Rajasthan: सरकारी अस्पतालों में उपकरण दान दो तो खर्च भी उठाओ, मेडिकल विभाग के फरमान पर बढ़ा विवाद; मामला क्या?
राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में दान दी जाने वाली मशीनों और एंबूलेंस को लेकर दानदाताओं पर ही उनके संचालन का खर्च मढ़ने वाले मेडिकल विभाग के अजीबो-गरीब आदेश पर विवाद गहराने लगा है। जानिए, यह मामला क्या है?
विस्तार
प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में स्वयंसेवी संस्थाओं, दानदाताओं और ‘जनप्रतिनिधियों’ द्वारा मेडिकल उपकरण, एंबुलेंस, फर्नीचर आदि जरूरत की संसाधन दान किए जाते हैं। लेकिन, मेडिकल विभाग ने एक आदेश जारी कर कहा कि दान में मिले उपकरणों के रखरखाव, चालक और ईंधन पर होने वाले खर्च को पांच साल तक संबंधित व्यक्ति या संस्था ही उठाए। इस अजीबो-गरीब आदेश के सामने आने के बाद इसे लेकर विवाद खड़ा हो गया है। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने इस आदेश की आलोचना करते हुए इसे समाजसेवी, भामाशाह और जनप्रतिनिधियों को हतोत्साहित करने वाला आदेश बताया।
जबरन वसूली का आदेश
जूली ने कहा- भाजपा सरकार आमजन की सुविधा के लिए पूर्ववर्ती सरकार द्वारा चलाई जा रही जनकल्याणकारी योजनाओं को जारी रखने में विफल रही है। सरकार की गलत नीतियों और कुप्रबंध के कारण आरजीएचएस, चिरंजीवी और अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाएं दम तोड़ रही हैं, ऐसे में मेडिकल विभाग द्वारा जारी नया फरमान स्वयंसेवी संस्थाओं, दानदाताओं, भामाशाहों और जनप्रतिनिधियों को हतोत्साहित करने वाला साबित होगा। उन्होंने कहा कि दान या सेवा, प्रदाता की स्वेच्छा से दिए जाते हैं, उनसे रखरखाव, संचालन आदि के नाम पर जबरन वसूली किया जाना न तो व्यवहारिक है और नहीं नैतिक रूप से सही है।
आदेश का विपरीत प्रभाव पड़ेगा
प्रतिपक्ष के नेता जूली ने बताया कि प्रदेश में 19 हजार से अधिक हैल्थ सेंटर हैं, जहां रोगियों की तुलना में मेडिकल उपकरण, फर्नीचर आदि आवश्यक सुविधाओं का अभाव बना रहता है। ऐसे में स्वयंसेवी संस्थाओं और दानदाताओं द्वारा प्रतिवर्ष 50 से अधिक मशीनें, एंबुलेंस सहित अन्य मेडिकल उपकरण दानस्वरूप अस्पतालों को प्राप्त होते हैं, जिनसे आमजन को राहत मिलती है। लेकिन, नए फरमान में दान स्वीकार करने के लिए ‘दान स्वीकार्य समिति’ बनाया जाना और दान के साथ दानदाताओं से मेडिकल उपकरणों को 5 साल तक चलाने के लिए उनके रखरखाव आदि पर होने वाली राशि, एंबुलेंस की स्थिति में वाहन चालक का वेतन और ईंधन पर व्यय होने वाले राशि वसूल किया जाना ठीक नहीं है। इससे स्वास्थ्य सेवाओं पर भी विपरीत प्रभाव पडे़गा। प्रतिपक्ष के नेता जूली ने सरकार से मांग की है कि सरकार आमजन को मिलने वाली राहत में बाधक इस फरमान को तत्काल वापस ले।
ये जारी किया था फरमान
स्वास्थ्य निदेशालय ने गुरुवार को एक आदेश जारी किया जिसमें कहा गया कि सरकारी अस्पतालों, सीएचसी, पीएचसी पर दान में दिए जाने वाले मेडिकल उपकरण व एंबूलेंस तभी ली जाएगी जब दान दाता उनके 5 साल तक के संचालन का खर्च उठाने के लिए तैयार हों। यही नहीं एंबुलेंस चलाने के लिए स्टाफ और ड्राइवर के पांच साल तक के वेतन का बंदोबस्त भी दान दाता को ही करना होगा। यदि विधायक, सांसद अपने कोष से इन संस्थानों में उपकरण/मशीन प्रदान करते हैं तो इसके लिए उन्हें आरटीपीपी नियमों की पालना करनी आवश्यक होगी। यदि एंबुलेंस दान में दी जाती है तो उसके लिए वाहन चालक औरर ईंधन के पांच साल तक का खर्च भी उन्हें ही उठाना होगा।
ये बिल्कुल गलत
यह आदेश बिल्कुल गलत है, चुने हुए जन प्रतिनिधियों के विरुद्ध है। दाना दाता खुद के पैसे से दान रहे हैं उन पर भी अंकुश लगाने की कार्रवाई है ये आदेश। ये बिल्कुल गलत है।
राजेंद्र राठौड़, पूर्व स्वास्थ्य मंत्री व बीजेपी नेता