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Rajasthan Exclusive: ढाई हजार करोड़ के क्लेम पेंडिंग, कर्मचारियों की सरेंडर लीव का पैसा रोका, ठेकेदार बने चहेते
Tue, 07 May 2024 01:17 PM IST
प्रिया वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: प्रिया वर्मा
Updated Tue, 07 May 2024 01:17 PM IST
सार
प्रदेश सरकार के वित्त विभाग में गड़बड़ियां अब आम हो चली हैं। अभी तक तो केवल गलत भुगतान के मामले ही सामने आ रहे थे लेकिन कर्मचारी और पेंशनर्स तो अब तक बिलों के भुगतान का इंतजार ही कर रहे हैं, उधर ठेकेदारों को भुगतान भी कर दिए गए हैं।
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राजस्थान
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सरकार की वित्तीय व्यवस्था पर सवाल तो पहले ही उठने लगे थे लेकिन अब कर्मचारियों में इस बात को लेकर भी चर्चाएं होने लगी हैं कि वित्त विभाग में ठेकेदरों के भुगतान ऑउट ऑफ टर्न हो रहे हैं, जबकि कर्मचारी और पेंशनर्स महीनों से बिल भुगतान का इंतजार कर रहे हैं। हालात ये हैं कि कर्मचारियों के पेंशन बेनिफिट, जीपीओ, सीपीओ, लीव एनकैशमेंट सहित कई भुगतानों के करीब 2500 करोड़ रुपए के क्लेम वित्त विभाग में पेंडिंग हैं। इनमें बहुत बड़ा हिस्सा तो पिछले वित्त वर्ष का ही है।
वित्त विभाग में गलत भुगतान, डबल भुगतान, फर्जी भुगतान और मृतकों के खातों में भुगतान के मामले अब आम बात हो गई है लेकिन अब चर्चा है कि ट्रेजरी से बिल पास होने के बाद भी कर्मचारियों के बिलों को ECS में महीनों तक रोक लिया जाता है, जबकि प्राइवेट कांट्रेक्ट्रर्स के बिलों का भुगतान आउट ऑफ टर्न हो रहा है।
कर्मचारियों की समस्या है कि वे अपनी पीड़ा किसी से कह भी नहीं पा रहे हैं क्योंकि यहां उनकी कोई सुनवाई ही नहीं हो रही। अमर उजाला के पास ऐसे कई प्रकरण हैं, जिनमें ट्रेजरी से बिल पास होने के बाद भी वित्त मार्गोपाय विभाग के स्तर पर उनका भुगतान लंबे समय तक रोका जा रहा है।
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अप्रैल से अटके सरेंडर लीव के भुगतान
राजस्थान के ज्यादातर जिलों में कर्मचारियों के सरेंडर लीव के बिल ट्रेजरी से पास होने के बाद भी ECS के लिए पेंडिंग पड़े हुए हैं। इसके अलावा पीएल एनकैशमेंट, एसआई के क्लेम भी लंबे समय तक रोककर रखे गए। एसआई के भुगतान 26 अप्रैल को जाकर किए गए लेकिन सरेंडर लीव का पैसा अब भी रिलीज नहीं किया गया। बहुत से कर्मचारी ऐसे हैं, जिनके खातों में बिना आवेदन किए ही GPF और SI का पैसा ट्रांसफर किया जा रहा है।
भुगतान के लिए वित्त विभाग के चक्कर
भुगतान प्रणाली केंद्रीयकृत होने के बाद ट्रेजरी तो जिलों में बिल पास कर देती है लेकिन ECS वित्त मार्गोपाय से ही किया जाता है। इसके लिए जब कर्मचारी ट्रेजरी ऑफिस में पूछने जाता है कि भुगतान क्यों रोका गया है तो ट्रेजरी ऑफिस वाले उसे जयपुर जाकर पूछने के लिए कहते हैं। ऐसे में राजस्थान के हर कर्मचारी के लिए सचिवालय आकर अपने भुगतान प्रकरण के लिए चक्कर लगाना संभव नहीं है।
इनका कहना है-
कर्मचारियों के सरेंडर लीव का बकाया भुगतान 30 दिन से भी अधिक समय से भी लंबित है। इसके अलावा कर्मचारियों के GPF फाइनल, SI एवं एडवांस वेतन वाले भुगतान अभी तक लंबित चल रहे हैं। जबसे ट्रेजरी का कंट्रोल खत्म भुगतान प्रणाली सेंट्रलाइज की गई है तबसे कर्मचारियों को वित्त विभाग के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
मुकेश मुदगल, जिलाध्यक्ष, राज. राज्य मंत्रालियक महासंघ, जयपुर
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वित्त विभाग में गलत भुगतान, डबल भुगतान, फर्जी भुगतान और मृतकों के खातों में भुगतान के मामले अब आम बात हो गई है लेकिन अब चर्चा है कि ट्रेजरी से बिल पास होने के बाद भी कर्मचारियों के बिलों को ECS में महीनों तक रोक लिया जाता है, जबकि प्राइवेट कांट्रेक्ट्रर्स के बिलों का भुगतान आउट ऑफ टर्न हो रहा है।
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कर्मचारियों की समस्या है कि वे अपनी पीड़ा किसी से कह भी नहीं पा रहे हैं क्योंकि यहां उनकी कोई सुनवाई ही नहीं हो रही। अमर उजाला के पास ऐसे कई प्रकरण हैं, जिनमें ट्रेजरी से बिल पास होने के बाद भी वित्त मार्गोपाय विभाग के स्तर पर उनका भुगतान लंबे समय तक रोका जा रहा है।
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अप्रैल से अटके सरेंडर लीव के भुगतान
राजस्थान के ज्यादातर जिलों में कर्मचारियों के सरेंडर लीव के बिल ट्रेजरी से पास होने के बाद भी ECS के लिए पेंडिंग पड़े हुए हैं। इसके अलावा पीएल एनकैशमेंट, एसआई के क्लेम भी लंबे समय तक रोककर रखे गए। एसआई के भुगतान 26 अप्रैल को जाकर किए गए लेकिन सरेंडर लीव का पैसा अब भी रिलीज नहीं किया गया। बहुत से कर्मचारी ऐसे हैं, जिनके खातों में बिना आवेदन किए ही GPF और SI का पैसा ट्रांसफर किया जा रहा है।
भुगतान के लिए वित्त विभाग के चक्कर
भुगतान प्रणाली केंद्रीयकृत होने के बाद ट्रेजरी तो जिलों में बिल पास कर देती है लेकिन ECS वित्त मार्गोपाय से ही किया जाता है। इसके लिए जब कर्मचारी ट्रेजरी ऑफिस में पूछने जाता है कि भुगतान क्यों रोका गया है तो ट्रेजरी ऑफिस वाले उसे जयपुर जाकर पूछने के लिए कहते हैं। ऐसे में राजस्थान के हर कर्मचारी के लिए सचिवालय आकर अपने भुगतान प्रकरण के लिए चक्कर लगाना संभव नहीं है।
इनका कहना है-
कर्मचारियों के सरेंडर लीव का बकाया भुगतान 30 दिन से भी अधिक समय से भी लंबित है। इसके अलावा कर्मचारियों के GPF फाइनल, SI एवं एडवांस वेतन वाले भुगतान अभी तक लंबित चल रहे हैं। जबसे ट्रेजरी का कंट्रोल खत्म भुगतान प्रणाली सेंट्रलाइज की गई है तबसे कर्मचारियों को वित्त विभाग के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
मुकेश मुदगल, जिलाध्यक्ष, राज. राज्य मंत्रालियक महासंघ, जयपुर