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क्या बाजों से भारत में जासूसी करा रहा है पाकिस्तान?
जैसलमेर/इंटरनेट डेस्क
Updated Mon, 15 Apr 2013 05:49 PM IST
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पाकिस्तान से भारत में प्रशिक्षित बाजों के जरिए जासूसी करवाने की संभावना जताई जा रही है। यह आशंका राजस्थान के जैसलमेर में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर एक मृत प्रशिक्षित बाज के मिलने से हुई।
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राजस्थान के जैसलमेर के तनोट क्षेत्र में पाकिस्तान की सीमा से आया एक प्रशिक्षित बाज अंतरराष्ट्रीय सीमा पर लगी तारबंदी के पास मृत पाया गया है।
बीएसएफ सूत्रों के मुताबिक बल के जवानों को शनिवार शाम पेट्रोलिंग के दौरान सीमा चौकी बबलियान वाला के सीमा स्तंभ 609 के पास तारबंदी के निकट एक प्रशिक्षित बाज मिला था।
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इस बाज पर ट्रांसमीटर एंटिना एवं एक टैग बंधा हुआ था, जिस पर सीएच 434 नंबर लिखा हुआ है।
सूत्रों ने बताया कि बाज पर लगे ट्रांसमीटर एंटिना के जरिए जासूसी किए जाने की संभावना के मद्देनजर इसे जांच के लिए विशेषज्ञों के पास भिजवाया गया है।
जांच के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि कहीं यह बाज पाक खुफिया एजेंसी आईएसआई का तो नहीं है।
सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तान के रेगिस्तानी इलाकों में अरब देशों के राज परिवार के सदस्यों की कई टोलियां डेरा डाले हुए हैं।
ये टोलियां दुर्लभ पक्षी हुबारा बर्ड के शिकार के लिए अपने पास खास प्रशिक्षित शिकारी बाजों को रखती हैं।
हुबारा बर्ड सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय करके ठंडे मुल्के से रेगिस्तानी इलाकों में पहुंच रहे हैं।
जैसलमेर-बीकानेर से लगती अंतर्राष्ट्रीय सीमा के सामने पाकिस्तानी क्षेत्रों में इन परिवारों के सदस्यों की हलचल कभी-कभार नजर आ जाती है।
इन लोगों की आधुनिक संचार उपकरणों से लैस टोयटा की बड़ी एवं छोटी गाड़ियां हुबारा पक्षियों के पीछे दौड़ती नजर आती रहती हैं।
सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तान सरकार ने वर्ष 2012-13 के लिए कुल 815 प्रशिक्षित शिकारी बाजों के लिए कुल 12 परमिट जारी किए हैं।
इसमें सऊदी अरब के राज परिवार के लिए दो परमिट में 135 बाज व बहरीन राज परिवार के लिए पांच परमिट में 200 बाज की अनुमति है।
इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात को दो परमिट में 250 बाज और कतर को 230 बाजों के लिए तीन परमिट जारी किए गए हैं।