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Election Exclusive: अमर उजाला से खास बातचीत में बोले राहुल कस्वां- जनता इन चुनावों में मिटाएगी काका की खाज
Mon, 15 Apr 2024 01:55 PM IST
प्रिया वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: प्रिया वर्मा
Updated Mon, 15 Apr 2024 01:55 PM IST
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राजस्थान
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अमर उजाला
विस्तार
चूरू लोकसभा से भाजपा के निवर्तमान सांसद राहुल कस्वां ने पार्टी द्वारा टिकट काटने पर कांग्रेस का दामन थामा और चूरू से कांग्रेस के उम्मीदवार बने। अपने चुनाव प्रचार के दौरान राहुल ने अमर उजाला के साथ खास बातचीत करते हुए कई बातों पर से पर्दा हटाया। उन्होंने भाजपा पर कई सवाल खड़े करते हुए जवाब मांगा। जानिये राहुल कस्वां के साथ अमर उजाला की खास बातचीत के कुछ अंश
सवाल : कल तक जिनके लिए लड़ रहे थे आज उनसे ही लड़ रहे हैं, क्या कोई टीस या पीड़ा है, एक बार पूछा भी नहीं?
जवाब : दुख तो इस बात का है कि 33 साल एक घर में देने के बाद घर के लोग घर से बाहर निकालकर दरवाजा बंद करके बैठ गए। कोई दरवाजा खोलने को तैयार नहीं है, कोई बात नहीं कर रहा, पीड़ा तो होती है।
सवाल : अपने कोई संपर्क नहीं किया? अफवाहें थीं कि आपकी टिकट काट दी जाएगी?
जवाब : मैं प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी जी से निरंतर संपर्क में था। उनसे लगातार बातचीत चल रही थी, उन्होंने मुझे कहा था कि आपको प्रदेश में कहीं ना कहीं एडजस्ट किया जाएगा पर मैंने कहा कि एडजस्ट तो आपने कर दिया। रही टिकट काटने के बाद तो ये अफवाहें आज से नहीं हैं, ये 15 साल से चल रही हैं। 15 साल से निरंतर हमारा टिकट काटने की बात चलती है, पर हमको इन अफवाहों से कोई लेना-देना नहीं है क्योंकि हमको अपने काम पर कॉन्फिडेंस है। हमें पता है कि हमारा पब्लिक के साथ कनेक्ट है। हमने पब्लिक के साथ संबंध बनाए हैं। मैं मेरे घर में अकेला नहीं हूं। मेरे घर से रोज तीन गाड़ी निकलती है, हम निरंतर लोगों के संपर्क में हैं।
सवाल : भाजपा के नेता कहते हैं आपके परिवार से भाजपा के सांसद बने, आपके परिवार से विधायक बनाया फिर भी आपने भाजपा को छोड़ दिया?
