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Jaipur: फर्जी डॉक्यूमेंट से भूमि का करवाया नामांतरण, भूमि हड़पने के लिए पिता ने रची साजिश; बेटों ने दिया अंजाम
Wed, 27 Nov 2024 08:07 AM IST
शबाहत हुसैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: शबाहत हुसैन
Updated Wed, 27 Nov 2024 08:07 AM IST
सार
Jaipur: जयपुर में करोड़ों रुपए कीमत की भूमि हड़पने के लिए पैतृक प्लान बनाए गए होने का मामला सामने आया है। भूमि हड़पने के लिए 47 साल पहले पिता की रची साजिश को उनकी मौत के बाद अंजाम दिया।
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फर्जी डॉक्यूमेंट से भूमि का करवाया नामांतरण
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
जयपुर में पिता की मौत के बाद फर्जी तरीके से दिल्ली नगर निगम से मृत्यु प्रमाण-पत्र बनवाया। मृत्यु प्रमाण-पत्र में फेक डॉक्यूमेंट के जरिए दादा का नाम बदलवाकर भूमि हड़पने के लिए नामांतरण की तस्दीक करवा डाली। बस्सी थाने में धोखे का पता चलने पर पीड़ित पक्ष ने रिपोर्ट दर्ज करवाई है।
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पुलिस जानकारी के मुताबिक आंधी निवासी भागीरथ मीणा (68) और रामफूल मीण (62) ने बस्सी थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई है। शिकायत में कल्याण के बेटे डूंगर सिंह, रमेश चन्द, महेश मीणा, बहू मोता देवी और सरपंच पपीता देवी के खिलाफ FIR दर्ज करवाई है। रिपोर्ट में बताया कि उसके पूर्वज प्रभात उर्फ प्रभात्या की कोई बेटा-बेटी नहीं थे। उसकी पैतृक भूमि का नामांतरण उसके भाई बुद्धया, ग्यारसा, रामनाथ व मोती के नाम पर तस्दीक होना चाहिए था।
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उनके पूर्वज प्रभात उर्फ प्रभात्या की भूमि को हड़पने के लिए आरोपी कल्याण मीणा ने साजिश रची। राजस्व कर्मचारियों से सांठ-गांठ कर आरोपी कल्याण ने फर्जी तरीके से प्रभात का दत्तक पुत्र बनकर भूमि का नामांतकरण अपने नाम खुलवा लिया। इसके साथ ही कल्याण ने अपने जैविक पिता रामनाथ की सम्पत्ति का भी नामांतकरण अपने नाम खुलवा लिया।
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धोखे में रखकर करता रहा टालमटोल
पूर्वज प्रभात उर्फ प्रभात्या की भूमि नामांतकरण के बारे में खातेदारों को मालूम चला। सभी पक्षकारों की ओर से जुलाई-1977 को एक लिखित बटवारानामा स्टाम्प पर निष्पादित किया गया। जिसमें आरोपी कल्याण ने स्वीकार किया कि प्रभात्या की जमीन पर सभी खातेदारों का बराबर-बराबर हिस्सा व कब्जा है।
कल्याण ने सभी खातेदारों को आश्वासन किया कि उनके हक व हिस्से अनुसार सभी के नाम जमीन करवा दूंगा। धोखे की नियत से विश्वास दिलाकर कल्याण ने अपने जीते-जी भूमि खातेदारों के नाम नहीं करवाई। बार-बार कहने के बाद भी आरोपी कल्याण टालमटोल करता रहा। जुलाई-1977 के निष्पादित इकरारनामे के अनुसार खातेदारों ने अपने हक व हिस्से पर पुख्ता निर्माण कर लिया।
पिता की मौत के बाद प्लानिंग में जुटे बेटे
फरवरी-2022 में आरोपी कल्याण की तबीयत खराब होने पर जेएनयू हॉस्पिटल में भर्ती करवाया गया। दो-तीन दिन हॉस्पिटल में रखने के बाद डॉक्टर्स ने घर पर देख-रेख करने की कहकर कल्याण को छुट्टी दे दी।हॉस्पिटल से छुट्टी मिलने के अगले दिन ही कल्याण की अपने घर पर मौत हो गई। मौत होने पर कल्याण के बेटों ने ग्राम पंचायत में मृत्यु प्रमाण-पत्र के लिए आवेदन किया। इस दौरान पीड़ितों को पता चला कि कल्याण ने अपनी मौत से करीब एक साल पहले अपने जैविक पिता रामनाथकी विरास्त में मिली सम्पत्ति को अपनी बहू मोता देवी पत्नी रमेश चन्द के नाम गिफ्ट डीड करवा दिया है। ग्राम पंचायत में बेटों के किए आवेदन पर पीड़ितों की ओर से आपत्ति पेश की गई।
फर्जी डॉक्यूमेंट से भूमि का करवाया नामांतरण
कल्याण के बेटों ने ग्राम पंचायत चावण्डिया की सरपंच पपीता देवी से मिलकर धोखाधड़ी की नियत से झूठा शपथ पत्र जारी करवाया। जिसमें दर्शाया गया कि कल्याण की मृत्यु दिल्ली में हुई है। झूठे शपथ पत्र के आधार पर दिल्ली नगर निगम से मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करवा लिया।
फेक डॉक्यूमेंट के जरिए मृत्यु प्रमाण-पत्र में कल्याण के पिता का नाम प्रभात दर्शाया गया। कल्याण के बाकी सभी डॉक्यूमेंट में उनके पिता का नाम रामनाथ मीणा है। मृत्यु प्रमाण-पत्र में कल्याण के पिता का नाम प्रभात दर्शाने का उद्देश्य भूमि हड़पना था। प्रभात की धोखे से अपने नाम करवाई भूमि को कल्याण ने हड़पने की प्लानिंग की थी।
उसके बेटों ने पिता की प्लानिंग को अंजाम देते हुए फर्जी तरीके से प्रभात को दादा दिखाकर भूमि का नामांतकरण अपने नाम तस्दीक करवा लिया। धोखे से करोड़ों रुपए की भूमि हड़पने की नीयत रखने वाले आरोपियों के खिलाफ पीड़ितों ने बस्सी थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई।