौड़ ने कहा कि यह कांग्रेस का आंतरिक मामला है, लेकिन सचिन पायलट को खुद तय करना होगा कि उनका राजनीतिक भविष्य किस दिशा में है। यदि उन्हें लगता है कि कांग्रेस में उनका भविष्य सुरक्षित है तो वह वहीं रहें, अन्यथा उन्हें अपना रास्ता तय करना चाहिए।
कांग्रेस के अंदर खत्म नहीं हो रही गुटबाजी
भाजपा नेता ने दावा किया कि कांग्रेस के भीतर अब भी गुटबाजी खत्म नहीं हुई है। उनके अनुसार, एक तरफ अशोक गहलोत और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा हैं, जबकि दूसरी तरफ सचिन पायलट खड़े हैं। उन्होंने कहा कि गहलोत समय-समय पर ऐसे बयान देते हैं, जिससे पायलट की राजनीतिक छवि को नुकसान पहुंचे।
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गौरतलब है कि 2020 में सचिन पायलट ने तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व के खिलाफ बगावत की थी। उस दौरान वह अपने समर्थक विधायकों के साथ हरियाणा के मानेसर में ठहरे थे। इसके बाद से दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक मतभेद समय-समय पर सामने आते रहे हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आगामी चुनावों को देखते हुए कांग्रेस के भीतर नेतृत्व और संगठन को लेकर चल रही चर्चाएं आने वाले दिनों में और तेज हो सकती हैं।