Rajasthan: वंश बढ़ाने के लिए कैदी को हाईकोर्ट ने दी पैरोल, राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती
कैदी को संतान प्राप्ति के लिए पैरोल देने के फैसले के खिलाफ राजस्थान सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। अगले हफ्ते सुनवाई होगी।
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सुप्रीम कोर्ट ने संतान उत्पत्ति के लिए एक कैदी को 15 दिन की पैरोल देने के राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी। दोषी नाबालिग लड़की के अपहरण और दुष्कर्म के मामले में 20 साल की सजा काट रहा है। हाईकोर्ट ने 14 अक्तूबर को दोषी के अपनी पत्नी के जरिये दायर याचिका में बच्चे पैदा करने के लिए आकस्मिक पैरोल की मांग की गई थी।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि दोषी और उसकी पत्नी की कम उम्र और पिछले एक फैसले को देखते हुए वह याचिका को स्वीकार करने और दोषी को 15 दिनों के लिए आकस्मिक पैरोल पर रिहा करने की मंजूरी दे रहा है। हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की पीठ ने रोक लगा दी।
पीठ ने हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ राजस्थान राज्य और अन्य द्वारा दायर याचिका पर दोषी से प्रतिक्रिया मांगी है। हाईकोर्ट के समक्ष याचिका में राजस्थान जेल (पैरोल पर रिहाई) नियम, 2021 के नियम 11 के तहत संतान उत्पत्ति की इच्छा के आधार पर पैरोल की मांग की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट में दायर राजस्थान सरकार व अन्य की याचिका में कहा कि हाईकोर्ट अलवर पुलिस अधीक्षक की रिपोर्ट को समझने में नाकाम रहा। रिपोर्ट में कहा था कि दोषी व्यक्ति ने नाबालिग के अपहरण और दुष्कर्म का गंभीर अपराध किया है और वह तथा पीड़िता एक ही गांव के निवासी हैं।
यह था मामला
भीलवाड़ा के 34 साल के नंदलाल को एडीजे कोर्ट ने छह फरवरी 2019 को उम्रकैद की सजा सुनाई थी, तब से वह अजमेर की जेल में बंद था। 18 मई 2021 को उसे 20 दिन की पैरोल मिली थी। उसके बाद वह निर्धारित तिथि को लौट आया था। इसके बाद कैदी नंदलाल की पत्नी ने अजमेर कलेक्टर को अर्जी दी थी। कलेक्टर ने जब अर्जी पर कोई फैसला नहीं लिया, तब पत्नी हाईकोर्ट पहुंच गई। जिसके बाद हाईकोर्ट ने 15 दिनों का पैरोल देने का आदेश दिया।