जवाब : भाजपा से पूछो कौन आया उनके पास कोई भी पद मांगने या कभी कोई टिकट मांगा। मेरे पिताजी MLA का चुनाव लड़ते थे ,वही हारते थे, जीतते थे। मेरे परिवार ने 11 चुनाव लड़े, जिसमें से हम तीन ही जीते, हम कोई हार-जीत की वजह से चुनाव नहीं लड़ते। हमारे तो दादा का पैशन था चुनाव लड़ना, मेरे तो पिताजी 20-25 साल सरपंच रहे। ये तो मेरे परिवार का पैशन है। आप आए थे हमारे पास, शेखावत जी आये थे कि हम चुनाव लड़ने आगे आएं। उस समय बीजेपी यहां शून्य थी, हमने यहां मेहनत की। बलराम जाखड़ जैसे लोगों को हराया। 2009 में जब बीजेपी के दो ही एमपी जीत के आए थे तो कुछ तो बात रही होगी हममें। ऐसा तो नहीं हो सकता कि सब कुछ बीजेपी है। पिछले 10 साल में ठीक है पार्टी ग्रो कर गई, विश्व की सबसे बड़ी पार्टी बन गई लेकिन ऐसा तो नहीं है कि सब कुछ बीजेपी के लिए चला जाएगा।
सवाल: तो फिर ऐसा क्या हुआ, जो इतना लंबा रिश्ता टूट गया? राजेंद्र राठौड़ कहते हैं कल तक मैं काका था, आज कंस हो गया।
जवाब: उन्होंने कंस वाला काम किया है। जिन हाथों पर राखी बांधी, उन्होंने उसे ही काट दिया। जिस माथे पर टीका लगाया था, उन्होंने उस माथे को ही हटा दिया लेकिन चुनाव हराना और जिताना जनता के हाथ में होता है। हमने तो इस विषय पर कभी चर्चा भी नहीं कि क्या हुआ था, क्या नहीं। ऐसा क्या हुआ जो वे इतना नाराज हैं। अब तो चुनाव में चार दिन का समय बचा है, अब तो कम से कम बता दें कि उनके मन में क्या पीड़ा है। इन्होंने राजस्थान को पूरी तरीके से अपने कब्जे में लेने की प्रयास किया। उनके आसपास के लोग उन्हें मुख्यमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट करते थे, जब कभी फोन आता था कहते कि होने वाले मुख्यमंत्री बात करेंगे।
सवाल: आप पर आरोप है कि आपने तारानगर का चुनाव हरवा दिया?
जवाब: मैं और मेरा परिवार अगर इतने ही ताकतवर थे तो ये आ जाते मेरे पास, मिल लेते। इनका चुनाव इनके एरोगेंस ने हराया है। चुनाव में इनके आसपास जो चार-पांच लोग रहते थे उन्होंने हराया है, वे इनको फ्यूचर मुख्यमंत्री के रूप में प्रस्तुत कर रहे थे। इन्होंने जिस प्रकार का टेंपरामेंट बनाया वह जनता में नेगेटिव चला गया। अमर उजाला पर पहली बार मैं यह बात बता रहा हूं कि इन्होंने 19 तारीख को मुझे फोन किया, जब चुनाव उनके हाथ से पूरी तरह जा चुका था। नहीं तो उससे पहले इन्होंने एक बार भी फोन तक नहीं किया मुझे। मैंने तो उनसे जब भी पूछा था कि आपको दर्द क्या है? अगर मैं कुछ बोलूंगा तो उन्हें बहुत शर्मिंदगी झेलना पड़ जाएगी। एक गंदी आदत आदमी के पूरे जीवन को खत्म कर देती है, इनकी ईगो इनको ले बैठी है।
यहां बीजेपी का बच्चा-बच्चा जानता है कि काका यह तक एश्योर करता है कि कौन कहां बैठेगा, कौन कब बोलेगा, किसको नीचा दिखाना है। मैंने तो सिर्फ उनके खिलाफ आवाज उठाई है क्योंकि मैं यह बर्दाश्त नहीं कर सकता। राजनीति कोयले की खदान से काम नहीं होती पर आज तक हम पर कोई एक दाग नहीं है। हम चूरू के ही राजा हैं और चूरू के ही रंक। हमसे किसी को क्या बैर। हमें तो जीना यहीं है और मरना यहीं है। डेवलपमेंट हमारा पैशन था और है, वो हमने किया है।
सवाल: राहुल जी आपकी विचारधारा क्या थी?
जवाब: देखिए विचारधारा क्या होती है डेवलपमेंट ही तो होता है। भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा क्या है, डेवलपमेंट कनेक्ट विद द पीपल मैं कर रहा था, समाज को कास्ट के हिसाब से नहीं बांटना मैं कर रहा था, मैंने तो कभी किसी समुदाय के लिए एक शब्द भी नहीं कहा। भाजपा की ही विचारधारा को फॉलो कर रहा था, मैंने क्या कमी छोड़ी।
सवाल : प्रधानमंत्री ने मंच से कहा कि देवेंद्र झाझड़िया से मेरे पर्सनल संबंध हैं, इसको कैसे देखते हैं?
