{"_id":"62021d9c082bc51343464504","slug":"hitendra-garasiya-dead-body-came-udaipur-rajasthan-died-in-russia","type":"story","status":"publish","title_hn":"राजस्थान: 205 दिन बाद रूस से आया हितेंद्र का शव, आज गांव में विधि विधान से होगा अंतिम संस्कार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
राजस्थान: 205 दिन बाद रूस से आया हितेंद्र का शव, आज गांव में विधि विधान से होगा अंतिम संस्कार
Tue, 08 Feb 2022 01:07 PM IST
उदित दीक्षित
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उदयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उदयपुर
Published by: उदित दीक्षित
Updated Tue, 08 Feb 2022 01:07 PM IST
सार
17 जुलाई को हितेंद्र की मौत के बाद रूस सरकार ने शव देने से इंकार कर दिया और वहीं दफना दिया था। परिजनों की जिद और केंद्र सरकार सहित अन्य के प्रयासों के बाद रूसी सरकार ने शव भारत भेजने का फैसला किया था।
विज्ञापन
रूस में मारे गए हितेंद्र का आज होगा अंतिम संस्कार।
- फोटो : Social Media
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
मौत के 205 दिन बाद हितेंद्र का शव रूस से भारत आ गया। उदयपुर जिले के खेरवाड़ा में गोड़वा गांव के रहने वाले हितेंद्र गरासिया की 17 जुलाई 2021 को मॉस्को शहर के एक पार्क में लाश मिली थी। हितेंद्र की मौत की खबर उसके परिजनों को करीब एक महीने बाद मिली। भारतीय दूतावास से 17 अगस्त को खेरवाड़ा थाना पुलिस को जानकारी मिलने के बाद परिजनों को बेटे की मौत की सूचना दी गई। हितेंद्र के परिजन उसके शव का इंतजार करते रहे है, लेकिन शव भारत नहीं आ पाया।
विज्ञापन
मृतक के परिवार वालों ने उदयपुर जिला प्रशासन से लेकर भारतीय दूतावास तक गुहार लगाई, लेकिन उनकी किसी ने नहीं सुनी। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा के दौरान हितेंद्र के परिवार वालों ने दिल्ली में रूस दूतावास के सामने प्रदर्शन किया। परिजनों ने हितेंद्र के शव को भारत लाने के लिए मानवाधिकार, विदेश मंत्रालय और हाईकोर्ट तक गुहार लगाई थी। जिसका नतीजा ये रहा कि मौत के 205 दिन बाद रूस सरकार को झुकना पडा और शव भारत भेज दिया गया।
विज्ञापन
जानिए...अप्रैल 2021 से क्या हुआ
- 13 अप्रैल को हितेंद्र गरासिया अपने साथी के साथ काम करने रूस गया।
- 17 जुलाई को हितेंद्र की मौत हो गई।
- 17 अगस्त को दूतावास से परिजनों को हितेंद्र की मौत की सूचना मिली।
- 17 अक्टूबर को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में शिकायत पहुंची।
- 31 अक्टूबर को विदेश मंत्रालय को शिकायत दी।
- 7 नवंबर को रूसी दूतावास ने शव भेजने से साफ इंकार कर दिया।
- 15 नवंबर को परिजनों ने मानवाधिकार आयोग का फिर दरवाजा खटखटाया।
- 23 नवंबर को कानून मंत्रालय के रूस में भारतीय राजदूत को निर्देश दिए।
- 2 दिसंबर को मृतक के परिवार ने दिल्ली में जंतर-मंतर पर धरना दिया।
- 3 दिसंबर को परिजनों ने पीएम, राष्ट्रपति और विदेश मंत्री को पत्र लिखा। परिजनों ने रूसी पीएम के भारत दौरे पर उनके सामने प्रदर्शन करने और आत्मदाह की चेतावनी दी।
- 4 दिसंबर को रूसी दूतावास के अधिकारी मृतक के परिवार से मिले।
- 8 दिसंबर को हाईकोर्ट ने मामले को संवेदनशील बताया।
- 15 दिसंबर को हाईकोर्ट ने रूसी दूतावास को नोटिस जारी कर जवाब मांगा।
- 1 जनवरी को परिजन के साथ कांग्रेस के प्रवासी सहायता प्रभारी चर्मेश शर्मा ने राष्ट्रपति से मदद की गुहार लगाई।
- 12 जनवरी को दिल्ली में एक बार फिर प्रदर्शन किया गया।
- 28 जनवरी को प्रियंका गांधी ने पीएम को पत्र लिख कर परिवार की मदद करने की अपील की।
विज्ञापन