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राजस्थान मानवाधिकार आयोग ने कहा, लिव-इन रिलेशनशिप की प्रथा रोकना जरूरी
Wed, 04 Sep 2019 09:58 PM IST
आसिम खान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: आसिम खान
Updated Wed, 04 Sep 2019 09:58 PM IST
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राजस्थान के मानवाधिकार आयोग ने राज्य में लिव-इन रिलेशनशिप की प्रथा को रोकने की बात कही है। मानवाधिकार आयोग ने कहा कि लिव-इन रिलेशनशिप की प्रथा को रोकना अनिवार्य है, और इसे प्रतिबंधित करना राज्य और केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है।
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Human Rights Commission of Rajasthan issues order stating "it is imperative to stop the practice of live-in relationships, and it is the responsibility of the state and Central government to prohibit it." pic.twitter.com/wgu1sX7CJ7
— ANI (@ANI) September 4, 2019विज्ञापन
आयोग के अध्यक्ष न्यायाधीश प्रकाश टाटिया और न्यायाधीश महेश चंद्र शर्मा की एक खंडपीठ ने बुधवार को राज्य के मुख्य सचिव और गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को एक पत्र लिखकर राज्य सरकार से अनुशंसा की है कि इस मामले में कानून बनाए। आयोग ने केन्द्र सरकार से भी कानून बनाने का आग्रह किया है।
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आयोग के समक्ष 'लिविंग रिलेशनशिप' के कुछ मामले सामने आने के बाद कुछ माह पूर्व सभी हितधारकों से 'लिविंग रिलेशनशिप' में रह रही महिलाओं की सुरक्षा के संबंध में कानून बनाने के लिए सुझाव मांगे गए थे।
सभी हितधारकों के सुझावों और उनकी कानूनी राय के बाद आयोग ने पाया कि हर व्यक्ति को सम्मान पूर्वक जीवन जीने का अधिकार है जो कि भारतीय संविधान में मूल अधिकारों में शामिल है।
खंडपीठ ने अपनी अनुशंसाओं में कहा कि किसी महिला का 'रखैल' जीवन किसी भी दृष्टि से महिला का सम्मानपूर्वक जीवन नहीं कहा जा सकता है। 'रखैल' अपने आप में ही अत्यंत गंभीर चरित्र हनन करने वाला और घृणित संबोधन है।