जवाब: देखिए मैं इस पर कमेंट नहीं कर सकता। पर जनता तो यह पूछ रही है कि इस निजी मित्रता का हमको क्या लाभ मिलेगा? क्या यह निजी मित्रता डेवलपमेंट में कन्वर्ट हुई, क्या डेवलपमेंट इससे हो पाएगा? जनता अब समझदार है जनता डेवलपमेंट की बात करती है, विकास की बात करती है, जनता देखती है कि मुझे क्या मिला। भैया आज आपका कौन मित्र है इससे पब्लिक को क्या लेना-देना। पब्लिक तो आज अपने काम की बात करती है। जब आपको पता था कि आप चुनाव लड़ने वाले हो तो क्या अपने प्रधानमंत्री के आगे ये सारी बातें रखीं, क्या हमारी समस्याएं बताईं, यदि नहीं तो फिर निजी मित्रता का क्या फायदा?
सवाल: कांग्रेस क्या सोच के ज्वाइन की?
जवाब: देखिए मैंने अपने सारे लोगों के साथ विचार-विमर्श किया। सारे लोगों ने मुझे समझाया, कांग्रेस के प्रति हमारे लोगों के बीच एक अच्छी भावना थी। सब लोगों का मुझ पर प्रेशर था तो मैंने कहा ठीक है, इस अन्याय के खिलाफ हमको आवाज उठनी थी, कांग्रेस ने मुझे आगे से ऑफर किया, मैंने उनकी बात पर विचार कर लिया।
सवाल: जिस विचारधारा के साथ आप जुड़े हुए थे वह कहती है कि कांग्रेस मुक्त भारत पर आप आज कांग्रेस युक्त भारत की तरफ बढ़ रहे हैं?
जवाब: विचारधारा जैसे भारी-भरकम शब्दों से क्या हो जाता है, क्या कांग्रेस की विचारधारा है कि देश को बेच देंगे?
कांग्रेस भी तो देश के डेवलपमेंट के लिए काम कर रही है। जो आईआईटी, आईआईएम, इसरो कांग्रेस ने बनाई क्या उसका आज भी कोई विकल्प बन पाया। कांग्रेस द्वारा कराए गए कामों का क्या कोई डुप्लीकेट आज तक तैयार कर पाए, सबके पास अपना एक डेवलपमेंट का मॉडल है। कांग्रेस राइट टू इनफार्मेशन, राइट टू एजुकेशन, राइट टू फूड एंड सिक्योरिटी लेकर आई ना। तो सबके अपने डेवलपमेंट के मॉडल हैं। काम कांग्रेस में भी हुए हैं, काम बीजेपी के राज में भी हुए पर आज जो लोगों की जरूरत है, वह कनेक्ट विद पीपल है।
सवाल: आपने कहा कि भाजपा अगर 400 पार गए तो संविधान बदल देंगे, क्या आपको यह संभव लगता है?
जवाब: देखिए यह एक बहुत ही भयावह स्थिति है। कोई भी राजनीतिक पार्टी 400 प्लस का नारा इसलिए दे सकती है कि उसे मोटिवेट करना है, परंतु यदि आपके सांसद यह कहते हैं कि हम संविधान बदल देंगे और उसका कोई विरोध नहीं करता तो इसका मतलब क्या निकाला जाए? आज जनता के अंदर एक असमंजस की स्थिति है, भय की स्थिति है, धर्म को लेकर और भी बहुत सी चीजों को लेकर। इनको इसका खंडन करना चाहिए, अगर नहीं कर रहे हैं तो इसका क्या मतलब है।
सवाल: चुनावों को आप कैसे देखते हैं? एक तरफ आपका डेवलपमेंट है और दूसरी तरफ प्रधानमंत्री मोदी, जनता कैसे फैसला करेगी?
जवाब: देखिए लोग अपना मन बना चुके हैं। अब तो सिर्फ वोट डालने बाकी हैं। लोगों ने मन बना लिया है कि काका की खाज मिटानी है और काका की खाज मिटेगी।