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कांस्टेबल भर्ती परीक्षा घोटाला: SOG ने दबोचा आरोपी, रिमोट एक्सेस और पेन ड्राइव से हैक किया था ऑनलाइन सिस्टम
Tue, 02 Jun 2026 08:51 PM IST
जयपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: जयपुर ब्यूरो
Updated Tue, 02 Jun 2026 08:51 PM IST
सार
राजस्थान कांस्टेबल भर्ती परीक्षा-2017 घोटाले में एसओजी ने आरोपी कानाराम को गिरफ्तार किया है। जांच में खुलासा हुआ कि रिमोट एक्सेस तकनीक और डार्क कॉमेट सॉफ्टवेयर के जरिए अभ्यर्थी को परीक्षा में अनुचित लाभ पहुंचाया गया। मामले में अब तक 34 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं।
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आरोपी कानाराम
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप (एसओजी) ने कांस्टेबल भर्ती परीक्षा-2017 में अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाने वाले एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि संगठित गिरोह ने ऑनलाइन परीक्षा प्रणाली में हस्तक्षेप कर रिमोट एक्सेस तकनीक के जरिए अभ्यर्थियों के प्रश्नपत्र हल कराए थे। इस मामले में अब तक 34 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
कंपनी के कर्मचारी ने दर्ज कराई थी शिकायत
एसओजी के अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस विशाल बंसल ने बताया कि 12 मार्च 2018 को एपटेक कंपनी के कर्मचारी रोहन कपूर ने इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई थी। राजस्थान पुलिस द्वारा कांस्टेबल भर्ती परीक्षा-2017 के आयोजन की जिम्मेदारी एपटेक कंपनी को सौंपी गई थी। परीक्षा 7 मार्च से 5 मई 2018 के बीच ऑनलाइन मोड में आयोजित की गई थी।
रिमोट एक्सेस के जरिए लिया था एक्सेस
शिकायत में आरोप लगाया गया था कि परीक्षा केंद्र सरस्वती इन्फोटेक के संचालक और अन्य लोगों ने एक संगठित गिरोह बनाकर कुछ अभ्यर्थियों को अवैध रूप से लाभ पहुंचाने की साजिश रची। इसके लिए परीक्षा केंद्र पर मौजूद कंप्यूटर सिस्टम में रिमोट एक्सेस के माध्यम से हस्तक्षेप किया गया। मामले में एसओजी थाना, जयपुर में प्रकरण संख्या 04/2018 दर्ज किया गया था।
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सीसीटीवी फुटेज में सामने आया सच
जांच के दौरान सामने आया कि गिरफ्तार आरोपी कानाराम की सांठगांठ से लाभार्थी अभ्यर्थी हीरालाल को परीक्षा में अनुचित फायदा पहुंचाया गया। सीसीटीवी फुटेज के विश्लेषण में पाया गया कि 9 मार्च 2018 को परीक्षा की दूसरी पारी में हीरालाल को उसकी निर्धारित सीट संख्या 53 से हटाकर सीट संख्या 66 पर बैठाया गया था। अनुसंधान में यह भी खुलासा हुआ कि आरोपी विकास और अमोल ने पूरी व्यवस्था तैयार की थी। सीट संख्या 66 पर मौजूद कंप्यूटर में आरोपी अमोल महाजन ने सिस्टम को लॉगऑफ और पुनः लॉगऑन कर पेन ड्राइव के जरिए डार्क कॉमेट सॉफ्टवेयर इंस्टॉल किया। इसके बाद एक्सेस प्वाइंट के माध्यम से कंप्यूटर को दूरस्थ रूप से नियंत्रित किया गया।
ये भी पढ़ें- Rajasthan: हनुमान बेनीवाल ने मदन राठौड़ को भेजा लीगल नोटिस, कहा- सार्वजनिक माफी मांगें; सियासी हलचल तेज
कमरा नंबर 204 से हल हो रहा था प्रश्न पत्र
एसओजी जांच में यह भी सामने आया कि परीक्षा के प्रश्नों का समाधान किंगविंग बिल्डिंग के कमरा संख्या 204 से किया जा रहा था। वहां से रिमोट एक्सेस के जरिए अभ्यर्थी के कंप्यूटर को नियंत्रित कर प्रश्नपत्र हल कराया गया। एसओजी के अनुसार, इस बहुचर्चित भर्ती परीक्षा घोटाले में अब तक 34 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। गिरफ्तार आरोपी कानाराम से पूछताछ जारी है। साथ ही परीक्षा केंद्र पर सांठगांठ करने वाले अन्य व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
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कंपनी के कर्मचारी ने दर्ज कराई थी शिकायत
एसओजी के अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस विशाल बंसल ने बताया कि 12 मार्च 2018 को एपटेक कंपनी के कर्मचारी रोहन कपूर ने इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई थी। राजस्थान पुलिस द्वारा कांस्टेबल भर्ती परीक्षा-2017 के आयोजन की जिम्मेदारी एपटेक कंपनी को सौंपी गई थी। परीक्षा 7 मार्च से 5 मई 2018 के बीच ऑनलाइन मोड में आयोजित की गई थी।
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रिमोट एक्सेस के जरिए लिया था एक्सेस
शिकायत में आरोप लगाया गया था कि परीक्षा केंद्र सरस्वती इन्फोटेक के संचालक और अन्य लोगों ने एक संगठित गिरोह बनाकर कुछ अभ्यर्थियों को अवैध रूप से लाभ पहुंचाने की साजिश रची। इसके लिए परीक्षा केंद्र पर मौजूद कंप्यूटर सिस्टम में रिमोट एक्सेस के माध्यम से हस्तक्षेप किया गया। मामले में एसओजी थाना, जयपुर में प्रकरण संख्या 04/2018 दर्ज किया गया था।
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सीसीटीवी फुटेज में सामने आया सच
जांच के दौरान सामने आया कि गिरफ्तार आरोपी कानाराम की सांठगांठ से लाभार्थी अभ्यर्थी हीरालाल को परीक्षा में अनुचित फायदा पहुंचाया गया। सीसीटीवी फुटेज के विश्लेषण में पाया गया कि 9 मार्च 2018 को परीक्षा की दूसरी पारी में हीरालाल को उसकी निर्धारित सीट संख्या 53 से हटाकर सीट संख्या 66 पर बैठाया गया था। अनुसंधान में यह भी खुलासा हुआ कि आरोपी विकास और अमोल ने पूरी व्यवस्था तैयार की थी। सीट संख्या 66 पर मौजूद कंप्यूटर में आरोपी अमोल महाजन ने सिस्टम को लॉगऑफ और पुनः लॉगऑन कर पेन ड्राइव के जरिए डार्क कॉमेट सॉफ्टवेयर इंस्टॉल किया। इसके बाद एक्सेस प्वाइंट के माध्यम से कंप्यूटर को दूरस्थ रूप से नियंत्रित किया गया।
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कमरा नंबर 204 से हल हो रहा था प्रश्न पत्र
एसओजी जांच में यह भी सामने आया कि परीक्षा के प्रश्नों का समाधान किंगविंग बिल्डिंग के कमरा संख्या 204 से किया जा रहा था। वहां से रिमोट एक्सेस के जरिए अभ्यर्थी के कंप्यूटर को नियंत्रित कर प्रश्नपत्र हल कराया गया। एसओजी के अनुसार, इस बहुचर्चित भर्ती परीक्षा घोटाले में अब तक 34 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। गिरफ्तार आरोपी कानाराम से पूछताछ जारी है। साथ ही परीक्षा केंद्र पर सांठगांठ करने वाले अन्य व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।