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Rajasthan: जयपुर विकास प्राधिकरण दलालों के शिकंजे में, मुख्यमंत्री की योजना का उड़ाया जा रहा माखौल

Wed, 12 Oct 2022 08:32 PM IST
उदित दीक्षित आशीष कुलश्रेष्ठ, जयपुर
आशीष कुलश्रेष्ठ, जयपुर Published by: उदित दीक्षित Updated Wed, 12 Oct 2022 08:32 PM IST
सार

प्रदेश की राजधानी जयपुर में जहां प्रिंसिपल सेक्रेटरी से लेकर मंत्री तक सब के दफ्तर तो मौजूद हैं, लेकिन पीड़ित की सुनवाई करने वाला कोई नजर नहीं आता है। शहरी विकास मंत्रालय जयपुर के हालात तो इस प्रकार बताएं गए हैं कि सुनने वाला यकीन ही न करे।  

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Jaipur Development Authority in clutches of brokers Ashok gehlot
जयपुर विकास प्राधिकरण - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

राजस्थान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की महत्वपूर्ण योजना प्रशासन आपके घर अभियान को शुरू किए कई महीने बीत चुके हैं। करोड़ों रुपये के प्रचार प्रसार के बाद भी यह योजना जिसके अंतर्गत आम जन को अपनी ही जमीन-प्लॉट या फिर अपनी जमीन के एवज में मिलने वाले मुआवजे के लिए रहा आसान करने की बात सीएम ने कही थी। वह लगातार इस योजना का फॉलोअप भी लेते रहते है, लेकिन इस योजना और शहरी विकास मंत्रालय दोनों की ही स्थिति बड़ी ही गंभीर है। योजना और मंत्रालय दोनों ही अधिकारियों की नजरअंदाजी की भेंट चढ़ गए हैं। आलम ये है कि अपनी ही जमीन, प्लॉट या जमीन के मुआवजे के लिए आमजन को दर-दर भटकने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों ने मजबूर कर दिया है।  

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प्रदेश की राजधानी जयपुर की बात की जाए जहां प्रिंसिपल सेक्रेटरी से लेकर मंत्री तक सब के दफ्तर तो मौजूद हैं, लेकिन पीड़ित की सुनवाई करने वाला कोई नजर नहीं आता है। शहरी विकास मंत्रालय जयपुर के हालात तो इस प्रकार बताएं गए हैं कि सुनने वाला यकीन ही न करे। मंत्रालय में अपना काम कराने आए कुछ लोगों ने नाम न लिखने की शर्त पर बताया कि यहां बिना पैसे के कोई कागज भी नहीं हिलता है, फाइल तो दूर की बात है। 
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वहीं, कुछ का कहना था कि मंत्री के यहां भी जो फाइल जाती हैं, उन पर एक ही सवाल बार-बार लिखकर वापस भेज दिया जाता है। जानकारों की बात सुने तो जयपुर विकास प्राधिकरण के हालात तो और भी ज्यादा नाजुक हैं। यहां हर फाइल के रेट तय किए गए हैं, पट्टा के इतने रुपये, किसानों को मुआवजे के इतने सब पहले से तय हैं। जेडीए के दफ्तर में अधिकारियों की कुर्सी पर अधिकृत दलाल बेठे हुए हैं। ये दलाल याचिकाकर्ता को अधिकारी तक पहुचने ही नहीं देते हैं। दलाल ही तय करते हैं कि किसकी फाइल पास होनी है और किसकी रोकनी है। अवस्थाओं और भ्रष्टाचार का आलम ये है कि आम लोगों को तो छोड़िए विधायक भी अपने कामों के लिए चक्कर लगा रहे हैं।
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शहरी विकास प्राधिकरण और जयपुर विकास प्राधिकरण की हालत यह है कि लोगों को मुआवजे की जो जमीन मिलनी थी, उस पर भी दलाली हो रही है। दरअसल, जमीन ही सबसे महंगे आइटम में शामिल है जिसकी कीमत लाखों में है, इसलिए कोई भी आम जन अपनी संपति को बचाने के लिए इन दलालों के चक्कर में आ जाता है और लाखो रुपये की भेंट इन्हें दे जाता है।  

जयपुर विकास प्राधिकरण में एसीबी की एक रेड हुई थी। जिसमें पूरे विभाग के अधिकारियों की मिली भगत सामने आई थी। कई अधिकारियों की गिरफ्तारी भी हुई, लेकिन यह दलाल नेटवर्क आज भी सक्रिय है जो मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की महत्पूर्ण योजना को मिट्टी में मिलाने का काम कर रहा है।  


2023 में होने वाले चुनावों में इसका सीधा असर सत्तारुढ़ पार्टी पर पड़ेगा, क्योंकि आज कोई सुनवाई करने वाला ही नहीं है। जनता सत्तारुढ़ पार्टी को ही अपने गुस्से का शिकार बनायेगी न तो अधिकारीगण का कुछ बिगड़ना है और न ही दलाल टोली का। मुख्यमंत्री गहलोत जो अपनी गांधी वादी सोच और छवि के अनुरूप योजना लेकर तो आए पर विभाग में बेठे दलाल और अधिकारी इस योजना को बट्टे खाते में लगा रहे हैं। जयपुर में हालात इतने गंभीर है तो पूरे राजस्थान की कल्पना भी नहीं की जा सकती है।

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