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प्रताप जयंती समारोह में बोले शेखावत- जो समाज इतिहास भूल जाता है, उसकी पीढ़ियों में 'कॉकरोच' पैदा होने लगते हैं
Wed, 17 Jun 2026 11:38 PM IST
जयपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: जयपुर ब्यूरो
Updated Wed, 17 Jun 2026 11:38 PM IST
सार
महाराणा प्रताप जयंती समारोह में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने इतिहास, संस्कृति और नई पीढ़ी को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि जो समाज अपनी गौरवगाथाओं और सांस्कृतिक विरासत को भूल जाता है, उसकी पीढ़ियां अपनी पहचान और आत्मविश्वास खोने लगती हैं।
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केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि जो समाज अपनी आने वाली पीढ़ियों को अपने इतिहास, गौरवगाथाओं और सांस्कृतिक विरासत से परिचित नहीं कराता, वह धीरे-धीरे आत्मविश्वास खो देता है और उसकी पीढ़ियों में 'कॉकरोच' पैदा होने लगते हैं। बुधवार को बिड़ला ऑडिटोरियम में महाराणा प्रताप फाउंडेशन की ओर से आयोजित महाराणा प्रताप जयंती समारोह को संबोधित करते हुए शेखावत ने कहा कि महाराणा प्रताप की जयंती केवल एक वीर योद्धा को याद करने का अवसर नहीं है, बल्कि भारतीय स्वाभिमान, स्वतंत्रता, सांस्कृतिक अस्मिता और प्रतिरोध की उस चेतना को नमन करने का अवसर है, जिसने देश को पराधीनता के अंधकार में डूबने से बचाने का काम किया।
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उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप का संघर्ष केवल मेवाड़ या किसी एक राज्य का संघर्ष नहीं था, बल्कि साम्राज्यवादी और विस्तारवादी मानसिकता के विरुद्ध स्वाभिमान, स्वतंत्रता और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा का संघर्ष था। इस लड़ाई में केवल योद्धाओं ने ही नहीं, बल्कि सामान्य जन, आदिवासी समुदायों और चेतक जैसे प्रतीकों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। शेखावत ने कहा कि लंबे समय तक इतिहास को एक पक्षीय दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया गया। कई ऐसे प्रसंग, जिन्होंने भारत की प्रतिरोध क्षमता, वीरता और आत्मगौरव को प्रदर्शित किया, उन्हें पर्याप्त स्थान नहीं मिला। उन्होंने हल्दीघाटी और देवर (देवैर) के युद्धों का उल्लेख करते हुए कहा कि महाराणा प्रताप की वीरता और उपलब्धियों को इतिहास में वह महत्व नहीं दिया गया, जिसके वे हकदार थे।
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उन्होंने कहा कि भारत का इतिहास पराजय का नहीं, बल्कि निरंतर संघर्ष, पुनरुत्थान और आत्मगौरव का इतिहास है। बप्पा रावल, महाराणा सांगा, छत्रपति शिवाजी महाराज, बाजीराव पेशवा और गुरु गोविंद सिंह जैसे महापुरुषों ने भारत की सांस्कृतिक चेतना को जीवित रखने के लिए अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इतिहास केवल तिथियों, युद्धों और घटनाओं का संग्रह नहीं होता, बल्कि किसी राष्ट्र की सामूहिक स्मृति होता है। यदि समाज अपनी स्मृतियों को कमजोर होने देता है तो उसका आत्मविश्वास भी प्रभावित होता है। इसलिए इतिहास का पुनर्स्मरण और शोध आधारित अध्ययन समय की आवश्यकता है।
नई पीढ़ी का उल्लेख करते हुए शेखावत ने कहा कि आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल युग में इंटरनेट पर उपलब्ध सामग्री ही आने वाली पीढ़ियों के ज्ञान का आधार बनेगी। ऐसे में यह आवश्यक है कि प्रमाणिक, तथ्यपरक और शोध आधारित इतिहास डिजिटल माध्यमों पर उपलब्ध कराया जाए। अपने संबोधन के अंत में शेखावत ने कहा कि पहले दादा-दादी और नाना-नानी लोककथाओं, ऐतिहासिक प्रसंगों और परंपराओं के माध्यम से बच्चों को संस्कार और इतिहास से जोड़ते थे। यदि समाज अपनी आने वाली पीढ़ियों को अपनी गौरवगाथाएं नहीं सुनाएगा, अपने इतिहास पर गर्व करना नहीं सिखाएगा और उसे भुला देगा, तो उसका आत्मविश्वास कमजोर पड़ जाएगा और समाज अपनी जड़ों से कटने लगेगा।
कार्यक्रम के दौरान महाराणा प्रताप फाउंडेशन के संयोजक प्रेम सिंह बनवास ने केंद्रीय मंत्री का स्वागत किया। इस अवसर पर विधायक बालमुकुंद आचार्य, पूर्व सांसद रामचरण बोहरा सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक और समाजजन उपस्थित रहे।