राजस्थानः IPS ने खोली पोल, 'दंगा होता नहीं करवाया जाता है'
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भारतीय पुलिस सेवा में राजस्थान कैडर के अधिकारी पंकज चौधरी का आरोप है कि उन्हें पिछले साल बूंदी कस्बे में एक 'प्रायोजित' दंगा रोकने के लिए प्रताड़ित किया जा रहा है। उस समय पंकज चौधरी बूंदी में पुलिस अधीक्षक थे। सोमवार को राजस्थान सरकार ने चौधरी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है।
इसमें पंकज चौधरी पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने 12 सितंबर 2014 को बूंदी के नैनवा और खानपुर में दंगों से निपटने के लिए समय रहते कार्रवाई नहीं की। पंकज चौधरी फिलहाल नई दिल्ली स्थित राजस्थान सशस्त्र कांस्टेबुलरी की ग्यारहवीं बटालियन के प्रमुख हैं।
लेकिन पंकज चौधरी का कहना है कि पुलिस को ठीक से काम नहीं करने दिया जाता, उन्होंने कहा कि दंगा होता नहीं है, करवाया जाता है।
सरकार के आरोप
पंकज चौधरी ने बीबीसी से बातचीत में कहा, "दंगा तो छोड़ो, अगर पुलिस को अपना काम करने दिया जाए तो कहीं भी बदअमनी नहीं होगी।" उधर राज्य सरकार का उन पर आरोप है कि जब पिछले साल 12 सितम्बर को बूंदी ज़िले में साम्प्रदायिक फ़साद के हालात बने तो चौधरी देर से मौके पर पहुंचे।
इसके कुछ समय बाद चौधरी को बूंदी से हटा दिया गया। भारतीय पुलिस सेवा में 2009 बैच के अधिकारी चौधरी की दलील है कि सुप्रीम कोर्ट और केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय के निर्देश के मुताबिक, एक अधिकारी को एक स्थान पर दो साल काम करने देना चाहिए।
मगर उनके मामले में इसकी पालना नहीं की गई। उन्होंने कहा,'' मैं इंसाफ के लिए लड़ूंगा और इस मुहिम को न्याय की मंजिल तक ले जाऊंगा। जब चार्जशीट का जबाब दूंगा तो सब साफ़ हो जायेगा, ज़रूरत पड़ी तो अदालत की शरण भी लूंगा।"
मंत्री बोले अभी नहीं देंगे आरोपों के जवाब
उधर द इंडियन एक्सप्रेस ने इस सिलसिले में जब राज्य के गृहमंत्री गुलाब चंद कटारिया से बात की तो उन्होंने कहा कि पुलिस अधिकारी की आधिकारिक प्रतिक्रिया के बाद ही सरकार इसका जबाब देगी। अख़बार के मुताबिक मंत्री ने कहा, "जब हमें आधिकारिक तौर पर उनसे कुछ (प्रतिक्रिया) मिलेगी, तो हम उसके अनुसार ही जांच करेंगे, तब तक वे कुछ भी कहने को स्वतंत्र हैं।"
क्या था मामला
वर्ष 2014 में बूंदी के खानपुरा में कथित रूप से एक देव प्रतिमा को क्षतिग्रस्त कर दिया गया था जिससे वहां तनाव पैदा हुआ। पंकज चौधरी मौके पर पहुंचे और जांच पड़ताल के बाद कहा कि यह घटना प्रायोजित थी। उस समय पंचायती चुनाव का माहौल था।
वैसे ये पहला मौका नहीं है जब पंकज चौधरी सुर्ख़ियों में आए हैं। इससे पहले वर्ष 2013 में सीमावर्ती ज़िले जैसलमेर में एक विधायक के पिता की हिस्ट्रीशीट खोलने पर वे तत्कालीन सत्ताधारी दल के नेताओं के निशाने पर आ गए थे। जैसलमेर वे महज पांच माह तैनात रह सके और बूंदी में आठ माह होते होते उनको चलता कर दिया गया।