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Ashok Gehlot Birthday: NSUI से शुरू किया राजनीतिक सफर, पांच बार बने सांसद, कहे जाते हैं 'राजनीति के जादूगर'
Wed, 03 May 2023 12:20 PM IST
अरविंद कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: अरविंद कुमार
Updated Wed, 03 May 2023 12:20 PM IST
सार
Ashok Gehlot Birthday: राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत आज अपना 72वां जन्मदिन मना रहे हैं। अपने पचास साल के राजनीतिक करियर में उन्होंने कई बड़े मुकाम हासिल किए। कड़े संघर्षों के बाद उन्होंने खुद को राजनीति के जादूगर के रूप में स्थापित किया।
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मुख्यमंत्री अशोक गहलोत
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत आज यानी तीन मई को अपना 72वां जन्मदिवस मना रहे हैं। उनके लिए ये साल खास है। क्योंकि इस साल राजनीतिक सफर में उनकी हाफ सेंचुरी पूरी हो चुकी है। पचास साल के राजनीतिक सफर में लोकप्रिय योजनाओं को लागू करने के साथ-साथ गांधीवादी सिद्धांतों पर जोर देने वाले मुख्यमंत्री गहलोत ने अपने शांत स्वभाव, मजबूत इरादे, गंभीर सोच और दूरदर्शिता के दम पर राजस्थान में गहलोत युग स्थापित किया। विरोधियों को गांधीवादी सिद्धांतों के साथ शांत करने का नाम ही अशोक गहलोत बन गया है।
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बताते चलें, सीएम अशोक गहलोत का जन्म तीन मई 1951 को राजस्थान के जोधपुर में हुआ था। 12वीं तक शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने जयनारायाण व्यास यूनिवर्सिटी से संबद्ध कॉलेज में एडमिशन लिया। जन्म से ही प्रतिभा के धनी अशोक गहलोत ने विज्ञान संकाय और कानून से स्नात्तक की डिग्री हासिल की। मुख्यमंत्री के साथ-साथ वित्त मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने स्नात्तक के बाद अर्थशास्त्र से मास्टर डिग्री भी हासिल की।
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छात्र राजनीति से की सफर की शुरुआत...
- सीएम अशोक गहलोत ने छात्र जीवन में ही राजनीति की ओर कदम बढ़ा दिए थे, उन्होंने पहली बार साल 1973 में एनएसयूआई से राजनीतिक सफर की शुरुआत की।
- साल 1973 से 1979 तक सीएम गहलोत एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष रहे, इसके बाद 1979 से 1982 तक जोधपुर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारियां संभाली।
- मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपना पहला चुनाव महज 26 साल की उम्र में सरदारशहर से लड़ा, लेकिन पहले चुनाव में उन्हें विरोधियों से पराजय का सामना करना पड़ा। जन्म से ही अशोक गहलोत के खून में राजनीति रची-बसी थी। इसलिए इस पराजय से निराश होने के बजाय उन्होंने अपने आपको और ज्यादा मजबूत किया।
- उन्होंने साल 1980 में सीधे लोकसभा का चुनाव जीतकर विरोधियों की बोलती बंद कर दी, सीएम अशोक गहलोत ने पचास साल के राजनीतिक सफर में सभी जिम्मेदारियों को बखूबी संभाला है।
- गहलोत साल 1980 के बाद 1984, 1991, 1996 और 1998 तक पांच बार लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे। पांच बार सांसद का चुनाव जीतने वाले अशोक गहलोत को केंद्र में अहम जिम्मेदारियां मिलीं। उन्हें तीन बार केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल कर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों से नवाजा गया।
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राजनीति के जादूगर ने पूरे किए पचास साल...
- अपनी दूरदर्शी सोच, गांधीवादी सिद्धांतों और विरोधियों को उनकी ही चाल से मात देने में माहिर राजनीति के जादूगर कहे जाने वाले इस सीएम ने पचास साल के राजनीतिक सफर में अशोक गहलोत युग स्थापित कर दिया।
- साल 1998 में कांग्रेस को 153 सीटें मिलने के बाद तत्कालीन दिग्गज कांग्रेसियों से आगे निकल कर अशोक गहलोत पहली बार राजस्थान के मुख्यमंत्री बने। वंचित वर्ग और शोषित वर्ग के कल्याण की सोच रखने वाले अशोक गहलोत ने पहली बार एक दिसंबर 1998 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
- मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का जन्म माली समाज में हुआ। क्षत्रिय, जाट और ब्राह्मण जाति बाहुल्य वाले राजस्थान में शुरू से ही माली समाज का राजनीति में बहुत ज्यादा प्रभाव नहीं रहा है। लेकिन, जादूगर पिता लक्ष्मण सिंह गहलोत से सीखी जादूगरी का सही इस्तेमाल सीएम अशोक गहलोत ने राजनीति के मैदान में दिखाया।
- सभी समाजों को साथ लेकर चलने की विचारधारा ने उन्हें एक सर्वमान्य नेता के रूप में स्थापित किया। साल 2008 में हुए विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को बहुमत मिलने के बाद फिर दूसरी बार अशोक गहलोत ने 13 दिसंबर को मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की।
- 17 दिसंबर 2018 को अशोक गहलोत ने राजस्थान के मुख्यमंत्री के रूप में तीसरी बार कमान संभाली। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का पचास साल का राजनीतिक सफर आसान नहीं रहा है। विरोधियों के साथ-साथ अपनी ही पार्टी में लगातार उनका संघर्ष चलता रहा है।
राजनीति में हासिल किए कई मुकाम...
- अशोक गहलोत का विवाह सुनीता गहलोत के साथ 27 नवम्बर, 1977 को हुआ। विवाह के बाद पुत्र वैभव गहलोत और पुत्री सोनिया गहलोत उनके जीवन में आए।
- जन्म से ही वंचित वर्ग, शोषित वर्ग के साथ-साथ गांव, गरीब की सेवा के लिए तत्पर रहने वाले अशोक गहलोत ने बचपन से ही समाज सेवा में हाथ बटाए हैं।
- साल 1971 में बांग्लादेश युद्ध के दौरान पश्चिम बंगाल के बंगांव और 24 परगना जिलों में शरणार्थी शिविरों में अशोक गहलोत ने जमकर समाज सेवा की, इसके बाद भी समाज सेवा का सिलसिला थमा नहीं।
- सीएम गहलोत ने अपने युवाकाल में ही तरूण शान्ति सेना द्वारा सेवाग्राम, वर्धा, औरंगाबाद, इन्दौर में लगे शिविरों में सक्रिय रूप से कच्ची बस्ती और झुग्गी क्षेत्रों के विकास के लिए भरपूर प्रयास किए।
- आज भी अशोक गहलोत जरूरतमंद तबके के लिए सेवा करने वाली संस्थाओं के साथ मिलकर उनके जीवन उत्थान के लिए लगातार संघर्षरत हैं।
- राजस्थान के सीएम ने अब तक पांच बार सांसद, तीन बार केन्द्र में मंत्री, तीन बार कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष, दो बार कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव, पांच बार विधायक और तीन बार मुख्यमंत्री बनकर अशोक गहलोत युग स्थापित किया है।