जयपुर की बड़ी चौपड़ में भीषण आग: सेठी कॉम्प्लेक्स के भवन मालिक पर एफआईआर, तीन धाराओं में केस
जयपुर की बड़ी चौपड़ स्थित सेठी कॉम्प्लेक्स में 13 घंटे तक आग धधकती रही। कई दुकानें चपेट में आईं, दमकल को परेशानी हुई और अब भवन मालिक पर एफआईआर दर्ज हुई।
विस्तार
बड़ी चौपड़ स्थित मिनहारी जी के कटले के सेठी कॉम्प्लेक्स में लगी भीषण आग के मामले में पुलिस ने भवन मालिक आनंद सेठी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। यह मामला पुलिस की ओर से दर्ज कराया गया है। रिपोर्ट में भवन में अवैध निर्माण, अग्निशमन सुरक्षा उपकरण चालू हालत में नहीं होने, फायर एनओसी की व्यवस्था नहीं होने और आने-जाने के रास्ते संकरे व अवरुद्ध होने के आरोप लगाए गए हैं।
पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक आग करीब 13 घंटे तक धधकती रही। कॉम्प्लेक्स की दूसरी मंजिल पर लगी आग तेजी से फैल गई और कई दुकानों व गोदामों को अपनी चपेट में ले लिया। आग की भयावहता का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि इसे बुझाने में दमकलकर्मियों को लंबे समय तक मशक्कत करनी पड़ी।
रास्ता संकरा होने से दमकल को हुई परेशानी
पुलिस के अनुसार कॉम्प्लेक्स तक दमकल की गाड़ियों के पहुंचने में भी दिक्कत आई। रास्ता संकरा और अवरुद्ध होने के कारण दमकल वाहनों को मौके तक पहुंचने में परेशानी हुई। आग पर काबू पाने के लिए एक अस्थायी व्यवस्था भी करनी पड़ी। मामले में उप निरीक्षक नरेन्द्र की ओर से रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। एफआईआर की जांच थानाधिकारी राकेश खालिया को सौंपी गई है। पुलिस अब भवन में किए गए निर्माण, अग्निशमन इंतजाम और फायर एनओसी समेत सुरक्षा व्यवस्थाओं की जांच करेगी।
आग में इन दुकानों को नुकसान
आग की चपेट में आने वाली दुकानों और गोदामों में सतनाम मदान ट्रेडर्स, जितेन्द्र/कमल, कमल अग्रवाल, शैलेन्द्र अग्रवाल, राजेश, हसन, रमेश/राजेश, राकेश गुप्ता की विमल होजरी एजेंसी, छोटूमाई पुरुषोत्तम, अशोक कुमार शर्मा और विकास शर्मा समेत अन्य प्रतिष्ठान शामिल हैं। इसके अलावा 201-ए में राजेश/दीपिका, 202-ए में कमल, 203-ए में कमल, 204-ए में मगन, 205-ए में राजेश/दीपिका और 206-ए में राजेश/दीपिका की दुकानें भी प्रभावित हुईं। विमल होजरी एजेंसी में करीब 65 से 70 लाख रुपये के नुकसान की बात सामने आई है। अन्य दुकानों में हुए नुकसान का आकलन भी किया जा रहा है।
निरीक्षण दल में कई अधिकारी थे शामिल
निरीक्षण दल में आयोग के सदस्य पूर्व पुलिस महानिरीक्षक अशोक गुप्ता और कई अधिकारी शामिल थे। नगर निगम का 200 मीटर दूर स्थित हाइड्रेंट टेंडर न होने के कारण बंद पड़े होने की बात सामने आने पर आयोग अध्यक्ष ने कहा कि यदि हाइड्रेंट चालू स्थिति में नहीं है, तो उसका पास होने का कोई औचित्य नहीं रह जाता। इस कारण दमकल की गाड़ियों को पानी भरने के लिए आठ किलोमीटर दूर घाटगेट तक जाना पड़ता है। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत क्षेत्र में 14 हाइड्रेंट लगाए गए थे, लेकिन उचित रखरखाव के अभाव में वे अनुपयोगी साबित हो रहे हैं।
यह भी पढें- जयपुर: भाजपा की पार्षद अर्चना ने कांग्रेस के समर्थन से भरा चेयरमैन पद का पर्चा, परिजन बोले- पुलिस जबरन ले गई
भवन नियमों के उल्लंघन पर भवन मालिक पर मामला दर्ज
अग्निकांड के बाद माणकचौक थाना पुलिस ने सेठी कॉम्प्लेक्स के भवन मालिक आनंद सेठी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस जांच में भवन निर्माण के दौरान बिल्डिंग बायलॉज के भारी उल्लंघन की बात सामने आई है। थानाधिकारी राकेश ख्यालिया के अनुसार भवन के बरामदों और क्रॉस रास्तों को बंद करके किराए पर दे दिया गया था, जहां सामान रखा हुआ था। इन संकरे और बंद रास्तों के कारण आग बुझाने के दौरान दमकलकर्मियों को भीतर पहुंचने में काफी परेशानी हुई। इसके अतिरिक्त, कॉम्प्लेक्स में फायर फाइटिंग सिस्टम की एनओसी भी नहीं ली गई थी। जांच में पता चला है कि भवन की छत पर रेस्टोरेंट का निर्माण कराया जा रहा था, जहां रात में वेल्डिंग का काम चलता था। पुलिस शॉर्ट सर्किट के साथ-साथ वेल्डिंग के दौरान बिजली के तारों पर अत्यधिक लोड बढ़ने की आशंका की भी जांच कर रही है। विधि विज्ञान प्रयोगशाला की टीम ने मौके से साक्ष्य जुटाए हैं। घटना के बाद से भवन मालिक का फोन बंद आ रहा है।
दूसरे दिन भी निकलता रहा धुआं और भड़कीं चिंगारियां
हादसे के दूसरे दिन शुक्रवार को भी सेठी कॉम्प्लेक्स के मलबे से लगातार धुआं और हल्की चिंगारियां निकलती रहीं। स्थानीय लोगों और दुकानदारों ने तुरंत पानी डालकर स्थिति को नियंत्रित रखा। इससे पहले, गुरुवार शाम तक दमकल की गाड़ियां मलबे की गर्मी शांत करने के लिए लगातार पानी का छिड़काव करती रहीं। शुक्रवार शाम को हुई बारिश से भी आग के दोबारा भड़कने का खतरा कम हुआ।
पूर्व मुख्यमंत्री ने जाना हाल और जांच की मांग की
व्यापारियों का हाल जानने और नुकसान का जायजा लेने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी शुक्रवार को सेठी कॉम्प्लेक्स पहुंचे। उन्होंने प्रभावित दुकानदारों से बातचीत की और उनके नुकसान पर संवेदना व्यक्त की। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि नगर निगम की यह प्राथमिक जिम्मेदारी है कि वह व्यस्त बाजारों और व्यावसायिक इमारतों में स्थापित फायर फाइटिंग सिस्टम की समय-समय पर सघन जांच करे। उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि किसी मंत्री को मौके पर भेजकर प्रभावित व्यापारियों की पीड़ा सुनी जाए और उन्हें राहत पहुंचाई जाए। उल्लेखनीय है कि गुरुवार सुबह तीन मंजिला इमारत में चूड़ियों के गोदाम से भड़की आग ने 25 दुकानों को जलाकर खाक कर दिया था, जिस पर करीब साढ़े सात घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद काबू पाया जा सका था।