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पतंजलि ट्रस्ट को दी जाने वाली जमीन की रजिस्ट्री पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक, रामदेव के सपने पर लगा ब्रेक
ब्यूरो, अमर उजाला, जयपुर
Updated Tue, 24 Jul 2018 04:19 AM IST
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राजस्थान हाईकोर्ट ने करौली जिले में श्रीगोविंद देवजी मंदिर ट्रस्ट और पतंजलि योग पीठ ट्रस्ट के बीच मंदिर की भूमि की लीज डीड से जुडे़ मामले में विवादित जमीन पर किसी तरह के निर्माण व रजिस्ट्री पर अंतरिम रोक लगा दी है। इसके साथ ही अदालत ने देवस्थान विभाग से मंदिर की संपत्तियों के संरक्षण में उठाए कदमों की विस्तृत रिपोर्ट 17 अगस्त को पेश करने को कहा है।
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अदालत ने करौली तहसीलदार को निर्देश दिए हैं कि वह मंदिर की जमीन को लेकर राजस्व रिकॉर्ड में भी किसी तरह की एंट्री ना करें। इसके साथ ही अदालत ने देवस्थान विभाग सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। न्यायाधीश एसपी शर्मा की एकलपीठ ने यह आदेश रामकुमार सिंह की ओर से दायर याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए दी।
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याचिका में मंदिर ट्रस्ट और पतंजलि योग पीठ ट्रस्ट के बीच करीब चार सौ बीघा भूमि की 12 लाख रुपये सालाना में हुई लीज डीड को चुनौती दी गई है। याचिका में कहा गया है कि दोनों ट्रस्टों के बीच यह लीज हुई थी। पतंजलि ट्रस्ट यहां योगपीठ, गुरुकुल सहित दवाईयों का उत्पादन केंद्र बनाना चाहता है।
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याचिका में कहा गया है कि मंदिर के नाम होने के कारण जमीन का उपयोग गैर कृषि कार्य के लिए नहीं हो सकता है। इसके अलावा मंदिर ट्रस्ट की ओर से जिन लोगों ने डीड की है, वे ट्रस्ट के ट्रस्टी ही नहीं हैं।
देवस्थान विभाग की जांच में भी मंदिर ट्रस्ट के खिलाफ रिपोर्ट आई है। वहीं ऑडिट रिपोर्ट भी ट्रस्ट के विरुद्ध है। याचिका में यह भी कहा गया कि मंदिर ट्रस्ट का पंजीकरण 29 जून 1964 को हुआ था।
पंजीकरण के समय ट्रस्ट की ओर से पेश संपत्तियों की सूची में मंदिर के नाम किसी तरह की कृषि भूमि होने का जिक्र नहीं था। जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने भूमि पर निर्माण और रजिस्ट्री पर रोक लगाते हुए अधिकारियों सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।